{"_id":"618169abac5d3203c66f7207","slug":"sankat-kanpur-news-knp6619394106","type":"story","status":"publish","title_hn":"न मिल रही खाद और न ही बिक रहा धान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न मिल रही खाद और न ही बिक रहा धान
विज्ञापन
सफीपुर की अहाता सोसाइटी बंद होने से मायूस खड़ा खाद लेने आया किसान। संवाद
- फोटो : UNNAO
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उन्नाव। वर्तमान समय में जिले का किसान संकट के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ फसलों की बुआई के लिए खाद (डीएपी) नहीं मिल रही है। वहीं दूसरी तरफ सचिवों की हड़ताल से धान भी नहीं बिक पा रहा है।
जिले में एक नवंबर से धान खरीद शुरू हो चुकी है। इस बार तीन एजेंसियों को खरीद की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें विपणन शाखा के 9, पीसीएफ के 23 और एफसीआई का एक केंद्र खोला गया है। पीसीएफ ने अपने अधिकांश केंद्र साधन सहकारी समितियों में ही खोले हैं लेकिन वर्तमान में समितियों के सचिव विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं। इस कारण पीसीएफ के केंद्रों पर ताले पड़े हैं। हसनगंज ब्लॉक में हरौनी समसुद्दीनपुर, धौरा, मोहनीखेड़ा, नवीनगर खेरवा केंद्र मंगलवार को भी बंद रहे। हिलौली साधन सहकारी समिति में बना धान क्रय केंद्र में भी ताला लटका मिला। जिससे यहां पर उपज बेचने के लिए पहुंचे किसानों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। जिला खाद्य विपणन अधिकारी श्याम मिश्रा ने बताया कि पीसीएफ के कुछ केंद्र खुलने की जानकारी हुई थी लेकिन कार्य बहिष्कार के चलते खरीद नहीं हुई।
उधर, रबी सीजन की शुरुआत होते ही समितियों से खाद गायब हो चुकी है। जिले में 145 समितियां क्रियाशील हैं। यही नहीं निजी दुकानों में भी स्थितियां खराब हैं। हसनगंज ब्लाक में 10 सोसाइटी सेंटरों पर डीएपी का स्टाक शून्य है। खाद न होने से किसान लौट रहे हैं। मोहान पीसीएफ सेंटर पहुंचे किसान रामसजीवन, रमेश मिश्रा, राकेश, रिंकू डीएपी लेने के पहुंचे। यहां पर ताला लटका देख वापस लौट गए। सफीपुर की अहाता सोसाइटी पर भी खाद न होने से किसान मायूस हुए। हिलौली की साधन सहकारी समिति में डीएपी नहीं है। वहीं जिन निजी दुकानों में डीएपी है भी तो वह इस समय ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। सहायक निबंधक वीरेंद्र बाबू दीक्षित ने बताया कि इफको के अधिकारियों से बात की गई है। मंगलवार को दोबारा एक रैक डीएपी व यूरिया का मांगपत्र फिर भेजा गया है। उम्मीद है कि एक सप्ताह के अंदर खाद आ जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में एक नवंबर से धान खरीद शुरू हो चुकी है। इस बार तीन एजेंसियों को खरीद की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें विपणन शाखा के 9, पीसीएफ के 23 और एफसीआई का एक केंद्र खोला गया है। पीसीएफ ने अपने अधिकांश केंद्र साधन सहकारी समितियों में ही खोले हैं लेकिन वर्तमान में समितियों के सचिव विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं। इस कारण पीसीएफ के केंद्रों पर ताले पड़े हैं। हसनगंज ब्लॉक में हरौनी समसुद्दीनपुर, धौरा, मोहनीखेड़ा, नवीनगर खेरवा केंद्र मंगलवार को भी बंद रहे। हिलौली साधन सहकारी समिति में बना धान क्रय केंद्र में भी ताला लटका मिला। जिससे यहां पर उपज बेचने के लिए पहुंचे किसानों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। जिला खाद्य विपणन अधिकारी श्याम मिश्रा ने बताया कि पीसीएफ के कुछ केंद्र खुलने की जानकारी हुई थी लेकिन कार्य बहिष्कार के चलते खरीद नहीं हुई।
विज्ञापन
उधर, रबी सीजन की शुरुआत होते ही समितियों से खाद गायब हो चुकी है। जिले में 145 समितियां क्रियाशील हैं। यही नहीं निजी दुकानों में भी स्थितियां खराब हैं। हसनगंज ब्लाक में 10 सोसाइटी सेंटरों पर डीएपी का स्टाक शून्य है। खाद न होने से किसान लौट रहे हैं। मोहान पीसीएफ सेंटर पहुंचे किसान रामसजीवन, रमेश मिश्रा, राकेश, रिंकू डीएपी लेने के पहुंचे। यहां पर ताला लटका देख वापस लौट गए। सफीपुर की अहाता सोसाइटी पर भी खाद न होने से किसान मायूस हुए। हिलौली की साधन सहकारी समिति में डीएपी नहीं है। वहीं जिन निजी दुकानों में डीएपी है भी तो वह इस समय ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। सहायक निबंधक वीरेंद्र बाबू दीक्षित ने बताया कि इफको के अधिकारियों से बात की गई है। मंगलवार को दोबारा एक रैक डीएपी व यूरिया का मांगपत्र फिर भेजा गया है। उम्मीद है कि एक सप्ताह के अंदर खाद आ जाएगी।
विज्ञापन