निपुण भारत मिशन: शिक्षा निदेशक बोले- तीसरी तक के छात्र बनेंगे निपुण, हर साल 20 फीसदी स्कूल बनेंगे स्मार्ट
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से निपुण भारत मिशन पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें शिक्षा निदेशक विजय किरन आनंद ने कहा कि कक्षा तीन तक के छात्रों को भाषा और गणित में निपुण बनाया जाएगा। साथ ही, 20 फीसदी स्कूल हर साल स्मार्ट बनेंगे।
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कानपुर मंडल के कक्षा एक से तीन तक के स्कूली बच्चों को भाषा और गणित में निपुण बनाया जाएगा। पहले चरण में 2023 तक यह काम चलेगा। साथ ही 20 फीसदी स्कूल हर साल स्मार्ट होंगे। विद्यालयों में सीएसआर फंड से स्मार्ट क्लास बनाई जाएगी। यह बात स्कूल शिक्षा निदेशक विजय किरन आनंद ने चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कैलाश भवन सभागार में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से निपुण भारत मिशन पर आयोजित संगोष्ठी में कही।
उन्होंने कहा कि अगले तीन माह में माइक्रो प्लानिंग कर ली जाएगी। महानिदेशक ने कहा कि निपुण भारत के लिए पढ़ाई के साथ बुनियादी ज्ञान भी जरूरी है। हर गांव में बाल वाटिका बनाई जाएगी। मंडलायुक्त डॉ. राजशेखर ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान शिक्षा की मुख्य धारा से छूटे बच्चों को भाषा व गणित में दक्ष बनाने के लिए यह अभियान शुरू किया है। लाइब्रेरी, शिक्षण सामग्री का शत प्रतिशत उपयोग करके परिषदीय के बच्चों को निजी स्कूलों से भी बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी।
नई शिक्षा नीति के तहत निपुण भारत लक्ष्य हासिल करने के लिए विडियो भी दिखाए गए। इससे पहले मंडलीय संगोष्ठी का शुभारंभ स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद, मंडलायुक्त डॉ. राजशेखर ने किया। इस मौके पर डीएम कानपुर देहात नेहा जैन, सीडीओ सौम्या, सीडीओ कानपुर सुधीर कुमार व अन्य जिलों के अधिकारियों ने स्कूलों की स्थिति व कामों के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर सीडीओ, बीएसए, खंड विकास अधिकारी समेत शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी उपस्थित रहे।
मंडल में कायाकल्प का 79 फीसदी लक्ष्य पूरा
मंडलायुक्त ने बताया कि कायाकल्प योजना में कानपुर मंडल 79 फीसदी लक्ष्य पूरा कर चुका है। प्रदेश में कुल 80 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हुआ है। अब तीन माह में कानपुर मंडल को बचे हुए स्कूलों का कायाकल्प पूरा कराकर 100 फीसद लक्ष्य हासिल करना है। वर्ष 2027 तक निपुण भारत योजना के सभी लक्ष्यों को पूरा करना है।
15 दिन में मिल जाएंगी किताबें
मंडलायुक्त ने कहा कि मंडल के सभी स्कूलों में अगले 15 दिन में कापी किताबें मिल जाएंगी। यही नहीं, बच्चों की ड्रेस का पैसा भी जल्द ही खातों में पहुंचने लगेगा। जिन स्कूलों तक पहुंचने के लिए रास्ता ठीक नहीं है, उसे बनवाया जाएगा।