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बुंदेलखंड के प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कराया श्रीराम जन्मभूमि मंदिर भूमि पूजन
Wed, 05 Aug 2020 07:35 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 05 Aug 2020 07:35 PM IST
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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर भूमि पूजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास खड़े प्रो. रामनारायण द्विवेदी (पीले कुर्ता में)
- फोटो : अमर उजाला
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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर भूमि पूजन में वीर भूमि बुंदेलखंड भी भागीदार बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भूमि पूजन के मार्ग निर्देशन का सौभाग्य बुंदेलखंड के बाशिंदे जिले के अछरौड़ गांव निवासी और काशी विद्वत परिषद के मंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी को प्राप्त हुआ। लगभग 40 मिनट चली पूजा तीन पुजारियों ने कराई।
मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर केन नदी किनारे आबाद अछरौड़ गांव के किसान शिवनाथ प्रसाद द्विवेदी के बेटे रामनारायण द्विवेदी ने 6वीं कक्षा तक गांव में ही शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद वह काशी चले गए। वहां ज्योतिषाचार्य शुकदेव मिश्र (अब शुकदेवानंद सरस्वती) के सानिध्य में आगे की पढ़ाई की।
समय के साथ ही रामनारायण संस्कृत में दक्षता हासिल कर ली। उनका नाम संस्कृत विद्वानों में शुमार हो गया। उनकी विद्वता को देखते हुए उन्हें काशी विद्वत परिषद में मंत्री पद से नवाजा गया। वह अब भी इसी पद पर हैं। साथ ही काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी में व्याकरण के आचार्य हैं।
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श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट ने पांच दिन पूर्व रामनारायण द्विवेदी को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर भूमि पूजन के लिए सादर आमंत्रण भेजा था। द्विवेदी बताते हैं कि उनके लिए यह बेहद गौरव का संदेश था। अंतत: बुधवार (5 अगस्त) को यह शुभ क्षण आ भी गया।
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मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर केन नदी किनारे आबाद अछरौड़ गांव के किसान शिवनाथ प्रसाद द्विवेदी के बेटे रामनारायण द्विवेदी ने 6वीं कक्षा तक गांव में ही शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद वह काशी चले गए। वहां ज्योतिषाचार्य शुकदेव मिश्र (अब शुकदेवानंद सरस्वती) के सानिध्य में आगे की पढ़ाई की।
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समय के साथ ही रामनारायण संस्कृत में दक्षता हासिल कर ली। उनका नाम संस्कृत विद्वानों में शुमार हो गया। उनकी विद्वता को देखते हुए उन्हें काशी विद्वत परिषद में मंत्री पद से नवाजा गया। वह अब भी इसी पद पर हैं। साथ ही काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी में व्याकरण के आचार्य हैं।
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श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट ने पांच दिन पूर्व रामनारायण द्विवेदी को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर भूमि पूजन के लिए सादर आमंत्रण भेजा था। द्विवेदी बताते हैं कि उनके लिए यह बेहद गौरव का संदेश था। अंतत: बुधवार (5 अगस्त) को यह शुभ क्षण आ भी गया।
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की भूमि पूजा के लिए नामित तीन पुजारियों का मार्गदर्शन रामनारायण द्विवेदी को ही सौंपा गया। लगभग 40 मिनट की पूजा में उन्होंने यह काम बखूबी अंजाम दिया। उन्होंने बताया कि पूजा में सर्वदांगिनी वैदिक ब्राह्मणों ने गणपित पूजन से शुरुआत कराई।
पैतृक गांव अछरौड़ में पिता शिवनाथ प्रसाद द्विवेदी, माता रामप्यारी द्विवेदी और बड़े भाई रजनेश द्विवेदी रहते हैं और खेतीबाड़ी करते हैं। छुट्टी मिलने पर प्रो. द्विवेदी भी पैतृक गांव आते हैं। उधर, अछरौड़ गांव में बुधवार को खुशियों का माहौल रहा। प्रो. द्विवेदी के माता-पिता को बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।
प्रो. रामनारायण को मिल चुके हैं कई पुरस्कार
संस्कृत विधा में प्रख्यात प्रो. रामनारायण द्विवेदी को कई सम्मान मिल चुके हैं। वह महर्षि पाणिनी सम्मान, महर्षि व्यास सम्मान, दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित द्वारा संस्कृत भूषण सम्मान, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा विशिष्ट पुरस्कार के अलावा बिहार और हरियाणा सरकारों द्वारा व्याकरण भूषण सम्मान से सम्मानित हैं। प्रो. द्विवेदी काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के साथ प्राक्टर का दायित्व भी निभा रहे हैं। संस्कृत अध्यापन की साधना दरभंगा विश्वविद्यालय में की थी।
पैतृक गांव अछरौड़ में पिता शिवनाथ प्रसाद द्विवेदी, माता रामप्यारी द्विवेदी और बड़े भाई रजनेश द्विवेदी रहते हैं और खेतीबाड़ी करते हैं। छुट्टी मिलने पर प्रो. द्विवेदी भी पैतृक गांव आते हैं। उधर, अछरौड़ गांव में बुधवार को खुशियों का माहौल रहा। प्रो. द्विवेदी के माता-पिता को बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।
प्रो. रामनारायण को मिल चुके हैं कई पुरस्कार
संस्कृत विधा में प्रख्यात प्रो. रामनारायण द्विवेदी को कई सम्मान मिल चुके हैं। वह महर्षि पाणिनी सम्मान, महर्षि व्यास सम्मान, दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित द्वारा संस्कृत भूषण सम्मान, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा विशिष्ट पुरस्कार के अलावा बिहार और हरियाणा सरकारों द्वारा व्याकरण भूषण सम्मान से सम्मानित हैं। प्रो. द्विवेदी काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के साथ प्राक्टर का दायित्व भी निभा रहे हैं। संस्कृत अध्यापन की साधना दरभंगा विश्वविद्यालय में की थी।