Sawan 2023: सावन पर 19 साल बाद दुर्लभ संयोग, भक्तों पर बरसेगी शिव-गौरी की असीम कृपा, इनकी चमकेगी किस्मत
Kanpur News: ज्योतिषाचार्य पं. गौरव तिवारी ने बताया कि सावन के महीने में भगवान शिव पर धतूरा, बेलपत्र चावल चंदन, शहद आदि जरूर चढ़ाना चाहिए। सावन के महीने में की गई पूजा से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं।
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इस साल सावन 59 दिनों का होगा। पंचांग के अनुसार 19 साल बाद सावन पर बहुत ही खास संयोग बन रहा है, जिसमें पूरे महीने शिव और माता पार्वती दोनों की असीम कृपा भक्तों को प्राप्त होगी। सावन का महीना शिव भक्तों के लिए बहुत खास रहने वाला है। इस बार सावन का महीने पूरे दो महीने का होगा।
दरअसल इस बार मलमास लग जाने के कारण सावन 59 दिनों का हो गया है। ऐसे में शवि भक्तों को सोमवार के दिन महादेव की उपासन करने के लिए पूरे 8 सोमवार मिलेंगे। ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी के अनुसार इस बार सावन महीने की शुरुआत 4 जुलाई से होने जा रही है।
31 अगस्त को सावन का समापन होगा। सावन माह पूरा महादेव को समर्पित है, लेकिन अधिक मास के स्वामी श्री विष्णु हैं। इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। इस बार सावन में पड़ने के कारण यह अधिकमास और भी विशेष हो गया है, क्योंकि इस मास में जो भी जातक निष्ठापूर्वक भगवान का चिंतन-मनन करेगा।
शिवलिंग के जलाभिषेक से दूर होते हैं तमाम कष्ट
ज्योतिषाचार्य पं. गौरव तिवारी ने बताया कि श्रावण के हर सोमवार पर शिवलिंग का रुद्राभिषेक और जलाभिषेक करने पर तमाम कष्ट दूर हो जाते हैं और जीवन खुशियों से भर जाता है। सावन सोमवार का महत्व अधिक होता है। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति सावन के सोमवार का व्रत रखता है। उसके वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहती है।
ऐसे करें पूजन मिलेगा लाभ
ज्योतिषाचार्य पं. गौरव तिवारी ने बताया कि सावन के महीने में भगवान शिव पर धतूरा, बेलपत्र चावल चंदन, शहद आदि जरूर चढ़ाना चाहिए। सावन के महीने में की गई पूजा से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा सावन के सोमवार का व्रत करने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है।
सावन में अधिकमास 18 जुलाई से शुरू होगा
साथ ही आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। पं. अनुभव त्रिवेदी के अनुसार इस बार सावन में अधिकमास 18 जुलाई से शुरू होगा और 16 अगस्त को खत्म होगा। दरअसल, इस बार 18 जुलाई से 16 अगस्त तक सावन अधिकमास रहने वाला है। यानी इस बार 18 जुलाई से 16 अगस्त तक मलमास रहेगा।
भगवान विष्णु की भी बरसेगी कृपा
यानी इस बार सावन में भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की भी कृपा प्राप्त होगी। वैदिन पंचांग की गणना सौर मास और चंद्रमास के आधार पर की जाती है। चंद्रमास 354 दिनों का होता है और सौर मास 365 दिन का। ऐसे में 11 दिन का अंतर आता है। तीन साल के अंदर यह अंतर 33 दिन का हो जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है।
आषाढी पूर्णिमा में करें गुरू के दर्शन
ज्योतिषाचार्य पं. पीएन द्विवेदी ने बताया कि आषाढ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को आषाढी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। साथ ही इसी को गुरू पूर्णिमा कहते है । यह पर्व तीन जुलाई दिन सोमवार को है, जो जातक किसी को भी अपना गुरू मानते है। उन्हें उनकी फोटो या साक्षात उनके दर्शन करके उनकी पूजा करनी चाहिये।