इस महिला की लाठियाें से कांपती है यूपी-एमपी की पुलिस
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बांदा के बेहद गरीब परिवार में जन्मी इस महिला की कहानी अापकी रूह कंपा देगी। 12 साल की उम्र में ही उसकी शादी उससे तीन गुना ज्यादा उम्र के सब्जी वाले से कर दी जाती है। ससुराल में पहुंचते ही मासूम बच्ची पर पूरे घर की जिम्मेदारी दे दी जाती। पूरे घर का काम न करने पर उसे पीटा जाता था। मासूम बच्ची ने एक बार एक दलित काे पानी क्या पिला दिया पूरे गांव ने मिलकर उसे गांव से ही निकाल दिया। अाज ये बच्ची बड़ी हाे चुकी है अाैर लाखाें महिलाएं उसे अपना अादर्श मानती हैं....
दर्दनाक है जिंदगी की दास्तां
पड़ाेसन के पति काे खेत में घसीट-घसीटकर पीटा
संपत ने अपना ससुराल छोड़ दिया, लेकिन मजबूर और कमजोर की आवाज उठाने का इरादा उन्होंने कभी नहीं छोड़ा। एक दिन अपने पड़ोस की एक महिला के साथ उसके पति को मार-पीट करते हुए संपत ने देखा। संपत ने उसे रोका, लेकिन तब उस व्यक्ति ने इसे अपना पारिवारिक मामला बता कर उन्हें बीच-बचाव करने से रोक दिया। इस घटना के बाद उस शख्स को सबक सीखाने के लिए संपत ने पांच महिलाओं को एकजुट कर उस व्यक्ति को खेतों में पीटा। ये ही वो समय था जब गुलाबी गैंग की शुरुआत हुई।
एसडीएम और सीओ को पीटा
साल 2006 में संपत उस वक्त एक बार फिर चर्चा में आईं जब उन्होंने दुराचार के एक मामले में अतर्रा के तत्कालीन थानाध्यक्ष को बंधक बना लिया। मऊ थाने में अवैध खनन के आरोप में पकड़े गए मजदूरों को छोडऩे की मांग को लेकर गुलाबी गैंग की महिलाएं तहसील परिसर में धरने पर बैठ गईं। पुलिस ने बलप्रयोग किया और इसके बाद गुलाबी गैंग की महिलाओं ने एसडीएम और सीओ को दौड़ा-दौड़ा कर ना सिर्फ पीटा बल्कि उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया। इन घटनाओं के बाद राज्य के पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह ने गुलाबी गैंग को नक्सली संगठन करार दिया और संपत पाल सहित कई महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया।
दुनिया की सौ प्रेरक प्रभावशाली महिलाओं में शामिल
साल 2011 में अंतरराष्ट्रीय अखबार द गार्जियन ने संपत पाल को दुनिया की सौ प्रभावशाली प्रेरक महिलाओं की सूची में शामिल किया। इसके बाद कई देसी-विदेशी संस्थाओं ने संपत पाल पर डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनाई। फ्रांस की एक मैग्जीन ओह ने साल 2008 में संपत पाल के जीवन पर आधारित एक पुस्तक का प्रकाशन किया, जिसका नाम था 'मॉय संपत पाल, चेफ द गैंग इन सारी रोजÓ जिसका मतलब है मैं संपत पाल- गुलाबी साड़ी में गैंग की मुखिया।
अब बन चुकी हैं लीडर
बुंदेलखंड के बांदा और आसपास के इलाके में गुलाबी गैंग का अपना अलग ही रुतबा हैं। पीडि़तों की मदद में अफसरों की पिटाई से लेकर उनका जुलूस तक निकाल देना इस गैंग के लिए आम बात है। इस गैंग की मुखिया संपत पाल की पहचान हाथ में लाठी और गुलाबी साड़ी है। वैसे तो बांदा-चित्रकूट इलाके की पहचान लंबे अरसे से डकैत प्रभावित इलाके के तौर पर है। ददुआ से लेकर ठोकिया ने आम आदमी को अपनी छाया में जीने को मजबूर किया है, मगर गुलाबी गैंग इनके ठीक उलट है। यह गैंग लोगों के हमदर्द के तौर पर अपनी पहचान बना चुका है। जबकि संपत अब राजनीति के मैदान में भी उतर चुकी हैं। वह इस कार चित्रकूट से सपा-कांग्रेस गठबंधन से विधानसभा चुनाव लड़ रही हैं। हालांकि वह अाज भी अपनी बात मनवाने के लिए लाठियाें का ही सहारा लेती हैं अाैर उतर जाती हैं पुलिस के खिलाफ।