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Kanpur News: सलेमपुर सीएचसी खुद बीमार, कैसे हो उपचार
Mon, 24 Aug 2026 12:28 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Mon, 24 Aug 2026 12:28 AM IST
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कानपुर देहात/राजपुर। सलेमपुर सीएचसी इन दिनों खुद बीमार है। यहां भला मरीजों का उपचार कैसे होगा। सीएचसी में स्टाफ की कमी के चलते मरीजों को सामान्य जांच की सुविधा नहीं मिल रही। सीएचसी को शुरू हुए 13 साल बीत चुके हैं। यहां अभी तक न तो प्रसव की सुविधा शुरू हुई और न ही इमरजेंसी का संचालन शुरू हो सका। हालांकि मरीजों को डॉक्टर से परामर्श और दवाई जरूर मिल रही है।
सलेमपुर सीएचसी पर बीहड़ पट्टी की 25 हजार की आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं देने की जिम्मा है। बीहड़ पट्टी के सलेमपुर, राजपुर नगर का कुछ हिस्सा, बैना, जैनपुर, देवनपुर, रसूलपुर, जैनपुर, मदियापुर सहित 20 गांवों के करीब 25 हजार लोगों को चिकित्सा सुविधा के लिए लंबी दूरी तय न करना पड़े, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से वर्ष 2013 में सीएचसी का संचालन शुरू किया गया था। अफसरों की अनदेखी के चलते सीएचसी में कभी संसाधनों की कमी तो कभी डॉक्टर व स्टाफ के अभाव के चलते मरीजों को अभी तक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
अस्पताल में मलेरिया, हीमोग्लोबिन से लेकर किडनी, लिवर व रक्त की अन्य जांचों के लिए किट, सीबीसी, बॉयोकेमिस्ट्री मशीन उपलब्ध है लेकिन तीन साल से एलटी की तैनाती नहीं है। वहीं, डेढ़ माह से एक्स-रे मशीन भी खराब पड़ी है। डॉक्टर के जांच की सलाह देने पर मरीजों को दूसरी पीएचसी, सीएचसी या निजी सेंटर की ओर रुख करना पड़ता है। इससे मरीजों की जेब व समय दोनों पर असर पड़ रहा है।
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गर्भवतियों व हादसे में घायल होने वालों को होती परेशानी
शासन की गाइड लाइन के अनुसार सीएचसी में 24 घंटे आकस्मिक चिकित्सा सेवा व गर्भवतियों के प्रसव की व्यवस्था होनी चाहिए मगर सलेमपुर सीएचसी में ओपीडी का समय पूरा होने के बाद ताला लटक जाता है। स्टाफ के अभाव में 13 साल बीतने के बाद भी यहां न तो प्रसव सेवा शुरू हो सकी है और न ही इमरजेंसी का संचालन शुरू किया जा सका। यहां तक कि शासन की ओर से जच्चा- बच्चा की मृत्युदर पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे सुरक्षित मातृत्व अभियान में आने वाली गर्भवतियों को जांच के लिए राजपुर पीएचसी की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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छह माह से धूल फांक रही डेंटल चेयर
सलेमपुर सीएचसी में मरीजों की सुविधाओं के लिए करीब छह माह पहले डेंटल चेयर दी गई थी लेकिन डेंटल सर्जन न होने के चलते यह चेयर आज तक प्रयोग में न आने के चलते धूल फांक रही है। वहीं अस्पताल में ही मरीजों को महंगी दवाइयों को सस्ते दामों पर उपलब्ध करवाने के लिए जन औषधि केंद्र के लिए कक्ष तो निर्धारित किया गया है लेकिन सुविधाओं के अभाव के चलते अभी तक जन औषधि केंद्र का भी संचालन शुरू नहीं हुआ है। जरूरत पड़ने पर मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोरों से दवा खरीदनी पड़ती है।
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सीएचसी के पास नहीं है स्वयं का अधीक्षक
सलेमपुर सीएचसी के पास वर्तमान में खुद का अधीक्षक भी नहीं है। राजपुर पीएचसी अधीक्षक डॉ. सलिल सचान के पास सीएचसी का प्रभार है। एक सीएचसी में चार सर्जन, फिजिसियन, गायनेकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिक सहित चार मेडिकल ऑफीसर, एक फार्मासिस्ट, एक से दो लैब टेक्नीसियन, एक्स-रे टेक्नीसियन, छह से सात स्टाफ नर्स व वार्ड ब्वॉय, सफाई कर्मी व चौकीदार की तैनाती होनी चाहिए लेकिन पीएचसी में दो मेडिकल ऑफीसर, आयुष चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट, एक्स-रे टेक्नीसियन, डेंटल हाईजीनिस्ट, एक चपरासी व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की तैनाती है।
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स्वास्थ्य सेवाएं सुधरें तो मिल राहत
सीएचसी खुले 13 साल बीत चुके हैं। सुविधाओं के अभाव में क्षेत्र की गर्भवतियों को परेशानी होती हैं। उन्हें जांच व प्रसव के लिए दूसरे स्थान पर जाना पड़ता है। स्वास्थ्य सेवाएं सुधारी जाएं तो राहत मिले। - भूरे खान, खासबरा
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सीएचसी में अभी तक आकस्मिक सेवाएं शुरू नहीं की गई हैं। इसके चलते हादसों में घायल होने व रात में आकस्मिक चिकित्सा के लिए राजपुर पीएचसी की दौड़ लगानी पड़ती है। सुविधा जल्द शुरू करवाई जाए। - शिवकुमार, औड़ेरी
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बयान.....
