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Kanpur News: बेसमेंट में रेस्टोरेंट, हादसों को दावत
Fri, 26 Jun 2026 01:45 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Fri, 26 Jun 2026 01:45 AM IST
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कानपुर देहात। नियम कानून को ताक पर रख जनपद में सैकड़ों कारोबारी बेसमेंट में व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। ऐसे में आपदा की स्थिति में यहां लोगों की जान दांव पर है। जिला मुख्यालय से लेकर आस-पास के कस्बों में कई होटल के पार्टी हॉल, किचन, खाने के लिए टेबल हॉल बेसमेंट में संचालित हो रहे हैं। इनमें आने-जाने के लिए रास्ता भी एक ही है।
जनपद में करीब दो हजार से अधिक व्यावसायिक भवन हैं। अधिकतर के पास भवन का नक्शा स्वीकृत नहीं है। व्यावसायिक गतिविधियां होने के बाद भी अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं लिया गया है। इनमें कई जगहों पर बेसमेंट में कारोबारी गतिविधियां चल रही हैं। बेसमेंट में चलने वाले प्रतिष्ठानों में न तो पर्याप्त वेंटिलेशन है और न ही आपातकालीन निकासी के उचित इंतजाम। बिल्डिंग बायलॉज के मुताबिक बेसमेंट में सिर्फ पार्किंग व स्टोरेज की ही इजाजत है।
बृहस्पतिवार को संवाद न्यूज एजेंसी ने पड़ताल कर हकीकत जांची तो अकबरपुर जिला मुख्यालय के पास कानपुर-इटावा हाईवे पर चार होटल ऐसे दिखे जिनके बेसमेंट में कारोबारी गतिविधियां संचालित होती मिलीं। एक में तो पार्टी के लिए हाॅल सजाया गया था। एक में किचनशेड नजर आया। कानपुर-झांसी हाईवे पर नवीपुर के पास एक होटल में बेसमेंट में लोगों के बैठकर खाने का इंतजाम है। यही हाल पुखरायां, सिकंदरा, राजपुर और रसधान में कानपुर रोड पर बने होटल, मॉल जैसी इमारतों का नजर आया। यहां भी बेसमेंट में कारोबारी गतिविधियां संचालित होती नजर आईं। लखनऊ हादसे के बाद प्रशासन भले ही बेसमेंट में चल रही कारोबारी गतिविधियां पर सख्ती के दावे कर रहा हो लेकिन इसका असर नहीं दिख रहा है।
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बेसमेंट में सिर्फ पार्किंग व स्टोर की अनुमति
जानकारों का कहना है कि बेसमेंट में अस्पताल, पैथॉलाजी, लैब, रेस्टोरेंट, पार्टी हाॅल समेत अन्य कारोबार चलाना दमकल अधिनियम का उल्लंघन है। यही नहीं राज्य सरकार की गाइडलाइन में भी बेसमेंट में कोचिंग सेंटर, व्यावसायिक गतिविधियां प्रतिबंधित हैं। ऐसी गतिविधियां वेंटिलेशन की कमी के कारण जानलेवा साबित हो सकती हैं।
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चंद मिनटों में भर जाता धुआं
अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यदि किसी व्यावसायिक भवन के बेसमेंट में आग लग जाए तो वहां फायर सेफ्टी के बिना चंद मिनटों में ही धुआं भर जाता है। धुआं निकलने की जगह न हो तो वहां काम कर रहे लोगों का दम घुटना तय है। बेसमेंट में न तो कोई खिड़की होती है और न ही पर्याप्त ऑक्सीजन। शॉर्ट सर्किट या अन्य कारणों से कभी आग लग जाए तो बड़ी अनहोनी हो सकती है।
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जानते सब हैं मगर कोई कुछ नहीं करता
ऐसा नहीं है कि प्रशासनिक अधिकारियों को नगर के अलग-अलग हिस्सों में बेसमेंट में कोचिंग सेंटर, पैथोलॉजी लैब आदि के संचालन की जानकारी नहीं है। सब पता होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन, नगर पंचायत प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और दमकल विभाग किसी तरह की कार्रवाई नहीं करता है। इससे इन विभागों के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं।
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11 को एनओसी, बाकी सब रहमोकरम पर
छह तहसील, 13 नगर निकाय वाले जिले में करीब 80 छोटे-बड़े होटल संचालित हैं। कई तो रिहायशी इलाकों में हैं। सिकंदरा से लेकर कानपुर सीमा पर रायपुर तक और कानपुर-झांसी हाईवे पर पिपरी तक कई होटल में 24 घंटे लोगों का ठहरना रहता है। बात अगर सुरक्षा इंतजामों की जाए तो अधिकांश के पास मानक पूरे नहीं हैं। अग्निशमन विभाग ने भी सिर्फ पूरे जिले में 11 को एनओसी दे रखी है। शेष को नोटिस जारी की जाती है लेकिन कार्रवाई नहीं होती। विभाग तो कुछ के आवेदन आने और खामियां पूरी कराने का दावा कर रहा है, लेकिन शेष सब जिम्मेदारों के रहमोकरम पर हैं।
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बयान...
