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सहकारी समितियों पर जरूरत के मुताबिक नहीं है खाद
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सहकारी समिति सौरिख पर खाद का स्टाक दिखाते सचिव अशोक कुमार यादव।
- फोटो : CHIBRAMAU
कन्नौज। खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल में यूरिया की जरूरत है। निजी दुकानदारों के यहां यूरिया का स्टाक निल हो चुका है। सहकारी समितियों पर जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध नहीं है। इससे किसान परेशान हैं।
नगर की पूर्वी सहकारी समिति पर बुधवार को 500 बोरी यूरिया, 1150 बोरी डीएपी, 11 सौ बोरी एनपीके, 10 से 12 क्विंटल जिंक और 4 से 6 क्विंटल घुलनशील खाद का स्टाक था। इस समिति से करीब 22 सौ किसान जुड़े हैं। समिति के प्रबंध निदेशक धीरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि समिति के सदस्य न होने के बाद भी जो किसान खाद लेने के लिए आ रहे, उन्हें अधिकतम पांच बोरी यूरिया उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारी भले ही किसानों को यूरिया उपलब्ध कराने के दावे कर रहे हों, सच्चाई कुछ और ही है। खाद लेने आने वाले किसानों पर दबाव बनाकर जिंक भी दी जा रही है। ऐसे में किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। वहीं सौरिख प्रतिनिधि के अनुसार किसान सेवा सहकारी समिति के सचिव अशोक कुमार यादव ने बताया कि गोदाम पर यूरिया की 255 बोरी, डीएपी की 450 बोरी औैर एनपीके 1074 बोरी मौजूद है। किसानों को यूरिया 266.50, डीएपी 1150 व एनपीके 1100 रुपये में दी जा रही है।
छापे के बाद दुकानों पर पड़े ताले, चुपके से हो रही बिक्री
सौरिख। खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए छापेमारी की कार्रवाई से खाद विक्रेताओं में हड़कंप है। ज्यादातर दुकानों के शटर बंद हैं। खुलने वाली दुकानों में यूरिया का स्टाक खत्म हो चुका है। ऐसे में किसान परेशान हैं। भावलपुर में जिला कृषि अधिकारी ने छापा मारकर यूरिया को अधिक दामों पर बेचने के आरोप में बालाजी ट्रेडिंग कंपनी को सील कर दिया था। खाद विक्रेता के खिलाफ मंगलवार को मुकदमा पंजीकृत कराया था। इसके बाद से खाद विक्रेताओं में हड़कंप है। दुकानदार दुकानों पर ताला डालकर आसपास की दूसरी दुकानों पर बैठकर खाद की बिक्री कर रहे हैं। यहां कीमत ज्यादा होने से किसान सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं। किसानों का आरोप है कि सहकारी समितियों पर सदस्य किसानों को ही खाद मुश्किल से मिल पा रही है।
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नगर की पूर्वी सहकारी समिति पर बुधवार को 500 बोरी यूरिया, 1150 बोरी डीएपी, 11 सौ बोरी एनपीके, 10 से 12 क्विंटल जिंक और 4 से 6 क्विंटल घुलनशील खाद का स्टाक था। इस समिति से करीब 22 सौ किसान जुड़े हैं। समिति के प्रबंध निदेशक धीरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि समिति के सदस्य न होने के बाद भी जो किसान खाद लेने के लिए आ रहे, उन्हें अधिकतम पांच बोरी यूरिया उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारी भले ही किसानों को यूरिया उपलब्ध कराने के दावे कर रहे हों, सच्चाई कुछ और ही है। खाद लेने आने वाले किसानों पर दबाव बनाकर जिंक भी दी जा रही है। ऐसे में किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। वहीं सौरिख प्रतिनिधि के अनुसार किसान सेवा सहकारी समिति के सचिव अशोक कुमार यादव ने बताया कि गोदाम पर यूरिया की 255 बोरी, डीएपी की 450 बोरी औैर एनपीके 1074 बोरी मौजूद है। किसानों को यूरिया 266.50, डीएपी 1150 व एनपीके 1100 रुपये में दी जा रही है।
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छापे के बाद दुकानों पर पड़े ताले, चुपके से हो रही बिक्री
सौरिख। खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए छापेमारी की कार्रवाई से खाद विक्रेताओं में हड़कंप है। ज्यादातर दुकानों के शटर बंद हैं। खुलने वाली दुकानों में यूरिया का स्टाक खत्म हो चुका है। ऐसे में किसान परेशान हैं। भावलपुर में जिला कृषि अधिकारी ने छापा मारकर यूरिया को अधिक दामों पर बेचने के आरोप में बालाजी ट्रेडिंग कंपनी को सील कर दिया था। खाद विक्रेता के खिलाफ मंगलवार को मुकदमा पंजीकृत कराया था। इसके बाद से खाद विक्रेताओं में हड़कंप है। दुकानदार दुकानों पर ताला डालकर आसपास की दूसरी दुकानों पर बैठकर खाद की बिक्री कर रहे हैं। यहां कीमत ज्यादा होने से किसान सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं। किसानों का आरोप है कि सहकारी समितियों पर सदस्य किसानों को ही खाद मुश्किल से मिल पा रही है।
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