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Kanpur News: नियमों की अनदेखी कर सड़कों पर फर्राटा भर रही स्लीपर बसें

Sat, 26 Sep 2026 01:10 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Sat, 26 Sep 2026 01:10 AM IST
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Sleeper buses speeding on the roads in violation of rules.
कानपुर देहात। जनपद से होकर गुजरने वाली स्लीपर बसें नियमों की अनदेखी कर सड़कों पर फर्राटा भर रही हैं। बसों में क्षमता से अधिक सवारी और ऊपर सामान लोडकर नियमों की अनदेखी की जा रही है। इतना ही नहीं कई बसें मानकों से इतर मॉडिफाई होकर चल रही हैं। ऐसे में इनसे हादसे का खतरा है लेकिन जिम्मेदार सब कुछ जानते हुए भी अनजान बने हुए हैं।
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जनपद के परिवहन विभाग में सात एसी स्लीपर बसें पंजीकृत हैं। इनमें मात्र एक बस ने ही मानक पूरे किए हैं जबकि पांच में मानक पूरे न होने पर उन्हें ब्लैक लिस्ट किया गया है। विभाग के अनुसार एक बस को सीज किया गया है। अन्य बसों का संचालक धड़ल्ले से आगरा, दिल्ली व झांसी मार्ग पर हो रहा है। जिले से झांसी, उरई मार्ग व बाराजोड़ होते हुए आगरा, दिल्ली के लिए कानपुर से चलने वाली स्लीपर बसें गुजरती हैं। इसके अलावा यहां के परिवहन विभाग में पंजीकृत बसें भी रसूलाबाद आदि क्षेत्र से होते हुए चलती हैं।
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कई बसों के संचालकों ने निर्धारित मानकों के विपरीत लंबाई व चौड़ाई के साथ सीटें बढ़ा रखी है। यमुना एक्सप्रेस-वे पर बुधवार देर रात जेवर टोल प्लाजा के पास दिल्ली से महोबा के लिए जा रही एक एसी स्लीपर बस आग का गोला बन गई। चलती बस में आग लगने के बाद भी चालक ने बस नहीं रोकी। बस में सवार 35 लोग अंदर ही फंसे रहे। हादसे में नौ लोग जिंदा जल गए। इसके बाद भी संचालक सबक नहीं ले रहे और बेरोक-टोक बसों को चला रहे हैं। शुक्रवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पड़ताल की तो कई बसें मानकों की अनदेखी कर संचालित होती नजर आईं। दिल्ली से लौटने वाली कई बसों में छत के ऊपर पन्नी से ढका हुआ सामान लोड नजर आया।
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लगेज बॉक्स में भरा जाता है व्यावसायिक व ज्वलनशील सामान
बसों के लगेज बॉक्स में व्यावसायिक और ज्वलनशील सामान ले जाना पूरी तरह से गैर-कानूनी और जानलेवा होता है। सार्वजनिक परिवहन बसों में यात्रियों की सुरक्षा सबसे ऊपर होती है और इस तरह की लापरवाही बड़े हादसों का कारण बनती है। इसके बावजूद चालक-परिचालक मानकों की अनदेखी कर सामग्री को भर लेते हैं। जो गर्म होकर आग लगने का कारण बनता है।
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सीन-1-
अकबरपुर, समय शाम 6:30 बजे
अकबरपुर में शहजादपुर के पास पहुंचने पर कानपुर की तरफ से इटावा, आगरा की तरफ जाने वाली की स्लीपर बसें जाती हुई नजर आईं। तभी एक बस तेजी से आती हुई नजर आई। जो अकबरपुर ओवरब्रिज के पास दो मिनट के लिए रुकी और सवारी को बैठाकर चल दी। बस की छत पर चालक ने सामान भरकर बारिश होने की वजह से तिरपाल से ढक रखा था। जो कभी भी हादसे का कारण बन सकता है।
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सीन-2-
रनियां, समय शाम 7:10 बजे
रनियां में चिटिकपुर के पास पहुंचने पर कानपुर से इटावा, दिल्ली, जयपुर व जोधपुर व उरई की तरफ जाने वाली कई ऐसी स्लीपर बसें नजर आईं। तभी एक बस आकर रुकती है और सवारी को उतार कर आगे चल देती है। बस में मानकों की अनदेखी कर मॉडिफाई कर बदलाव किया गया था जबकि बस की छत पर चालक ने सामान भरकर तिरपाल से ढक रखा था। ऐसे में तेज रफ्तार में चलने के दौरान बस का संतुलन बिगड़ सकता है जो हादसे का कारण बन सकता है।
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बयान............
जनपद में सात स्लीपर बसें विभाग में पंजीकृत हैं। इनमें पर्याप्त अग्निशमन उपकरण न होने के कारण संचालक को कई बार मानक पूरे करने की चेतावनी दी गई। इनमें से मात्र एक ने मानक पूरे किए हैं, जबकि पांच को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है। इसके अलावा एक को थाने में सीज किया गया है। - जीवन कुमार, आरआई

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जनपद से होकर गुजरने वाली स्लीपर बसों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। बीते तीन महीनों में सौ से अधिक बसों पर कार्रवाई करते हुए चालान भी किया गया है। साथ ही संचालकों को मानकों को पूरा करने की चेतावनी दी रही है। अब इनके खिलाफ यातायात पुलिस के साथ संयुक्त टीम बनाकर अभियान चलाया जाएगा। - रोहित राजपूत, एआरटीओ, प्रवर्तन
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स्लीपर एसी बसों के यह हैं मानक
- स्लीपर बर्थ में छत के आपातकालीन निकास तक पहुंच बाधित न हों।
- स्लीपर बर्थ में कम से कम 1980 मिमी की लंबाई होनी चाहिए।
- निचली बर्थ की ऊंचाई कुशन से 200 से 350 मिमी के बीच होनी चाहिए।
- ऐसी बसों की बॉडी के लिए कोड निर्धारित हैं, जिसका पालन होना चाहिए।
- ऐसी स्लीपर बसों की मानक ऊंचाई 3800 मिमी है। हालांकि कुछ में ऊंचाई 4000 मीटर तक हो सकती है।
- बसों में पर्याप्त अग्निशमन उपकरण होने चाहिए।
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