व्यावसायिक भवनों के मानक जांचने के लिए एक टीम गठित की जाएगी। अभी शासन के निर्देश पर कोचिंग सेंटरों की जांच कराई गई है। यह कार्रवाई लगातार चलती रहेगी। नियमों की अनदेखी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - कपिल सिंह, जिलाधिकारी
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जनपद में करीब दो हजार से अधिक व्यावसायिक भवन हैं। अधिकतर के पास भवन का नक्शा स्वीकृत नहीं है। व्यावसायिक गतिविधियां होने के बाद भी अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं लिया गया है। इनमें कई जगहों पर बेसमेंट में कारोबारी गतिविधियां चल रही हैं। बेसमेंट में चलने वाले प्रतिष्ठानों में न तो पर्याप्त वेंटिलेशन है और न ही आपातकालीन निकासी के उचित इंतजाम। बिल्डिंग बायलॉज के मुताबिक बेसमेंट में सिर्फ पार्किंग व स्टोरेज की ही इजाजत है।
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बृहस्पतिवार को संवाद न्यूज एजेंसी ने पड़ताल कर हकीकत जांची तो अकबरपुर जिला मुख्यालय के पास कानपुर-इटावा हाईवे पर चार होटल ऐसे दिखे जिनके बेसमेंट में कारोबारी गतिविधियां संचालित होती मिलीं। एक में तो पार्टी के लिए हाॅल सजाया गया था। एक में किचनशेड नजर आया। कानपुर-झांसी हाईवे पर नवीपुर के पास एक होटल में बेसमेंट में लोगों के बैठकर खाने का इंतजाम है। यही हाल पुखरायां, सिकंदरा, राजपुर और रसधान में कानपुर रोड पर बने होटल, मॉल जैसी इमारतों का नजर आया। यहां भी बेसमेंट में कारोबारी गतिविधियां संचालित होती नजर आईं। लखनऊ हादसे के बाद प्रशासन भले ही बेसमेंट में चल रही कारोबारी गतिविधियां पर सख्ती के दावे कर रहा हो लेकिन इसका असर नहीं दिख रहा है।
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बेसमेंट में सिर्फ पार्किंग व स्टोर की अनुमति
जानकारों का कहना है कि बेसमेंट में अस्पताल, पैथॉलाजी, लैब, रेस्टोरेंट, पार्टी हाॅल समेत अन्य कारोबार चलाना दमकल अधिनियम का उल्लंघन है। यही नहीं राज्य सरकार की गाइडलाइन में भी बेसमेंट में कोचिंग सेंटर, व्यावसायिक गतिविधियां प्रतिबंधित हैं। ऐसी गतिविधियां वेंटिलेशन की कमी के कारण जानलेवा साबित हो सकती हैं।
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चंद मिनटों में भर जाता धुआं
अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यदि किसी व्यावसायिक भवन के बेसमेंट में आग लग जाए तो वहां फायर सेफ्टी के बिना चंद मिनटों में ही धुआं भर जाता है। धुआं निकलने की जगह न हो तो वहां काम कर रहे लोगों का दम घुटना तय है। बेसमेंट में न तो कोई खिड़की होती है और न ही पर्याप्त ऑक्सीजन। शॉर्ट सर्किट या अन्य कारणों से कभी आग लग जाए तो बड़ी अनहोनी हो सकती है।
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जानते सब हैं मगर कोई कुछ नहीं करता
ऐसा नहीं है कि प्रशासनिक अधिकारियों को नगर के अलग-अलग हिस्सों में बेसमेंट में कोचिंग सेंटर, पैथोलॉजी लैब आदि के संचालन की जानकारी नहीं है। सब पता होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन, नगर पंचायत प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और दमकल विभाग किसी तरह की कार्रवाई नहीं करता है। इससे इन विभागों के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं।
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11 को एनओसी, बाकी सब रहमोकरम पर
छह तहसील, 13 नगर निकाय वाले जिले में करीब 80 छोटे-बड़े होटल संचालित हैं। कई तो रिहायशी इलाकों में हैं। सिकंदरा से लेकर कानपुर सीमा पर रायपुर तक और कानपुर-झांसी हाईवे पर पिपरी तक कई होटल में 24 घंटे लोगों का ठहरना रहता है। बात अगर सुरक्षा इंतजामों की जाए तो अधिकांश के पास मानक पूरे नहीं हैं। अग्निशमन विभाग ने भी सिर्फ पूरे जिले में 11 को एनओसी दे रखी है। शेष को नोटिस जारी की जाती है लेकिन कार्रवाई नहीं होती। विभाग तो कुछ के आवेदन आने और खामियां पूरी कराने का दावा कर रहा है, लेकिन शेष सब जिम्मेदारों के रहमोकरम पर हैं।
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बयान...
व्यावसायिक भवनों के मानक जांचने के लिए एक टीम गठित की जाएगी। अभी शासन के निर्देश पर कोचिंग सेंटरों की जांच कराई गई है। यह कार्रवाई लगातार चलती रहेगी। नियमों की अनदेखी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - कपिल सिंह, जिलाधिकारी