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सॉल्वर गैंग का टारगेट था पोस्ट बैंक पीओ एग्जाम
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 25 Oct 2016 11:55 PM IST
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13 आरोपी फरार, इनमें दो टीसीएस के पूर्व कर्मचारी भी
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर कल्याणपुर से पकड़े गए ऑनलाइन सॉल्वर गिरोह के टारगेट पर नवंबर में होने वाला पोस्ट बैंक (पोस्ट ऑफिस बैंक) पीओ का एग्जाम था। इसके लिए गैंग ने 15-15 लाख रुपये हर अभ्यर्थी के हिसाब से बुकिंग भी कर ली थी। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में यह बात सामने आई है। वहीं पूछताछ के आधार पर एसटीएफ ने सोमवार को लखनऊ से एक और आरोपी तनवीर को गिरफ्तार किया है। तनवीर टीसीएस (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) का पूर्व कर्मचारी है। अभी 13 आरोपी फरार हैं, इनमें दो टीसीएस के पूर्व कर्मचारी हैं। एसटीएफ ने सभी आरोपियों पर गैंगस्टर लगाने के लिए विवेचक से कहा है।
22 अप्रैल 2016 को इलाहाबाद में रेलवे रिक्रुटमेंट बोर्ड की परीक्षा के दौरान संयोगिता इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में सॉल्वर गैंग का खुलासा हुआ था। वहां से मिली जानकारियों पर काम करने पर कानपुर का गैंग प्रकाश में आया। इस लाइन पर काम करते हुए एसटीएफ ने रविवार देर रात कल्याणपुर स्थित फ्लैट से गैंग के 10 सॉल्वर पकड़े थे।
रेलवे, बैंक, एसएससी, आईबी, बीडीओ, पीडब्लूडी समेत केंद्र और राज्य सरकार की कई नौकरियों के लिए ऑनलाइन परीक्षा कराने की जिम्मेदारी टीसीएस, विप्रो जैसी प्राइवेट कंपनियों पर है। ये कंपनियां ओटीपी (ऑनलाइन टेस्टिंग पार्टनर) का काम करती हैं। कंपनी के नुमाइंदे विभिन्न सेंटरों पर जाकर परीक्षा कराते हैं। कानपुर से संचालित सॉल्वर गैंग ने इन्हीं नुमाइंदों को अपने साथ मिला लिया और तमाम नौकरियों में सेंधमारी की। हाल में प्रदेश सरकार की बीडीओ, पीडब्लूडी (जेई, एई) की परीक्षाओं में भी पैसा लेकर भर्ती कराने का आरोप लगा है। सुबूत न होने के कारण एसटीएफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाई। जानकारों के मुताबिक ओटीपी के लिए भी कोई नियामक संस्था बनाई जानी चाहिए। जैसे टेलीकॉम सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों के आने के बाद ट्राई (टेलीकॉम रेगुलेटरी अॅथारिटी ऑफ इंडिया) बनाई गई है।
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आरोपियों की संपत्ति होगी सीज
रविवार देर रात पकड़े गए रविकांत वर्मा का फतेहपुर के सकूरा में आरके एजूकेशनल ट्रस्ट नाम से इंटर कालेज बन रहा है। इसी नाम से लखनऊ के भिटौली चुंगी के पास सीतापुर रोड पर चल 250 कंप्यूटरों का सेंटर चल रहा है। फतेहपुर में पांच बीघे में कोठी बन रही है। पुलिस इन संपत्तियों को सीज कराने की प्रक्रिया जल्द शुरू करेगी। वहीं आरोपी कृष्णन प्रसन्ना उर्फ केपी ने कानपुर में एक फ्लैट लिया है, जिसकी 40 हजार रुपये महीने किस्त है। यह संपत्ति भी सीज होने की लिस्ट में है।
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22 अप्रैल 2016 को इलाहाबाद में रेलवे रिक्रुटमेंट बोर्ड की परीक्षा के दौरान संयोगिता इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में सॉल्वर गैंग का खुलासा हुआ था। वहां से मिली जानकारियों पर काम करने पर कानपुर का गैंग प्रकाश में आया। इस लाइन पर काम करते हुए एसटीएफ ने रविवार देर रात कल्याणपुर स्थित फ्लैट से गैंग के 10 सॉल्वर पकड़े थे।
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रेलवे, बैंक, एसएससी, आईबी, बीडीओ, पीडब्लूडी समेत केंद्र और राज्य सरकार की कई नौकरियों के लिए ऑनलाइन परीक्षा कराने की जिम्मेदारी टीसीएस, विप्रो जैसी प्राइवेट कंपनियों पर है। ये कंपनियां ओटीपी (ऑनलाइन टेस्टिंग पार्टनर) का काम करती हैं। कंपनी के नुमाइंदे विभिन्न सेंटरों पर जाकर परीक्षा कराते हैं। कानपुर से संचालित सॉल्वर गैंग ने इन्हीं नुमाइंदों को अपने साथ मिला लिया और तमाम नौकरियों में सेंधमारी की। हाल में प्रदेश सरकार की बीडीओ, पीडब्लूडी (जेई, एई) की परीक्षाओं में भी पैसा लेकर भर्ती कराने का आरोप लगा है। सुबूत न होने के कारण एसटीएफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाई। जानकारों के मुताबिक ओटीपी के लिए भी कोई नियामक संस्था बनाई जानी चाहिए। जैसे टेलीकॉम सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों के आने के बाद ट्राई (टेलीकॉम रेगुलेटरी अॅथारिटी ऑफ इंडिया) बनाई गई है।
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आरोपियों की संपत्ति होगी सीज
रविवार देर रात पकड़े गए रविकांत वर्मा का फतेहपुर के सकूरा में आरके एजूकेशनल ट्रस्ट नाम से इंटर कालेज बन रहा है। इसी नाम से लखनऊ के भिटौली चुंगी के पास सीतापुर रोड पर चल 250 कंप्यूटरों का सेंटर चल रहा है। फतेहपुर में पांच बीघे में कोठी बन रही है। पुलिस इन संपत्तियों को सीज कराने की प्रक्रिया जल्द शुरू करेगी। वहीं आरोपी कृष्णन प्रसन्ना उर्फ केपी ने कानपुर में एक फ्लैट लिया है, जिसकी 40 हजार रुपये महीने किस्त है। यह संपत्ति भी सीज होने की लिस्ट में है।