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Kanpur News: सरल, क्रमवार और छात्रों के अनुसार पढ़ाई ज्यादा असरदार
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कानपुर। सरल, क्रमवार, चरणबद्ध और छात्रों की समझ के अनुसार पढ़ाई ज्यादा प्रभावी और असरदार है। यह निष्कर्ष छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के शोध में सामने आया है। इसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल एनल ऑफ न्यूरोसाइंसेज में प्रकाशित किया गया है। विशेषज्ञों ने 2021 से 2025 के बीच दुनिया भर के 1600 से अधिक शोध-पत्रों के गहन विश्लेषण कर निष्कर्ष निकाला है।
शोध का उद्देश्य यह समझना था कि तेजी से बढ़ रही डिजिटल शिक्षा को किस प्रकार अधिक सरल, प्रभावी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाया जा सकता है। अध्ययन में पाया गया कि केवल ऑनलाइन या डिजिटल माध्यम अपनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पढ़ाई को व्यवस्थित और चरणबद्ध ढंग से प्रस्तुत करना जरूरी है। इससे छात्र विषय को बेहतर तरीके से समझते हैं और लंबे समय तक उसे याद रख पाते हैं। यह भी सामने आया कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, चीन और सिंगापुर जैसे देश डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इन देशों में तकनीक का उपयोग विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुसार किया जा रहा है, जिससे सीखने की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अध्ययन का लाभ केवल शोधकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा। शिक्षक कक्षाओं को अधिक प्रभावी बना सकेंगे, वहीं शिक्षा संस्थान बेहतर डिजिटल सामग्री विकसित कर पाएंगे। इससे नीति-निर्माताओं को भी भविष्य की शिक्षा व्यवस्था तैयार करने में दिशा मिलेगी।
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कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि नई तकनीक का उद्देश्य केवल पढ़ाई को डिजिटल बनाना नहीं, बल्कि उसे अधिक सरल, प्रभावी और उपयोगी बनाना होना चाहिए। अध्ययन के पत्राचार लेखक डॉ. विमल सिंह ने बताया कि शोध शिक्षा को अधिक छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में सफलता इस बार निर्भर करेगी कि तकनीक को विद्यार्थियों की सुविधा और सीखने की प्रक्रिया को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
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शोध का उद्देश्य यह समझना था कि तेजी से बढ़ रही डिजिटल शिक्षा को किस प्रकार अधिक सरल, प्रभावी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाया जा सकता है। अध्ययन में पाया गया कि केवल ऑनलाइन या डिजिटल माध्यम अपनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पढ़ाई को व्यवस्थित और चरणबद्ध ढंग से प्रस्तुत करना जरूरी है। इससे छात्र विषय को बेहतर तरीके से समझते हैं और लंबे समय तक उसे याद रख पाते हैं। यह भी सामने आया कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, चीन और सिंगापुर जैसे देश डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इन देशों में तकनीक का उपयोग विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुसार किया जा रहा है, जिससे सीखने की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इस अध्ययन का लाभ केवल शोधकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा। शिक्षक कक्षाओं को अधिक प्रभावी बना सकेंगे, वहीं शिक्षा संस्थान बेहतर डिजिटल सामग्री विकसित कर पाएंगे। इससे नीति-निर्माताओं को भी भविष्य की शिक्षा व्यवस्था तैयार करने में दिशा मिलेगी।
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कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि नई तकनीक का उद्देश्य केवल पढ़ाई को डिजिटल बनाना नहीं, बल्कि उसे अधिक सरल, प्रभावी और उपयोगी बनाना होना चाहिए। अध्ययन के पत्राचार लेखक डॉ. विमल सिंह ने बताया कि शोध शिक्षा को अधिक छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में सफलता इस बार निर्भर करेगी कि तकनीक को विद्यार्थियों की सुविधा और सीखने की प्रक्रिया को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।