Kanpur: चेक बाउंस के दोषी को 10 साल बाद राहत, कोर्ट ने माफ की छह माह की सजा, समझौते में देने पड़े थे 1.27 लाख
Kanpur News: अशोक ने सजा के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की थी। मामला हाईकोर्ट गया तो अशोक ने जुर्माने की 40 प्रतिशत धनराशि लगभग 77,500 रुपये जिला जज के यहां नजारत में जमा करवा दिए थे, लेकिन राहत नहीं मिली।
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कानपुर चेक बाउंस में सजा सुनाए जाने के बाद दोषी ने विपक्षी से समझौता करके रुपये दे दिए लेकिन जब मुकदमा खत्म करने की बात आई तो विपक्षी समझौते से मुकर गया। रुपये न मिलने की बात कहकर दोषी की अपील खारिज करने का तर्क रखा, हालांकि वह यह बात साबित नहीं कर सका। इस पर अपर जिला जज 19 रघुवीर सिंह राठौर ने दोषी की अपील स्वीकार करते हुए उसे दोषमुक्त करार दे दिया है।
छह माह की सजा से बचने के लिए दोषी को दस साल की लंबी कानूनी लड़ाई लडऩे के साथ ही समझौते के तहत जुर्माना भी अदा करना पड़ा। अब उसे राहत मिल सकी है। बर्रा-2 निवासी प्रदीप कुमार सचान ने क्षेत्र के अशोक कुमार शुक्ला के खिलाफ चेक बाउंस के मामले में कोर्ट में परिवाद दर्ज कराया था। इसमें निचली अदालत ने जुलाई 2013 में अशोक को छह माह कैद और 1.93 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
निर्णय के दिन लोक अदालत में नहीं पहुंचा
अशोक ने सजा के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की थी। मामला हाईकोर्ट गया तो अशोक ने जुर्माने की 40 प्रतिशत धनराशि लगभग 77,500 रुपये जिला जज के यहां नजारत में जमा करवा दिए थे, लेकिन राहत नहीं मिली। बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया कि जमा धनराशि के अलावा 50 हजार रुपये प्रदीप को और मिलेंगे। अशोक ने समझौते के तहत रुपये अदा कर दिए और प्रदीप ने फाइल पर हस्ताक्षर भी बना दिए, लेकिन निर्णय के दिन जनवरी 2023 में लगी लोक अदालत में नहीं पहुंचा।
समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया
समझौता न होने पर अपील चलती रही। लगभग एक साल बाद नवंबर 2024 में प्रदीप ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि अशोक ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है। उसे सिर्फ 20 हजार रुपये दिए गए और 30 हजार रुपये बाद में देने की बात कही थी। साथ ही उसके खिलाफ दाखिल आपराधिक मुकदमे को खत्म नहीं किया गया है।
कोर्ट ने अशोक की अपील स्वीकार कर ली
इस पर अशोक के अधिवक्ता संजय कुमार सिंह ने तर्क रखा कि समझौते में दूसरे किसी मुकदमे को खत्म करने की शर्त नहीं लिखी गई थी और पूरे 50 हजार रुपये भी प्रदीप ने पा लिए हैं। फाइल में रुपये प्राप्ति के संबंध में प्रदीप के हस्ताक्षर भी थे। प्रदीप ने खुद समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है। प्रदीप के झूठे आरोपों को खारिज करते हुए कोर्ट ने अशोक की अपील स्वीकार कर ली और उसे दोषमुक्त करार दे दिया।