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Kanpur News: तापमान बढ़ने से धान की फसल लग रहा रोग
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इटावा/बकेवर। पिछले एक सप्ताह से निकल रही तेज धूप के साथ तापमान बढ़ने से धान की फसल में रोग लगने लगे हैं। धान की फसल में तना छेदक व फंगस कीट ने पौधों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। किसान धान में रोग लगने से परेशान हैं। ऐसे में कई किसान फसल बचाने के लिए कीटनाशकों का छिड़काव करने लगे हैं।
इस वर्ष में अभी तक लगातार अच्छी बारिश होने से धान की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद किसानों को थी लेकिन एक सप्ताह से बारिश बंद होने के बाद से अचानक तापमान बढ़ गया है। जो धान की फसल के अनुकूल नहीं है और इसके कारण धान की फसल में रोग लगने लगें हैं। धान की फसल में झुलसा रोग भी लग रहा है। अधिकांश धान की फसल वाले खेतों में पानी भरा हुआ है। जो दिन के समय तेज धूप के चलते गर्म हो जाता है। वहीं रात के समय वह पानी ठंडा हो जाता है। ऐसी स्थिति में धान के पौधे में नीचे से तना छेदक कीड़ा लगने लगा है जो धान के तने को नीचे से काट देता है। धान की बाल में भी रोग लग रहा है। जहां धान का दाना सूख रहा है। हालांकि अभी धान की फसल में बाल मात्र 10 से 15 फीसदी तक निकली है लेकिन अधिक तापमान के चलते धान की फसल में और नुकसान होने की आशंका बनी हुई है। जनपद में धान का रकबा इस साल 60 हजार हेक्टेयर से भी अधिक है।
इस संबंध में जनता कॉलेज बकेवर के कृषि विशेषज्ञ डॉ संजय विश्कर्मा ने बताया कि तापमान अधिक होने से धान की फसल को नुकसान हो सकता है।बरसात के समय मौसम का उतार चढ़ाव के कारण फसलों में कीटो और रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है फसलों में रासायनिक दवा डालने से कीटो और रोगों को कम फसलों को ज्यादा नुक्सान होता है। ऐसी स्थिति में फसलों को कीटो, रोगों से बचाने के लिए प्राकृतिक (जैविक) उपाय करना एक अच्छा तरीका है। नीम की पत्तियां, प्याज, लहसुन और मिर्च जैसे प्राकृतिक पदार्थों में जीवाणुनाशक, कीटनाशक और फफूंदनाशक गुण होते हैं। इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह जानवरों और फसलों दोनों के लिए लाभकारी हो सकते हैं।
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इस वर्ष में अभी तक लगातार अच्छी बारिश होने से धान की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद किसानों को थी लेकिन एक सप्ताह से बारिश बंद होने के बाद से अचानक तापमान बढ़ गया है। जो धान की फसल के अनुकूल नहीं है और इसके कारण धान की फसल में रोग लगने लगें हैं। धान की फसल में झुलसा रोग भी लग रहा है। अधिकांश धान की फसल वाले खेतों में पानी भरा हुआ है। जो दिन के समय तेज धूप के चलते गर्म हो जाता है। वहीं रात के समय वह पानी ठंडा हो जाता है। ऐसी स्थिति में धान के पौधे में नीचे से तना छेदक कीड़ा लगने लगा है जो धान के तने को नीचे से काट देता है। धान की बाल में भी रोग लग रहा है। जहां धान का दाना सूख रहा है। हालांकि अभी धान की फसल में बाल मात्र 10 से 15 फीसदी तक निकली है लेकिन अधिक तापमान के चलते धान की फसल में और नुकसान होने की आशंका बनी हुई है। जनपद में धान का रकबा इस साल 60 हजार हेक्टेयर से भी अधिक है।
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इस संबंध में जनता कॉलेज बकेवर के कृषि विशेषज्ञ डॉ संजय विश्कर्मा ने बताया कि तापमान अधिक होने से धान की फसल को नुकसान हो सकता है।बरसात के समय मौसम का उतार चढ़ाव के कारण फसलों में कीटो और रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है फसलों में रासायनिक दवा डालने से कीटो और रोगों को कम फसलों को ज्यादा नुक्सान होता है। ऐसी स्थिति में फसलों को कीटो, रोगों से बचाने के लिए प्राकृतिक (जैविक) उपाय करना एक अच्छा तरीका है। नीम की पत्तियां, प्याज, लहसुन और मिर्च जैसे प्राकृतिक पदार्थों में जीवाणुनाशक, कीटनाशक और फफूंदनाशक गुण होते हैं। इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह जानवरों और फसलों दोनों के लिए लाभकारी हो सकते हैं।
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