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कानपुर: निर्यातकों के रूस में फंसे सौ करोड़, बैंकों ने जारी की एडवाइजरी, जोखिम वाले भुगतान से रहे सतर्क
Sun, 27 Feb 2022 03:24 PM IST
शिखा पांडेय
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 27 Feb 2022 03:24 PM IST
सार
कानपुर से बड़े पैमाने पर रूस को लेदर गारमेंट समेत अन्य उत्पादों का निर्यात होता है। रूस के साथ ही अकेले करीब चार सौ करोड़ का निर्यात होता है। रूस की ओर से यूक्रेन पर हमला किए जाने के बाद अमेरिका और नाटो देशों ने आर्थिक प्रतिबंधों का एलान कर दिया था। जो उत्पाद रूस नहीं पहुंचे थे, उन्हें तो निर्यातकों ने होल्ड करा दिया था लेकिन इससे पहले गए आर्डर का पेमेंट फिलहाल फंस गया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
अमेरिका और नाटो देशों की ओर से रूस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध का असर कानपुर के निर्यातकों पर भी पड़ा है। निर्यातकों का सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान फंस गया है। प्रतिबंध के चलते रूस की बैंकों के कामकाज पर असर पड़ा है। रूस की करेंसी रूबल के कमजोर होने की आशंका से भी निर्यातक परेशान हैं।
वहीं देश की राष्ट्रीय बैंकों ने रूस-बेलारूस में भुगतान संबंधी आंतरिक एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि मौजूदा समय में भुगतान को लेकर सतर्क रहें। कोई भी जल्दबाजी न करें। यह भी कहा है कि ग्राहकों को समझाएं कि पेमेंट भुगतान में जोखिम न लें। जिन बैंकों पर प्रतिबंध का असर पड़ सकता है, उनके साथ भुगतान की प्रक्रिया में आगे न बढ़े।
शहर से बड़े पैमाने पर रूस को लेदर गारमेंट समेत अन्य उत्पादों का निर्यात होता है। रूस के साथ ही अकेले करीब चार सौ करोड़ का निर्यात होता है। रूस की ओर से यूक्रेन पर हमला किए जाने के बाद अमेरिका और नाटो देशों ने आर्थिक प्रतिबंधों का एलान कर दिया था। जो उत्पाद रूस नहीं पहुंचे थे, उन्हें तो निर्यातकों ने होल्ड करा दिया था लेकिन इससे पहले गए आर्डर का पेमेंट फिलहाल फंस गया है। दरअसल विदेश में कोई भी भुगतान बैंकों के जरिये ही होता है।
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वहीं देश की राष्ट्रीय बैंकों ने रूस-बेलारूस में भुगतान संबंधी आंतरिक एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि मौजूदा समय में भुगतान को लेकर सतर्क रहें। कोई भी जल्दबाजी न करें। यह भी कहा है कि ग्राहकों को समझाएं कि पेमेंट भुगतान में जोखिम न लें। जिन बैंकों पर प्रतिबंध का असर पड़ सकता है, उनके साथ भुगतान की प्रक्रिया में आगे न बढ़े।
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शहर से बड़े पैमाने पर रूस को लेदर गारमेंट समेत अन्य उत्पादों का निर्यात होता है। रूस के साथ ही अकेले करीब चार सौ करोड़ का निर्यात होता है। रूस की ओर से यूक्रेन पर हमला किए जाने के बाद अमेरिका और नाटो देशों ने आर्थिक प्रतिबंधों का एलान कर दिया था। जो उत्पाद रूस नहीं पहुंचे थे, उन्हें तो निर्यातकों ने होल्ड करा दिया था लेकिन इससे पहले गए आर्डर का पेमेंट फिलहाल फंस गया है। दरअसल विदेश में कोई भी भुगतान बैंकों के जरिये ही होता है।
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इसमें लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) का उपयोग होता है। आर्डर डिलीवरी के कुछ महीनों के बाद उस देश की बैंक के नाम एलसी बना दी जाती है और बाद में दूसरी पार्टी को भुगतान होता है। अब बैंकों ने एलसी को कुछ समय के लिए टालने की सलाह दी है। वहीं निर्यातकों ने सरकार से भुगतान संबंधी समस्या समाधान के लिए अपील की है। उन्होंने देश की कुछ बैंकों को फॉरेन एक्सचेंज के लिए नामित करने के लिए कहा है ताकि भुगतान न फंसे।
विदेश व्यापार विभाग ने बनाई हेल्प डेस्क
मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारत सरकार विदेश व्यापार विभाग ने रूस-यूक्रेन व्यापार हेल्प हेस्क गठित की है। निर्यातक टोल फ्री नंबर 1800-111-550 और ई-मेल dgftedi@nic.in के जरिये अपनी समस्या बता सकते हैं। इसके साथ ही निर्यातक और आयातक कोई भी समस्या सरकार को सीधे बता सकते हैं।
