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खादी को घाटे से उबारकर बुलंदियों तक पहुंचाया
दिलीप सिंह/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 07 Oct 2016 10:59 PM IST
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खादी को घाटे से उबारकर बुलंदियों तक पहुंचाने वाले प्रेम सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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एक साधारण व्यक्तित्व के कर्मचारी ने लाखों के घाटे में चल रही सर्वोदय नगर स्थित स्वराज आश्रम को करोड़ों के फायदे में पहुंचाने के साथ ही देश में नंबर वन बना दिया। इतना ही नहीं खादी को ब्रांड बनाकर खड़ा कर दिया। अब देश भर से लोग सिर्फ यह जानने खादी आश्रम पहुंच रहे हैं कि, जो काम विभाग के मंत्री, अफसर नहीं कर पाए अकेले व्यक्ति ने कैसे कर दिया...?
स्वराज आश्रम सन्-2006-07 तक लगभग 70 लाख के घाटे में होने के साथ ही बंदी के कगार पर पहुंच गया था। इसी दौरान प्रेम सिंह सेंगर को संस्था का मंत्री पद सौंपा गया था। जिसके बाद से स्वराज आश्रम के दिन बहुरते चले गए। मौजूदा समय में स्वराज आश्रम का करोड़ों का कारोबार होने के साथ ही देश के 1750 खादी विक्रय केंद्रों को पीछे छोड़ते हुए नंबर वन पर है। पिछले आठ सालों से राज्यस्तरीय और केंद्रीय खादी प्रदर्शनी में भी स्वराज आश्रम लगातार पहले स्थान पर है।
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स्वराज आश्रम सन्-2006-07 तक लगभग 70 लाख के घाटे में होने के साथ ही बंदी के कगार पर पहुंच गया था। इसी दौरान प्रेम सिंह सेंगर को संस्था का मंत्री पद सौंपा गया था। जिसके बाद से स्वराज आश्रम के दिन बहुरते चले गए। मौजूदा समय में स्वराज आश्रम का करोड़ों का कारोबार होने के साथ ही देश के 1750 खादी विक्रय केंद्रों को पीछे छोड़ते हुए नंबर वन पर है। पिछले आठ सालों से राज्यस्तरीय और केंद्रीय खादी प्रदर्शनी में भी स्वराज आश्रम लगातार पहले स्थान पर है।
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स्वराज आश्रम के मंत्री को राष्ट्रपति, राज्य सरकार ने किया सम्मानित
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
स्वराज आश्रम का उत्पादन 2007 में 198.80 लाख का था और अब 553.47 लाख पहुंच गया है, इसी तरह बिक्री भी - 324.52 से 1070.71 लाख, रोजगार- 1185 से 1410 लाख, मजदूरी 51.91 से 242.80 लाख पहुंच गई है। इसके लिए प्रेम सिंह सेंगर को 2013 में राष्ट्रपति ने सम्मानित किया। इसके साथ ही राज्यस्तरीय कई सम्मान भी मिल चुके हैं। अब देश के कोने-कोने से अफसर, खादी बोर्ड के मंत्री और सदस्य यह जानने स्वराज आश्रम पहुंच रहे हैं कि आखिर प्रेम सिंह ने पूरे देश में घाटे में चल रही खादी को स्वराज आश्रम में इतने बड़े मुनाफे तक कैसे पहुंचा दिया।
इस पर शोध भी चल रहा है। बातचीत के दौरान प्रेम ने कहा कि मैने कुछ नहीं किया। उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे एक गैस के गुब्बारे को आप जब तक पकड़े हुए हैं या फिर से किसी चीज से बांध रखा है तो वह ऊपर नहीं जा पाएगा, लेकिन छोड़ते ही वह तेजी से ऊपर की ओर बढ़ जाएगा। बस मैने यही किया है। भ्रष्टाचार पूरी तरह से खत्म करने पर संस्थान खुद भारी मुनाफे में पहुंच गया।
प्रोफाइल-
नाम- प्रेम सिंह सेंगर
शिक्षा- इंटर पास, खादी में डिप्लोमा
सन- 1980 में सेल्समैन पद से शुरू की नौकरी
निवासी-गोपाल नगर, मूल रूप से कानपुर देहात के अकबरपुर तहसील के रुरवाहार गांव
इस पर शोध भी चल रहा है। बातचीत के दौरान प्रेम ने कहा कि मैने कुछ नहीं किया। उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे एक गैस के गुब्बारे को आप जब तक पकड़े हुए हैं या फिर से किसी चीज से बांध रखा है तो वह ऊपर नहीं जा पाएगा, लेकिन छोड़ते ही वह तेजी से ऊपर की ओर बढ़ जाएगा। बस मैने यही किया है। भ्रष्टाचार पूरी तरह से खत्म करने पर संस्थान खुद भारी मुनाफे में पहुंच गया।
प्रोफाइल-
नाम- प्रेम सिंह सेंगर
शिक्षा- इंटर पास, खादी में डिप्लोमा
सन- 1980 में सेल्समैन पद से शुरू की नौकरी
निवासी-गोपाल नगर, मूल रूप से कानपुर देहात के अकबरपुर तहसील के रुरवाहार गांव