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Kanpur: आरएसएस शताब्दी वर्ष पर KIT में प्रमुख जन गोष्ठी, भारत की चुनौतियों और संभावनाओं पर मंथन

Mon, 11 May 2026 07:42 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रसून शुक्ला Updated Mon, 11 May 2026 07:42 PM IST
सार

Kanpur News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर कानपुर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी  में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।

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RSS Centenary Public Seminar Held at KIT Kanpur on India’s Challenges and Opportunities
जन गोष्ठी में मौजूद शिक्षाविद व अन्य - फोटो : वीडिओ ग्रैब

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कानपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में 'प्रमुख जन गोष्ठी' का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों ने "भारत का वर्तमान परिदृश्य: चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ" विषय पर गहन मंथन किया और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया।

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RSS Centenary Public Seminar Held at KIT Kanpur on India’s Challenges and Opportunities
भारत की चुनौतियों और संभावनाओं पर बोलते वक्ता - फोटो : वीडिओ ग्रैब

भ्रामक विमर्श से बचने की जरूरत: प्रो. अनूप सिंह

गोष्ठी के मुख्य वक्ता पीपीएन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अनूप सिंह ने वर्तमान वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि आज के समय में युवाओं को लक्ष्य से भटकाने के लिए कई तरह के भ्रामक विमर्श चलाए जा रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों और बुद्धिजीवियों से अपील की कि वे राष्ट्रहित में तथ्यों पर आधारित सकारात्मक विमर्श को आगे बढ़ाएं ताकि युवा पीढ़ी भ्रमित न हो।

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RSS Centenary Public Seminar Held at KIT Kanpur on India’s Challenges and Opportunities
मंच से बोलतीं डॉ. प्रियंका सिंह - फोटो : वीडिओ ग्रैब

संस्कृति और तकनीक का संगम ही आधार: डॉ. प्रियंका सिंह

द्वितीय वक्ता के रूप में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (कानपुर प्रांत) की प्रांत उपाध्यक्ष डॉ. प्रियंका सिंह ने 'स्व' के बोध पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिकता का अर्थ अपनी संस्कृति को भूलना नहीं है। समरसता का अर्थ केवल समानता नहीं, बल्कि 'पारस्परिक सम्मान' है। डॉ. प्रियंका ने समाज के लिए महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा, "यदि तकनीक के साथ संस्कृति, ज्ञान के साथ चरित्र और प्रतिभा के साथ राष्ट्रभाव जुड़ जाए, तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता।" उन्होंने पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए सतत विकास और नवाचार की आवश्यकता पर भी बल दिया।

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RSS Centenary Public Seminar Held at KIT Kanpur on India’s Challenges and Opportunities
गोष्ठी में मंच पर मौजूद वक्ता - फोटो : वीडिओ ग्रैब

कर्तव्यों पर ध्यान देना आवश्यक

वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि समाज में अधिकारों की चर्चा तो बहुत होती है, लेकिन आज समय की मांग है कि हम अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता दें। भारतीय दृष्टि से आधुनिकता का निर्माण तभी संभव है जब हम अपनी जड़ों और ज्ञान परंपरा से जुड़े रहें।

सैकड़ों प्रबुद्ध जनों की रही उपस्थिति

कार्यक्रम के अंत में KIT के डीन डॉ. आर. के. पांडे ने आए हुए अतिथियों और प्रबुद्ध जनों का आभार व्यक्त किया। गोष्ठी के सफल आयोजन में श्री मयंक पासवान और श्री सुधांशु त्रिपाठी की प्रमुख भूमिका रही। इस अवसर पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों बुद्धिजीवी, शिक्षक और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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