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सिकंदरा विधानसभा सीट : ब्राह्मण मतदाताओं को एकजुट करना बड़ी चुनौती

Thu, 10 Feb 2022 01:05 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 10 Feb 2022 01:05 AM IST
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Sikandra assembly seat : a big challenge to unite Brahmin voters
कानपुर देहात। सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र में इस बार ब्राह्मण वोट को एकजुट करना बड़ी चुनौती है। दरअसल, सपा और बसपा दोनों ही पार्टियों ने इस बार ब्राह्मण प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। ऐसे में यदि ब्राह्मण मतदाता बंटता है तो इसका फायदा दूसरे प्रत्याशियों को हो सकता है।
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दोनों ही प्रत्याशी औरैया जिले के रहने वाले हैं। वहीं भाजपा ने वर्तमान विधायक और प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री पर दोबारा भरोसा जताया है। कांग्रेस ने कटियार बिरादरी के प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। इस बिरादरी का अच्छाखासा वोट है।
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सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा से अजीत सिंह पाल चुनाव लड़ रहे हैं। अजीत पाल ने पिता मथुरा प्रसाद पाल के निधन के बाद उपचुनाव में जीत हासिल की थी। सपा ने औरैया निवासी प्रभाकर पांडेय को प्रत्याशी बनाया है।
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वहीं बसपा से औरैया के ही लालजी शुक्ला चुनावी मैदान में हैं। क्षेत्रीय जनता के बीच इस बात को लेकर कुछ असंतोष देखने को मिल रहा कि दोनों दलों को जिले का कोई ब्राह्मण चेहरा क्यों नजर नहीं आया।
हालांकि प्रभाकर पांडेय इस विधानसभा के लिए नया चेहरा नहीं हैं। इसके पहले दो बार इसी विधानसभा से चुनाव लड़ चुके हैं। एक बार निर्दलीय तो 2017 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। कांग्रेस ने जिलाध्यक्ष नरेश कटियार को टिकट दिया है। वे इस क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं।
परसीमन में डेरापुर को खत्म कर 2012 में बनी सीट
परसीमन में 2012 में डेरापुर सीट खत्म कर सिकंदरा विधानसभा सीट बनाई गई है। पहला चुनाव बसपा के इंद्रपाल सिंह ने भाजपा के मौजूदा सांसद देवेंद्र सिंह भोले को हराकर जीता था। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के मथुरा प्रसाद पाल ने बसपा के महेंद्र कटियार को हराया था। इसके बाद मथुरा पाल का निधन हो गया। 2017 में ही हुए उपचुनाव में अजीत पाल ने सपा की सीमा सचान को हराया।
चुनाव प्रचार में भी दिख रहा अंदरखाने का विरोध
सिकंदरा सीट सपा के खाते में एक बार भी नहीं गई। इस बार सपा ने प्रभाकर पांडेय को टिकट दिया है। हालांकि पार्टी के कई कद्दावर नेता भी यहां से टिकट मांग रहे थे। टिकट कटने से उनमें उपजे अंसतोष को खत्म करना भी प्रभाकर के लिए बड़ी चुनौती है। वहीं बसपा से कुर्मी बिरादरी के कुछ प्रभावशाली नेता टिकट मांग रहे थे। पार्टी ने उनकी अनदेखी कर औरैया के ब्राह्मण को मैदान में उतारा है। ऐसे में स्थानीय लोगों मना पाना बड़ी चुनौती है।

चाचा ने भतीजे की बढ़ाई मुश्किलें
सिकंदरा से सपा प्रत्याशी प्रभाकर पांडेय की मुश्किलें उनके चाचा महेंद्र पांडेय ने बढ़ा दी है। पांच दिन पहले बसपा प्रत्याशी लाल जी शुक्ला के समर्थन में खुलकर सामने आए थे। उनका प्रचार भी कर रहे हैं। यहीं नहीं प्रभाकर के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। उनके सामने चाचा को मनाने की बड़ी चुनौती है।
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