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Kanpur News: कैलकुलस को वास्तविक जीवन से जोड़ने वाला रिसर्च करेगा मार्गदर्शन

Fri, 26 Dec 2025 02:17 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 26 Dec 2025 02:17 AM IST
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Research that connects calculus to real life will provide guidance.
राष्ट्रीय सम्मेलन में सम्मानित हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. राकेश - फोटो : स्वयं
कानपुर। कैलकुलस जैसे जटिल विषय को वास्तविक जीवन से जोड़कर सरल बनाने वाली रिसर्च अब देशभर के छात्रों और शिक्षकों के लिए मार्गदर्शक बनेगी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय सनातन धर्म विद्यालय के प्रधानाचार्य राकेश राम त्रिपाठी की ओर से तैयार किया गया इनोवेटिव मैथमेटिक्स प्रोजेक्ट एनसीईआरटी के जर्नल में प्रकाशित होगा। यह छात्रों में एनालिटिकल, ग्राफिकल एवं प्रतिस्पर्धात्मक कौशल के विकास में सहायक सिद्ध होगा।
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एनसीईआरटी की ओर से राजस्थान के अजमेर में आयोजित 14वें राष्ट्रीय गणित शिक्षा सम्मेलन में राकेश राम त्रिपाठी ने इस प्रोजेक्ट पर आधारित शोध पत्र प्रस्तुत किया जिसे देशभर से आए गणित विशेषज्ञों एवं शिक्षाविदों ने सराहा। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से कुछ 61 चयनित शिक्षकों ने सहभागिता की, जिसमें उत्तर प्रदेश से सीनियर सेकेंडरी स्तर पर केवल त्रिपाठी का ही चयन हुआ। सम्मेलन के आयोजन सचिव एनसीईआरटी के समन्वयक डॉ. पतंजलि शर्मा थे।
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त्रिपाठी ने बताया कि यह शोध मैथमेटिकल मॉडलिंग की अवधारणा पर आधारित है, जिसमें यह समझाया गया है कि कैलकुलस के सिद्धांतों को दैनिक जीवन की समस्याओं में कैसे लागू किया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट में जियो जेब्रा, एमएस एक्सेल एवं स्केल फैक्टर्स जैसे आधुनिक टूल्स के माध्यम से गणितीय अवधारणाओं को दृश्यात्मक और व्यावहारिक रूप दिया गया है। इस मॉडल की विशेषता यह है कि इसके जरिये अनियमित एवं अनिर्धारित आकृतियों का क्षेत्रफल और आयतन भी ज्ञात किया जा सकता है। इससे गणित केवल किताबों तक सीमित न रहकर प्रयोग और अनुभव आधारित विषय बन जाता है।
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इस शोध का सारांश एनसीईआरटी की स्मारिका में भी प्रकाशित किया गया। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध स्कूल स्तर पर गणित शिक्षण में नवाचार और गुणवत्ता को बढ़ावा देने के साथ-साथ छात्रों में गणित के प्रति रुचि बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

छात्रों को मिलेगा लाभ

कैलकुलस और गणितीय सिद्धांतों की व्यावहारिक समझ

एनालिटिकल और लॉजिकल थिंकिंग का विकास

ग्राफिकल टूल्स से कठिन टॉपिक सरल होंगे

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मजबूत अवधारणा निर्माण

टेक्नोलॉजी आधारित लर्निंग से आत्मविश्वास में वृद्धि

छात्रों में रिसर्च और इनोवेशन की प्रवृत्ति विकसित होगी
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