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विधायक कुलदीप सेंगर को साजिशन फंसाया गया, यह भी एक साजिश का हिस्सा था- संगीता सेंगर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 20 Aug 2018 10:10 PM IST
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जिला पंचायत अध्यक्ष संगीता सेंगर
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उन्नाव जिला पंचायत अध्यक्ष व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की पत्नी ने कहा कि उनके पति व परिवार को कुछ लोगों ने साजिशन फंसा रहे हैं। मामले की जांच सीबीआई कर रही है और न्यायालय ने दोषी साबित नहीं किया है। लेकिन षड़यंत्रकारी झूठी अफवाह फैलाकर बदनाम कर रहे हैं। कथित पीड़िता को फर्जी टीसी देने का मुकदमा भी झूठा है। जिला पंचायत अध्यक्ष व विधायक कुलदीप सेंगर की पत्नी संगीता सेंगर ने यह बात कही।
कहा कि कुछ लोगों ने सालों तक साजिश रचकर हमारे पति व परिवार के लोगों को फंसाया है। बताया कि पिछले दिनों कानपुर में एक दुष्कर्म का आरोप लगा तो उसे विधायक कुलदीप सेंगर का भतीजा बता दिया गया। हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं है। जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि कथित पीड़िता के चाचा की ओर से विधायक कुलदीप सेंगर पर स्कूल से फर्जी टीसी जारी करने का जो मुकदमा 19 मई को दर्ज कराया गया, वह भी गलत है।
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कहा कि कुछ लोगों ने सालों तक साजिश रचकर हमारे पति व परिवार के लोगों को फंसाया है। बताया कि पिछले दिनों कानपुर में एक दुष्कर्म का आरोप लगा तो उसे विधायक कुलदीप सेंगर का भतीजा बता दिया गया। हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं है। जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि कथित पीड़िता के चाचा की ओर से विधायक कुलदीप सेंगर पर स्कूल से फर्जी टीसी जारी करने का जो मुकदमा 19 मई को दर्ज कराया गया, वह भी गलत है।
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विधायक को फंसाने के लिए यह भी एक साजिश का हिस्सा था
जिला पंचायत अध्यक्ष संगीता सेंगर
- फोटो : अमर उजाला
स्कूल के प्रबंधक उनके देवर (विधायक के छोटे भाई) अतुल सेंगर हैं। विद्यालय से कोई टीसी जारी नहीं की गई। विद्यालय की ओर से लेटर पैड पर वादी के चचेरे भाई टिंकू सिंह ने कथित पीड़िता का नाम व उम्र लिखकर विद्यालय के प्रधानाचार्य से हस्ताक्षर करा लिए थे।
लेटर पैड उम्र का प्रमाणपत्र नहीं होता। विधायक को फंसाने के लिए यह भी एक साजिश का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि जांच ऐजेंसी की जांच और न्यायालय का फैसला आने से पहले फैलाई जा रही अफवाहों पर ध्यान न दें। अगर किसी को ऐसी सूचना मिलती है तो हमारा पक्ष भी जान लें।
लेटर पैड उम्र का प्रमाणपत्र नहीं होता। विधायक को फंसाने के लिए यह भी एक साजिश का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि जांच ऐजेंसी की जांच और न्यायालय का फैसला आने से पहले फैलाई जा रही अफवाहों पर ध्यान न दें। अगर किसी को ऐसी सूचना मिलती है तो हमारा पक्ष भी जान लें।