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दूसरी नदियों के किनारे इंडस्ट्री पर भी शिकंजा
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Thu, 04 Feb 2016 02:00 AM IST
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का शिकंजा अब गंगा की सह नदियों के किनारे स्थापित औद्योगिक इकाइयों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है।
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बुधवार को लखनऊ में आयोजित बैठक में मुख्य सचिव के साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर विकास सचिव और पर्यावरण विभाग सचिव ने संयुक्त रूप से एक प्रस्ताव तैयार किया है।
पिछले दिनों एनजीटी ने उत्तराखंड और उप्र सरकार को निर्देशित किया था कि गंगा में प्रदूषण रोकने के साथ साथ उसकी सहायक नदियों में भी हो रहे प्रदूषण को रोका जाना जरूरी है। गंगा और उसकी सहायक नदियों में प्रदूषण के मसले पर चार फरवरी को एनजीटी की चैंबर मीटिंग में प्रदेश सरकार इससे जुड़ा प्रस्ताव रखेगी।
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बैठक में एनजीटी के लिए मसौदे में अभी प्रदेश सरकार यह तय नहीं कर पाई है कि कानपुर के जाजमऊ में टेनरियों के कितने एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट उचित रहेगा। हालांकि इस्टीमेट कमेटी ने 25 एमएलडी के ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए एक दिन पहले ही घोषणा की थी। लेकिन प्रदेश सरकार अभी भी इसे लेकर असमंजस में पड़ी है।
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गंगा की जिन सहायक नदियों के किनारे स्थापित इंडस्ट्री पर शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है, उसमें रामगंगा नदी और काली नदी प्रमुख है। इन दोनों नदियों के किनारे स्थापित पेपर इंडस्ट्री की संख्या ज्यादा है।
बैठक में बताया गया कि एनजीटी ने केंद्र और प्रदेश सरकार को जो दिशा निर्देश जारी किया है, उसमें हरिद्वार से कानपुर के बीच के गंगा किनारे को प्रमुखता दी गई है।
बैठक में मुख्य सचिव आलोक रंजन, प्रमुख सचिव नगर विकास आलोक रंजन, प्रमुख सचिव संजीव सरन, नगर आयुक्त देवेंद्र सिंह कुशवाहा सहित जल निगम और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
रेड जोन में आते ही ‘रडार’ में आई होजरी इंडस्ट्री
कानपुर। होजरी इंडस्ट्री को रेड जोन में रखे जाने के बाद अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यहां स्थापित होजरी की प्रोसेसिंग यूनिट पर छापा मारेगा। पता करेगा कि किस फैक्ट्री के पास उसका ट्रीटमेंट प्लांट है, और किसके पास नहीं है। जिसके पास नहीं होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
होजरी प्रोसेसिंग इंडस्ट्री देश में तीन जगहों पर स्थापित है। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में, तमिलनाडु के त्रिचूर में और यूपी के कानपुर में। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस इंडस्ट्री को रेड जोन में रखते हुए देश की सभी होजरी प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को गाइड लाइन जारी की है।
जिसमें कहा गया है कि इस इंडस्ट्री में कपड़ों की रंगाई के लिए जो डाई इस्तेमाल की जाती है, वह काफी हानिकारक है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक टीयू खान ने बताया कि होजरी इंडस्ट्री का दौरा कर यह पता लगाया जाएगा कि इंडस्ट्री के संचालकों ने प्रदूषण रोकने का मानक पूरा किया है या नहीं। यदि नहीं तो ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।