विदेश व्यापार विभाग ने बनाई हेल्प डेस्क
मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारत सरकार विदेश व्यापार विभाग ने रूस-यूक्रेन व्यापार हेल्प हेस्क गठित की है। निर्यातक टोल फ्री नंबर 1800-111-550 और ई-मेल dgftedi@nic.in के जरिये अपनी समस्या बता सकते हैं। इसके साथ ही निर्यातक और आयातक कोई भी समस्या सरकार को सीधे बता सकते हैं।
इस तरह काम करता है लेटर ऑफ क्रेडिट
लेटर ऑफ क्रेडिट (साख पत्र) किसी लेनदेन में भुगतान का स्रोत होता है। साख पत्र के बदले में किसी निर्यातक को भुगतान मिल सकता है। साख पत्र का उपयोग मुख्यतया अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लेनदेन में होता है। ऐसे सौदों जिनमें आपूर्तिकर्ता एक देश में बैठा हो और उसका ग्राहक किसी अन्य देश में।
साख पत्र से जुड़ी दो कंपनी में आमतौर पर एक लाभार्थी होता है जो रकम प्राप्त करता है। एक जारीकर्ता बैंक होता है, आवेदक जिसका ग्राहक है और परामर्शदाता बैंक होता है। लगभग सभी साख पत्र अपरिवर्तनीय होते हैं। इसके मायने ये हैं कि लाभ लेने वाला और जारीकर्ता बैंक व तसदीक करने वाले बैंक के बीच पूर्व करार के बिना न ही इसमें कोई संशोधन किया जा सकता है न ही रद्द किया जा सकता है।
लेटर ऑफ क्रेडिट (साख पत्र) किसी लेनदेन में भुगतान का स्रोत होता है। साख पत्र के बदले में किसी निर्यातक को भुगतान मिल सकता है। साख पत्र का उपयोग मुख्यतया अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लेनदेन में होता है। ऐसे सौदों जिनमें आपूर्तिकर्ता एक देश में बैठा हो और उसका ग्राहक किसी अन्य देश में।
साख पत्र से जुड़ी दो कंपनी में आमतौर पर एक लाभार्थी होता है जो रकम प्राप्त करता है। एक जारीकर्ता बैंक होता है, आवेदक जिसका ग्राहक है और परामर्शदाता बैंक होता है। लगभग सभी साख पत्र अपरिवर्तनीय होते हैं। इसके मायने ये हैं कि लाभ लेने वाला और जारीकर्ता बैंक व तसदीक करने वाले बैंक के बीच पूर्व करार के बिना न ही इसमें कोई संशोधन किया जा सकता है न ही रद्द किया जा सकता है।
विशेष रूप से, वाणिज्यिक बीजक (कामर्शियल इनवॉयस), बिल्टी (बिल ऑफ लैंडिंग) और जहाज पर लदाई के संक्रमण के दौरान खोने या नुकसान होने से बचाने के लिए किए गए बीमा से संबंधित दस्तावेज भुगतान प्राप्त करने के समय लाभार्थी को पेश करने पड़ते हैं।
बातचीत
युद्ध शुरू होने के साथ ही शहर के निर्यातकों ने इन देशों को जाने वाले उत्पादों पर पोर्ट पर ही रोक लगा दी थी। इन सबके बीच अमेरिका और नाटो देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसका असर यह हुआ है कि कानपुर के निर्यातकों के सौ करोड़ से ज्यादा के भुगतान फंस गए हैं। - आलोक श्रीवास्तव, संयोजक, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन
रूस पर आर्थिक प्रतिबंध से निर्यातकों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। सरकार से मांग है कि एक्सचेंज बैंक के माध्यम से भुगतान करवाया जाए। ताकि पेमेंट के लिए निर्यातकों को परेेशान न होना पड़े। इससे पहले ईरान में युद्ध की स्थिति होने पर सरकार ने राष्ट्रीय बैंकों के साथ भुगतान की प्रक्रिया शुरू कराई थी।- जफर फिरोज, कारोबारी और आयात-निर्यात विशेषज्ञ
बातचीत
युद्ध शुरू होने के साथ ही शहर के निर्यातकों ने इन देशों को जाने वाले उत्पादों पर पोर्ट पर ही रोक लगा दी थी। इन सबके बीच अमेरिका और नाटो देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसका असर यह हुआ है कि कानपुर के निर्यातकों के सौ करोड़ से ज्यादा के भुगतान फंस गए हैं। - आलोक श्रीवास्तव, संयोजक, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन
रूस पर आर्थिक प्रतिबंध से निर्यातकों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। सरकार से मांग है कि एक्सचेंज बैंक के माध्यम से भुगतान करवाया जाए। ताकि पेमेंट के लिए निर्यातकों को परेेशान न होना पड़े। इससे पहले ईरान में युद्ध की स्थिति होने पर सरकार ने राष्ट्रीय बैंकों के साथ भुगतान की प्रक्रिया शुरू कराई थी।- जफर फिरोज, कारोबारी और आयात-निर्यात विशेषज्ञ