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Kanpur News: अप्रयुक्त हैंडपंप के बोर में बनेंगे रिचार्ज सॉफ्ट, संरक्षित होगा जल
Wed, 22 Jan 2025 12:59 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Wed, 22 Jan 2025 12:59 AM IST
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कानपुर देहात। जल है तो कल है। इसी थीम पर जिले की मुख्य विकास अधिकारी ने जल संरक्षण के लिए नई पहल शुरू की है। इस पहल के तहत अब ग्राम पंचायतों में खराब बोर में रिचार्ज सॉफ्ट बनाया जाएगा। इससे जल संरक्षित किया जा सकेगा। करसा ग्रे वॉटर सिस्टम के बाद अब सीडीओ लक्ष्मी एन ने रिचार्ज सॉफ्ट बनाने पर जोर दिया है। जिले में शुरू की गई रिचार्ज सॉफ्ट योजना के तहत अब प्रत्येक ग्राम पंचायत को यह काम करने के निर्देश दिए गए हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण करना है।
सीडीओ लक्ष्मी एन ने बताया कि जिले के 10 विकास खंड में 7 ब्लॉक एनआरएम (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) घोषित कर दिए गए हैं। इसमें मनरेगा के तहत अकुशल श्रमिकों को काम मिलेगा। साथ ही जल संरक्षण का कार्य प्राथमिकता हो सकेगा। बताया कि जनपद की अधिकतम ग्राम पंचायतों में हैंडपंप लगे हुए हैं। जिनमें से प्रत्येक वर्ष कई हैंडपंप खराब होने के कारण रिबोर कराए जाते हैं।
हैंडपंप रिबोर कराने के बाद पूर्व का बोर अप्रयुक्त हो जाता है। ऐसे अप्रयुक्त हैंडपंप के बोर का प्रयोग रिचार्ज साॅफ्ट बनवाने में किया जाएगा। इसके लिए सभी ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं। जिसमें कहा गया है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में वर्ष 2023-24 व 2024-25 में रिबोर कराए गए हैंडपंप की सूची उपलब्ध कराई जाए। प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम एक अप्रयुक्त हैंडपंप के बोर को रिचार्ज साॅफ्ट बनाया जाएगा।
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रिचार्ज सॉफ्ट पर खर्च होंगे 60 हजार, संरक्षित होगा 849252 लीटर पानी
सीडीओ ने बताया कि एक रिचार्ज सॉफ्ट बनाने में करीब 60 हजार रुपये का खर्च आएगा। इसके बनने के बाद एक जगह से पूरे साल में करीब 849252.00 लीटर पानी संरक्षित हो सकेगा। योजना को धरातल पर लाने के लिए अवर अभियंताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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100 गांवों में ग्रे-वाटर सिस्टम का काम पूरा
जल संरक्षण को लेकर की जा रही पहल के तहत जिले में सरवनखेड़ा ब्लॉक के करसा गांव से शुरू हुई ग्रे-वाटर मैनेजमेंट योजना अब तक जिले के 100 गांवों में पूरी हो चुकी है। करसा में बने इस वाटर रिचार्ज सिस्टम से 24000 लीटर/दिन की कैपेसिटी का वॉटर पिट बना है। गांव में स्थित घरों एवं नलियों से निकलने वाले गंदे पानी को फिल्टर किए जाने बाद एकत्र कर तालाब में छोड़ा जा रहा है। वहीं, वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए जिले के 199 पुराने व 129 नये तालाबों में बारिश का पानी संरक्षित करने की तैयारी की जा रही है। जिससे कोई तालाब सूखा न रहे।
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सीडीओ लक्ष्मी एन ने बताया कि जिले के 10 विकास खंड में 7 ब्लॉक एनआरएम (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) घोषित कर दिए गए हैं। इसमें मनरेगा के तहत अकुशल श्रमिकों को काम मिलेगा। साथ ही जल संरक्षण का कार्य प्राथमिकता हो सकेगा। बताया कि जनपद की अधिकतम ग्राम पंचायतों में हैंडपंप लगे हुए हैं। जिनमें से प्रत्येक वर्ष कई हैंडपंप खराब होने के कारण रिबोर कराए जाते हैं।
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हैंडपंप रिबोर कराने के बाद पूर्व का बोर अप्रयुक्त हो जाता है। ऐसे अप्रयुक्त हैंडपंप के बोर का प्रयोग रिचार्ज साॅफ्ट बनवाने में किया जाएगा। इसके लिए सभी ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं। जिसमें कहा गया है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में वर्ष 2023-24 व 2024-25 में रिबोर कराए गए हैंडपंप की सूची उपलब्ध कराई जाए। प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम एक अप्रयुक्त हैंडपंप के बोर को रिचार्ज साॅफ्ट बनाया जाएगा।
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रिचार्ज सॉफ्ट पर खर्च होंगे 60 हजार, संरक्षित होगा 849252 लीटर पानी
सीडीओ ने बताया कि एक रिचार्ज सॉफ्ट बनाने में करीब 60 हजार रुपये का खर्च आएगा। इसके बनने के बाद एक जगह से पूरे साल में करीब 849252.00 लीटर पानी संरक्षित हो सकेगा। योजना को धरातल पर लाने के लिए अवर अभियंताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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100 गांवों में ग्रे-वाटर सिस्टम का काम पूरा
जल संरक्षण को लेकर की जा रही पहल के तहत जिले में सरवनखेड़ा ब्लॉक के करसा गांव से शुरू हुई ग्रे-वाटर मैनेजमेंट योजना अब तक जिले के 100 गांवों में पूरी हो चुकी है। करसा में बने इस वाटर रिचार्ज सिस्टम से 24000 लीटर/दिन की कैपेसिटी का वॉटर पिट बना है। गांव में स्थित घरों एवं नलियों से निकलने वाले गंदे पानी को फिल्टर किए जाने बाद एकत्र कर तालाब में छोड़ा जा रहा है। वहीं, वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए जिले के 199 पुराने व 129 नये तालाबों में बारिश का पानी संरक्षित करने की तैयारी की जा रही है। जिससे कोई तालाब सूखा न रहे।