{"_id":"59c913254f1c1bd8538b4573","slug":"sadguru-jaggi-vasudev-in-kanpur","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अब नहीं जागे तो 50 साल में खत्म हो जाएंगी नदियांः सदगुरु ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब नहीं जागे तो 50 साल में खत्म हो जाएंगी नदियांः सदगुरु
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 25 Sep 2017 08:11 PM IST
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सदगुरु जग्गी वासुदेव
- फोटो : अमर उजाला
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हमारे देश की नदियां सिकुड़ने लगी हैं। नदियों में पाए जाने वाले जलीय जंतु विलुप्त हो रहे हैं। भूगर्भ जल भी तेजी से घट रहा है। पक्षी, पौधे समाप्त हो रहे हैं और अब अगला नंबर मनुष्य का है। यह देश के लिए चिंताजनक है। अगर हम अभी नहीं चेते तो अगले 50 सालों में कई बड़ी नदियों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा और बूंद-बूंद पानी को तरसना पड़ेगा। यह बातें नदियों को बचाने के लिए रैली निकाल रहे ईशा फांउडेशन के सदगुरु जग्गी वासुदेव ने कानपुर में कहीं। सोमवार को उनकी रैली पीएसआईटी पहुंची।
कानपुर में उन्होंने हजारों छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। बोले, नदियां जीवनदायिनी हैं। इसके बचाव के लिए युवाओं को आगे आना चाहिए। नदियों की स्थिति देश में काफी खराब हो चुकी है। इसे दोबारा पुराने स्वरूप में लाने के लिए कम से कम 25 साल लगेंगे। इसलिए इस लक्ष्य को पूरा करने की जिम्मेदारी देश के युवाओं के कंधे पर ही है।
सदगुरु ने कहा कि जब तक राष्ट्रीय नीति तैयार नहीं होगी तब तक सफलता मिलना मुश्किल है। इसके लिए वह दो अक्तूबर को रैली का समापन करते हुए दिल्ली में केंद्र सरकार को 2700 विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई नीति का प्रारूप सौंपेंगे। इसके पहले संस्थान के अध्यक्ष प्रणवीर सिंह, उपाध्यक्ष निर्मला सिंह, प्रबंध निदेशक शेफाली राज ने सदगुरु जग्गी वासुदेव का तिलक लगाकर और उन्हें पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया। कार्यक्रम के समन्वयक सह आचार्य डॉ. सुरेंद्र कौर ने संचालन किया।
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कानपुर में उन्होंने हजारों छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। बोले, नदियां जीवनदायिनी हैं। इसके बचाव के लिए युवाओं को आगे आना चाहिए। नदियों की स्थिति देश में काफी खराब हो चुकी है। इसे दोबारा पुराने स्वरूप में लाने के लिए कम से कम 25 साल लगेंगे। इसलिए इस लक्ष्य को पूरा करने की जिम्मेदारी देश के युवाओं के कंधे पर ही है।
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सदगुरु ने कहा कि जब तक राष्ट्रीय नीति तैयार नहीं होगी तब तक सफलता मिलना मुश्किल है। इसके लिए वह दो अक्तूबर को रैली का समापन करते हुए दिल्ली में केंद्र सरकार को 2700 विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई नीति का प्रारूप सौंपेंगे। इसके पहले संस्थान के अध्यक्ष प्रणवीर सिंह, उपाध्यक्ष निर्मला सिंह, प्रबंध निदेशक शेफाली राज ने सदगुरु जग्गी वासुदेव का तिलक लगाकर और उन्हें पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया। कार्यक्रम के समन्वयक सह आचार्य डॉ. सुरेंद्र कौर ने संचालन किया।
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छह हजार छात्रों ने बनाया कीर्तिमान
सदगुरु जग्गी वासुदेव
- फोटो : अमर उजाला
