फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Seminar on Yati sankalp sansthan Inaugaration event

आधुनिकता के भ्रम में फंस गया इंसान, जानिए 'सरल और सहज' जीवन जीने के तरीके

Fri, 06 Jul 2018 01:56 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Fri, 06 Jul 2018 01:56 PM IST
विज्ञापन
Seminar on Yati sankalp sansthan Inaugaration event
समाजसेवी यतींद्रजीत सिंह की स्मृति में आयोजित कार्यशाला में बोले वक्ता
समाजसेवी यतींद्रजीत सिंह 'यति' की स्मृति व 50वें जन्मदिवस पर कानपुर के सिविल लाइंस स्थित लिटिल शेफ में यति संकल्प संस्थान के उद्घाटन अवसर पर ‘आधुनिकता और सरल सहज जीवन’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. अतुल कपूर, नीलिमा गुप्ता, वीरेंद्र जीत सिंह व नीतू सिंह ने दीप जलाकर किया। कार्यक्रम में शिक्षा, समाजसेवा आदि क्षेत्रों के नामचीन चेहरों ने शिरकत की। यति संकल्प संस्थान का मुख्य उद्देश्य गो सेवा, पर्यावरण संरक्षण, पिछड़े इलाकों में रोजगारपरक शिक्षा देना आदि है।
विज्ञापन


सोसायटी फॉर इंटीग्रेटेड डेवलेपमेंट ऑफ हिमालयाज, मसूरी के संस्थापक पवन गुप्ता ने सरल उदाहरण व बातों के जरिए लोगों को आधुनिकता और सहजता का मतलब समझाया। शिक्षा व्यवस्था पर कहा कि मौजूद समय में स्कूलों का पाठ्यक्रम होड़, तुलना पर आधारित है। इसका बीज मां- बाप ही बच्चे में डालते हैं जब वे उनसे कक्षा में अव्वल रहने की अपेक्षा करते हैं। आज की शिक्षा में ज्ञान और जानकारी में कोई अंतर नहीं रह गया है। स्कूलों में भ्रम फैलाया जा रहा है कि जानकारी ही ज्ञान है, लेकिन आधुनिकता के बाजार को यह भ्रम पसंद है। सबको मिलकर कोशिश करनी चाहिए कि हम ऐसा वातावरण अपने आसपास बनाएं जिससे बच्चे सजग और सरल बनें। आज के स्कूल, कॉलेज के बच्चे आत्मसंकोची हो गए हैं। मैं क्या हूं, क्या बनना चाहता, ये सब दूसरे की नजरों से तय कर रहे हैं।
विज्ञापन

आज की शिक्षा से बस नकलची ही रह जाते हैं बच्चे

Seminar on Yati sankalp sansthan Inaugaration event
मुख्य वक्ता पवन गुप्ता ने कहा कि आधुनिकता ने इंसान को भ्रम में कर दिया है
पवन गुप्ता ने बताया कि पिछले 30 सालों से वह उत्तराखंड में रह रहे हैं। हमेशा से जानना चाहते थे कि पहाड़ों में रहने वाले लोगों की जीवनशैली कैसी होती है। वहां का एक किस्सा सुनाते हुए पवन ने बताया कि वे मसूरी के एक गांव में जाया करते थे। वहां के प्रधान ने कहा कि गांव में स्कूल नहीं है तो आप बच्चों को पढ़ा दें। उन्होंने बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद गांव की महिलाओं ने कहा कि आपकी शिक्षा बच्चों को बर्बाद कर रही है। शिक्षा लेने के बाद बच्चे न घर के रहते हैं न घाट के। ये बात पहले तो उनको समझ नहीं आई लेकिन काफी अध्यनन के बाद उनको ये पता चला कि शिक्षा स्कूल और घर के बीच का फासला बढ़ाती जा रही है। शिक्षित होने के बाद बच्चों के मन में यह भाव पैदा होने लगता है कि उनका घर, परिवार, रहन- सहन ठीक नहीं है। उनके मन में हीन भावना आने लगती है। पवन बोले कि इस बात को 1909 से लेकर 1924 तक महात्मा गांधी भी लगातार कहते थे कि अंग्रेजी शिक्षा ने फासले बढ़ा दिए हैं। घर में दूसरी बोली, रहन- सहन और स्कूल में दूसरा। इस वजह से वो सहजता को भूलते हुए मॉडर्न, विकसित होने के लिए दूसरे की नकल करने लगते हैं और बस एक नकलची ही रह जाते हैं।
 
विज्ञापन

हिंदी भाषा को भूलते जा रहे लोग

Seminar on Yati sankalp sansthan Inaugaration event
ऐसा वातावरण अपने आसपास बनाएं जिससे बच्चे सजग और सरल बनें
आज की मॉडर्न जिंदगी के बारे में बात करते हुए पवन ने कहा कि आज के दौर में लोग अंग्रेजी भाषा को खासा महत्व देने लग गए हैं। उनको लगता है कि बिना अंग्रेजी जाने न उनको समाज में जगह मिलेगी और न ही एक सम्मानित जीवन। हिंदी भाषा को लेकर सबके मन में हीन भावना पैदा होने लगी है। यही वजह है कि वो अपनी मातृभाषा से दूर होते जा रहे हैं। न आज के बच्चों को लोक कथाओं का ज्ञान है और न ही लोक ज्ञान परंपरा का।  
 
विज्ञापन

पद-पैसे को सब दे रहे महत्व

Seminar on Yati sankalp sansthan Inaugaration event
मुख्य वक्ता पवन गुप्ता ने कहा कि आधुनिकता ने इंसान को भ्रम में कर दिया है
पवन बोले कि भारत में लोग एक- दूसरे और यहां तक की खुद को भी पद- पैसे ओर डिग्री के आधार पर बड़ा आदती मानते हैं। यहां पर अगर किसी पीएचडी वाले से उसका नाम पूछो तो वो अपने नाम के आगे डॉ. लगाना नहीं भूलते हैं, लेकिन ये कल्चर विदेशों में नहीं हैं। हम यहां पर अपने बच्चों को भी यही सिखाते हैं कि पद, पैसा ही सबकुछ है। भारतीयों के जीवन में सहजता तो रह नहीं गई।
 

लोक, ज्ञान, परंपरा को एक बार आजमा कर देखो

Seminar on Yati sankalp sansthan Inaugaration event
सहजता नहीं, होड़, तुलना और नकल, आज के भारत का चेहरा
अपनी संस्कृति से दूर हो रहे और आधुनिक होने की होड़ रखने वाले लोगों के लिए पवन ने कहा कि एक बार ही सही, लोग लोक ज्ञान परंपरा को आजमा कर के तो देखें। मॉडर्न साइंस लोक ज्ञान को नहीं मानती हैं। उसका कहना है कि यह अंधविश्वास है।

लोक ज्ञान के हिसाब से कौए के घोंसले की पोजीशन

Seminar on Yati sankalp sansthan Inaugaration event
समाजसेवी यतींद्रजीत सिंह की स्मृति में आयोजित कार्यशाला में बोले वक्ता
एक उदाहरण देते हुए पवन ने कहा कि लोक ज्ञान के हिसाब से कौए के घोंसले की पोजीशन देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि इस बार कितनी बारिश होगी। अगर पेड़ पर मध्य में कौआ घोंसला बनाता है तो इससे अंदाजा लगता है कि इस बार अच्छी बारिश होगी और अगर घोंसला बहुत ऊपर की ओर बना हुआ है तो अंदाजा होता है कि बारिश कम या फिर नहीं होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed