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कानपुर: उद्योगपति विक्रम कोठारी पंचतत्व में विलीन, छोटे भाई दीपक और नाती आर्यन ने दी मुखाग्नि, भैरोघाट पर हुआ अंतिम संस्कार

Wed, 05 Jan 2022 12:09 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 05 Jan 2022 12:09 PM IST
सार

विक्रम कोठारी (72) का मंगलवार सुबह ब्रेन हैमरेज से निधन हो गया। पेन किंग नाम से मशहूर विक्रम कोठारी ने तिलक नगर स्थित अपने आवास संतुष्टि में अंतिम सांस ली थी। विक्रम कोठारी के निधन से उद्योग जगत में शोक है। 

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Rotomac Group CMD Vikram Kothari cremated at Bhairav Ghat in kanpur
विक्राम कोठारी का अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रोटोमैक समूह के सीएमडी और पेन किंग के नाम से मशहूर उद्योगपति विक्रम कोठारी का अंतिम संस्कार बुधवार को भैरोघाट पर किया गया। छोटे भाई दीपक कोठारी और नाती आर्यन ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान उनके परिजन और शहर के कई गण्यमान्य लोग मौजूद रहे।
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हालांकि जेल में बंद उनके बेटे राहुल को कोर्ट ने अंतिम संस्कार में शामिल होने की मोहलत नहीं दी। विक्रम कोठारी (72) का मंगलवार सुबह ब्रेन हैमरेज से निधन हो गया था। कोठारी रोटोमैक की सफलता के साथ 90 के दशक में पेन किंग के नाम से मशहूर हुए थे।
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उन्होंने 38 देशों में पेन का कारोबार फैलाया था। सलमान खान और रवीना टंडन जैसे फिल्म स्टार उनके पेन के ब्रांड एंबेसडर थे। 7800 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले के आरोप में चार साल पहले सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया था। दो साल से जमानत पर बाहर थे। 
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पैन किंग के नाम से मशहूर थे विक्रम कोठारी
विक्रम कोठारी रोटोमैक की सफलता के साथ 90 के दशक में पेन किंग के नाम से कारोबार जगत में मशहूर हुए। उन्होंने 38 देशों में रोटोमैक पेन का कारोबार फैलाया था। उनके ब्रांड के दबदबे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सलमान खान और रवीना टंडन जैसे फिल्म स्टार ब्रांड एंबेसडर थे।

रोटोमैक ब्रांड की शुरुआत उन्होंने 1992 में की थी। विक्रम कोठारी मशहूर उद्योगपति मनसुख भाई कोठारी के बेटे थे। जिन्होंने पान पराग नाम के गुटखा की शुरुआत की थी। मनसुख भाई के बाद विक्रम ने यह काम संभाला। पान पराग की मार्केटिंग के कारण विक्रम कोठारी को कई अवार्ड भी मिले।

कानपुर के गुटखा किंग का टाइटल भी उन्हें पान पराग के कारण ही मिला। प्रॉपर्टी के विवाद में उनका और भाई दीपक कोठारी के बीच बंटवारा हो गया। इसमें 1973 में शुरू हुआ पान पराग गुटखा का कारोबार दीपक कोठारी के हिस्से में चला गया। विक्रम कोठारी के हिस्से में स्टेशनरी का व्यापार आ गया।
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