संस्थान के छह हजार छात्र-छात्राएं, प्रोफेसरों व कर्मचारियों ने जग्गी वासुदेव के स्वागत के दौरान रैली फॉर रिवर्स अभियान से जुड़ने के लिए 800980009 पर मिस्ड कॉल की। संस्थान का दावा है कि यह अब तक का कीर्तिमान है कि किसी एक कार्यक्रम में इतनी संख्या में लोग जुड़े हों। संस्थान के अध्यक्ष प्रणवीर सिंह ने बताया कि अभी अभियान से जुड़ने वालों की संख्या और अधिक बढ़ेगी। संस्थान में पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्राओं के परिजन भी मिस्ड कॉल कर इस अभियान से जुड़ेंगे।
50 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे सदगुरु
सदगुरु जग्गी वासुदेव का कार्यक्रम पहले रविवार शाम पीएसआईटी में तय था लेकिन उन्हें भोपाल से निकलने में देर हो गई। इस कारण उन्होंने वहां से निकलने के बाद झांसी में विश्राम किया और फिर सोमवार को शहर के लिए निकले। सदगुरु जग्गी वासुदेव के साथ 50 गाड़ियों का काफिला था। वह अपनी गाड़ी खुद चला रहे थे।
50 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे सदगुरु
सदगुरु जग्गी वासुदेव का कार्यक्रम पहले रविवार शाम पीएसआईटी में तय था लेकिन उन्हें भोपाल से निकलने में देर हो गई। इस कारण उन्होंने वहां से निकलने के बाद झांसी में विश्राम किया और फिर सोमवार को शहर के लिए निकले। सदगुरु जग्गी वासुदेव के साथ 50 गाड़ियों का काफिला था। वह अपनी गाड़ी खुद चला रहे थे।
तैरने लायक नहीं बची थी कावेरी
सदगुरु जग्गी वासुदेव
सदगुरु जग्गी वासुदेव ने अपने इस अभियान की शुरूआत के बारे में बताया। बोले, मैं काफी साल पहले कावेरी नदी में वारामूडा से मैसूर तक तैरता था। यह मेरी रोज की आदत थी लेकिन कुछ साल बाद मुझे नदी का पानी गंदा लगने लगा। इसका असर मेरी सेहत पर भी हुआ। बाद में मालूम हुआ कि कावेरी नदी इतनी प्रदूषित हो चुकी थी कि उसमें तैर भी नहीं सकते थे। तभी से मैंने देश की नदियों को संरक्षित करने के लिए अभियान शुरु कर दिया।
पेड़ से ही है पानी
सदगुरु ने कहा कि पानी से पेड़ होते हैं यह सच है लेकिन यह भी सच है कि पेड़ से ही पानी होता है। जब पानी को रोकने वाले पेड़ लगाएंगे तभी मिट्टी के छिद्रों से होकर पानी बूंद-बूंद कर रिसेगा और यह पानी नदियों में जाएगा। अगर पेड़ नहीं होंगे तो या तो सूखा पड़ेगा अथवा बाढ़ की स्थिति पैदा होगी। पौधों की अच्छी बढ़त के लिए मिट्टी का उपजाऊ होना भी जरूरी है और इसके लिए उसमें आर्गेनिक खाद मिलाना चाहिए।
पेड़ से ही है पानी
सदगुरु ने कहा कि पानी से पेड़ होते हैं यह सच है लेकिन यह भी सच है कि पेड़ से ही पानी होता है। जब पानी को रोकने वाले पेड़ लगाएंगे तभी मिट्टी के छिद्रों से होकर पानी बूंद-बूंद कर रिसेगा और यह पानी नदियों में जाएगा। अगर पेड़ नहीं होंगे तो या तो सूखा पड़ेगा अथवा बाढ़ की स्थिति पैदा होगी। पौधों की अच्छी बढ़त के लिए मिट्टी का उपजाऊ होना भी जरूरी है और इसके लिए उसमें आर्गेनिक खाद मिलाना चाहिए।
यह भी बोले सदगुरु
सदगुरु जग्गी वासुदेव
- देश में अधिकतर लोग अपनी कुल खुराक का मात्र 4 प्रतिशत फल लेते हैं और 60 फीसदी फल सड़ जाते हैं।
- खुराक में फलों की मात्रा बढ़ा लें तो स्वस्थ रहने के लिए उपचार का खर्च 40 फीसदी कम होगा।
- फलों के बगीचे लगाने होंगे।
- नदियों के किनारे बसने वाले लोग ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाएं और औषधीय खेती करें।
- खुराक में फलों की मात्रा बढ़ा लें तो स्वस्थ रहने के लिए उपचार का खर्च 40 फीसदी कम होगा।
- फलों के बगीचे लगाने होंगे।
- नदियों के किनारे बसने वाले लोग ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाएं और औषधीय खेती करें।