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बच्चों को कविताएं सुनाने से भाषा व सुनने की क्षमता का होता विकास : एआरपी
Sat, 19 Sep 2026 12:50 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sat, 19 Sep 2026 12:50 AM IST
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रसूलाबाद। समग्र शिक्षा एवं निपुण भारत मिशन के तहत चंद्रप्रभा शर्मा डिग्री कॉलेज में चल रहे पांच दिवसीय प्रशिक्षण के चौथे दिन शुक्रवार को शिक्षकों को आधुनिक व प्रभावी तकनीकों की जानकारी दी गई। एआरपी ने कहा बच्चों को लयबद्ध तरीके से कविताएं सुनाने से उनकी भाषा और सुनने की क्षमता में तेजी से विकास होता है।
एआरपी सोनू सिंह ने कहा शब्दों को बेहतर ढंग से समझाने के लिए कार्ड और चार्ट जैसी दृश्य सामग्री (टीएलएम) का प्रयोग अनिवार्य रूप से किया जाए। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों की कोशिशों की प्रशंसा करने, उनकी गलतियों को सहजता से सुधारने और खेल-खेल में शब्दों को दोहराने की बात कही। साथ ही स्कूलों में घटते नामांकन और कम उपस्थिति की समस्या को दूर करने पर भी जोर दिया। एआरपी पारुल निरंजन ने कहा कि बच्चों को उनके आसपास मौजूद चीजों के नाम बताने के लिए प्रोत्साहित करें और उन्हें समूह में बैठाकर पढ़ाएं।
संदर्भदाता हिमांशु गुप्ता ने अंग्रेजी में नियमित अभ्यास कार्य के महत्व के बारे में बताया। कहा बच्चों को रोज गृहकार्य दें और उसे प्रतिदिन चेक करें। संदर्भदाता शैलेश पाल ने समय सारिणी का कड़ाई से अनुपालन करने के साथ पुस्तकालय, खेल सामग्री और टीएलएम के प्रभावी उपयोग के तरीके साझा किए। यहां शिक्षक बृजेश राजपूत, अंकिता, सत्यम मिश्रा, शिवमोहन, विनीता, राकेश, जय सिंह आदि मौजूद रहे।
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एआरपी सोनू सिंह ने कहा शब्दों को बेहतर ढंग से समझाने के लिए कार्ड और चार्ट जैसी दृश्य सामग्री (टीएलएम) का प्रयोग अनिवार्य रूप से किया जाए। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों की कोशिशों की प्रशंसा करने, उनकी गलतियों को सहजता से सुधारने और खेल-खेल में शब्दों को दोहराने की बात कही। साथ ही स्कूलों में घटते नामांकन और कम उपस्थिति की समस्या को दूर करने पर भी जोर दिया। एआरपी पारुल निरंजन ने कहा कि बच्चों को उनके आसपास मौजूद चीजों के नाम बताने के लिए प्रोत्साहित करें और उन्हें समूह में बैठाकर पढ़ाएं।
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संदर्भदाता हिमांशु गुप्ता ने अंग्रेजी में नियमित अभ्यास कार्य के महत्व के बारे में बताया। कहा बच्चों को रोज गृहकार्य दें और उसे प्रतिदिन चेक करें। संदर्भदाता शैलेश पाल ने समय सारिणी का कड़ाई से अनुपालन करने के साथ पुस्तकालय, खेल सामग्री और टीएलएम के प्रभावी उपयोग के तरीके साझा किए। यहां शिक्षक बृजेश राजपूत, अंकिता, सत्यम मिश्रा, शिवमोहन, विनीता, राकेश, जय सिंह आदि मौजूद रहे।
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