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रेमडेसिविर प्रकरण: व्हाट्सएप पर जारी होता था इंजेक्शन, चीफ फार्मासिस्ट को भी होती थी ये जानकारी

Sat, 10 Jul 2021 04:53 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sat, 10 Jul 2021 04:53 PM IST
सार

नर्सिंग स्टाफ ने नाम ना छापने के शर्त पर बताया कि कोविड मरीजों को लगने वाला इंजेक्शन व्हाट्सएप ग्रुप पर जारी होता था। जिसकी एडमिन खुद एक बड़ी डॉक्टर थीं।

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Remdesivir episode: Injection used to be issued on WhatsApp, Chief Pharmacist also had this information
हैलट में संक्रमण विभाग - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में कोविड मरीजों को लगने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन जारी कराने और लाने की अहम जिम्मेदारी डॉक्टरों और फार्मासिस्ट की रहती है, जबकि लगाने की जिम्मेदारी वार्ड में मौजूद सिस्टर की थी। ऐसे में कार्रवाई सिर्फ दो फार्मासिस्ट, सिस्टर इंचार्ज और आउट सोर्सिंग कर्मचारियों पर ही हुई। जबकि चीफ फार्मासिस्ट और इंजेक्शन जारी करने वाले डॉक्टरों को जांच से बाहर रख क्लीन चिट दे दी गई।
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प्रशासन की इस कार्रवाई से नर्सिंग स्टॉप में रोष व्याप्त है। एक नर्सिंग स्टाफ ने नाम ना छापने के शर्त पर बताया कि कोविड मरीजों को लगने वाला इंजेक्शन व्हाट्सएप ग्रुप पर जारी होता था। जिसकी एडमिन खुद एक बड़ी डॉक्टर थीं। इसके लिए डॉक्टरों को मरीज की बीएचटी (बेड हेड टिकट) की मुख्य कॉपी व्हाट्सएप ग्रुप पर भेजनी होती थी।
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बीएचटी और मरीज की हालत देखने के बाद उक्त डॉक्टर व्हाट्सएप ग्रुप पर ही अप्रूव कर देती थीं और हैलट स्थित मेन स्टोर पर मौजूद फार्मासिस्ट को सूचना दे दी जाती थी। इसके बाद मरीज की देखरेख में लगे डॉक्टर वार्ड के फार्मासिस्ट को मरीज की इंडेंट बनाकर इंजेक्शन लाने को देते थे। फिर वार्ड में मौजूद फार्मासिस्ट रेमडेसिविर इंजेक्शन लाता था।
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इसके बाद सील तोड़कर वार्ड ब्वॉय को सौंप देता था। वार्ड ब्वॉय जब इंजेक्शन लेकर मरीज के पास जाता तो वहां मौजूद सिस्टर डॉक्टर की मौजूदगी में इंजेक्शन लगाकर खाली वॉयल को वापस वार्ड ब्वॉय के जरिए फार्मासिस्ट तक पहुंचवा देती थी। फिर फार्मासिस्ट खाली वॉयल की फोटो खींचकर दोबारा ग्रुप में भेज देता था। ऐसे में रेमडेसिविर जारी करने और लाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी डॉक्टर और फार्मासिस्ट की रहती है। व्हाट्सएप ग्रुप में डॉक्टर के अलावा चीफ फार्मासिस्ट ही थे। ऐसे में इनपर जांच की आंच नहीं आना बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। 
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