प्रसव व आकस्मिक सेवा राजपुर पीएचसी में संचालित की जा रही है। सीएचसी की दूरी वहां से ज्यादा नहीं है। स्टाफ के अभाव में पास-पास दो सुविधाएं संचालित नहीं की जा सकती हैं। अन्य खामियों को जल्द ही दूर किया जाएगा। - डॉ. जय गोविंद, सीएमओ
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सलेमपुर सीएचसी पर बीहड़ पट्टी की 25 हजार की आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं देने की जिम्मा है। बीहड़ पट्टी के सलेमपुर, राजपुर नगर का कुछ हिस्सा, बैना, जैनपुर, देवनपुर, रसूलपुर, जैनपुर, मदियापुर सहित 20 गांवों के करीब 25 हजार लोगों को चिकित्सा सुविधा के लिए लंबी दूरी तय न करना पड़े, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से वर्ष 2013 में सीएचसी का संचालन शुरू किया गया था। अफसरों की अनदेखी के चलते सीएचसी में कभी संसाधनों की कमी तो कभी डॉक्टर व स्टाफ के अभाव के चलते मरीजों को अभी तक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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अस्पताल में मलेरिया, हीमोग्लोबिन से लेकर किडनी, लिवर व रक्त की अन्य जांचों के लिए किट, सीबीसी, बॉयोकेमिस्ट्री मशीन उपलब्ध है लेकिन तीन साल से एलटी की तैनाती नहीं है। वहीं, डेढ़ माह से एक्स-रे मशीन भी खराब पड़ी है। डॉक्टर के जांच की सलाह देने पर मरीजों को दूसरी पीएचसी, सीएचसी या निजी सेंटर की ओर रुख करना पड़ता है। इससे मरीजों की जेब व समय दोनों पर असर पड़ रहा है।
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गर्भवतियों व हादसे में घायल होने वालों को होती परेशानी
शासन की गाइड लाइन के अनुसार सीएचसी में 24 घंटे आकस्मिक चिकित्सा सेवा व गर्भवतियों के प्रसव की व्यवस्था होनी चाहिए मगर सलेमपुर सीएचसी में ओपीडी का समय पूरा होने के बाद ताला लटक जाता है। स्टाफ के अभाव में 13 साल बीतने के बाद भी यहां न तो प्रसव सेवा शुरू हो सकी है और न ही इमरजेंसी का संचालन शुरू किया जा सका। यहां तक कि शासन की ओर से जच्चा- बच्चा की मृत्युदर पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे सुरक्षित मातृत्व अभियान में आने वाली गर्भवतियों को जांच के लिए राजपुर पीएचसी की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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छह माह से धूल फांक रही डेंटल चेयर
सलेमपुर सीएचसी में मरीजों की सुविधाओं के लिए करीब छह माह पहले डेंटल चेयर दी गई थी लेकिन डेंटल सर्जन न होने के चलते यह चेयर आज तक प्रयोग में न आने के चलते धूल फांक रही है। वहीं अस्पताल में ही मरीजों को महंगी दवाइयों को सस्ते दामों पर उपलब्ध करवाने के लिए जन औषधि केंद्र के लिए कक्ष तो निर्धारित किया गया है लेकिन सुविधाओं के अभाव के चलते अभी तक जन औषधि केंद्र का भी संचालन शुरू नहीं हुआ है। जरूरत पड़ने पर मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोरों से दवा खरीदनी पड़ती है।
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सीएचसी के पास नहीं है स्वयं का अधीक्षक
सलेमपुर सीएचसी के पास वर्तमान में खुद का अधीक्षक भी नहीं है। राजपुर पीएचसी अधीक्षक डॉ. सलिल सचान के पास सीएचसी का प्रभार है। एक सीएचसी में चार सर्जन, फिजिसियन, गायनेकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिक सहित चार मेडिकल ऑफीसर, एक फार्मासिस्ट, एक से दो लैब टेक्नीसियन, एक्स-रे टेक्नीसियन, छह से सात स्टाफ नर्स व वार्ड ब्वॉय, सफाई कर्मी व चौकीदार की तैनाती होनी चाहिए लेकिन पीएचसी में दो मेडिकल ऑफीसर, आयुष चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट, एक्स-रे टेक्नीसियन, डेंटल हाईजीनिस्ट, एक चपरासी व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की तैनाती है।
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स्वास्थ्य सेवाएं सुधरें तो मिल राहत
सीएचसी खुले 13 साल बीत चुके हैं। सुविधाओं के अभाव में क्षेत्र की गर्भवतियों को परेशानी होती हैं। उन्हें जांच व प्रसव के लिए दूसरे स्थान पर जाना पड़ता है। स्वास्थ्य सेवाएं सुधारी जाएं तो राहत मिले। - भूरे खान, खासबरा
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सीएचसी में अभी तक आकस्मिक सेवाएं शुरू नहीं की गई हैं। इसके चलते हादसों में घायल होने व रात में आकस्मिक चिकित्सा के लिए राजपुर पीएचसी की दौड़ लगानी पड़ती है। सुविधा जल्द शुरू करवाई जाए। - शिवकुमार, औड़ेरी
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बयान.....
प्रसव व आकस्मिक सेवा राजपुर पीएचसी में संचालित की जा रही है। सीएचसी की दूरी वहां से ज्यादा नहीं है। स्टाफ के अभाव में पास-पास दो सुविधाएं संचालित नहीं की जा सकती हैं। अन्य खामियों को जल्द ही दूर किया जाएगा। - डॉ. जय गोविंद, सीएमओ