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Kanpur News: लेखन में संवेदना और साहस जीवित रहना जरूरी

Mon, 16 Mar 2026 01:28 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 16 Mar 2026 01:28 AM IST
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Sensitivity and courage must remain alive in writing
कानपुर। हिंदुस्तानी एकेडमी, प्रयागराज और रामसहाय राजकीय महाविद्यालय, शिवराजपुर की ओर से रविवार को सीएसजेएमयू में कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष विषय पर केंद्रित थी।
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डॉ. ज्योति किरण ने कार्यशाला के अंतिम दिन कहा कि लेखन में संवेदना और साहस जीवित रहना जरूरी है। डिजिटल युग में समाचारों का प्रसार अत्यंत तीव्र हो गया है। यह पत्रकारों के लिए चुनौती का समय है। डिजिटल माध्यमों से आगे जाकर पाठकों को जानकारी उपलब्ध करानी है। उन्होंने मुद्रण कला की उत्पत्ति से लेकर उदंत मार्तंड तक हिंदी पत्रकारिता के प्रारंभिक विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र, गणेश शंकर विद्यार्थी और माखनलाल चतुर्वेदी के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में पत्रकारिता की भूमिका को रेखांकित किया। वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने उस दौर की पत्रकारिता में वैचारिक प्रतिबद्धता और सामाजिक उत्तरदायित्व को सर्वोपरि बताया। डॉ. नेहा मिश्रा ने पत्रकारिता की सामाजिक भूमिका एवं महिला सशक्तिकरण में उसकी महत्ता पर प्रकाश डाला। जेएनयू के जितेंद्र सिंह ने हिंदी भाषा के घटते आकर्षण पर चिंता व्यक्त की। प्रो. दीपिका कटियार ने पत्रकारिता को जनजागरण का प्रभावी माध्यम बताया।
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