सोनाली ने बताई अपनी 'आपबीती', आप भी सावधान रहें ऐसे 'इंसानी शैतान अंकल' से
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेरी आपबीती
अमर उजाला की प्रस्तुति 'आपबीती' में आज हम आपको इटावा की सोनाली सिंह (काल्पनिक नाम) की कहानी बताने जा रहे हैं। सोनाली लिखती हैं कि ये बात साल 2001 की रही होगी। उन दिनों वह कक्षा 9 की छात्रा थीं। पड़ोस में रहने वाले होम्योपैथी डॉ. विनोद कुमार (काल्पनिक नाम) का अक्सर घर में अक्सर आना जाना रहता था। डॉक्टर को हम अंकल जी कहकर बुलाते थे। पापा से डॉक्टर अंकल की दोस्ती थी। रविवार का दिन था परिवार के सभी लोग रिश्तेदार के घर फंक्शन में गए हुए थे। उसी दिन दोपहर में डॉक्टर अंकल घर आए। उन्होंने मुझसे पूछा कि घर में बड़ा सन्नाटा है कोई है नहीं क्या।
उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और...
मैने उनसे कह दिया कि सभी लोग बाहर गए हुए हैं तो डॉक्टर अंकल सोफे पर बैठ गए। उन्होंने मुझसे कहा कि मुझे प्यास लगी है एक गिलास पानी ले आओ। मैं जब उनके लिए पानी भरा गिलास लेकर आई तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और जबरदस्ती करने लगे। मैं रोती रही, चिल्लाती, गिड़गिड़ाती रही लेकिन उन्होंने मेरी एक न सुनी। मेरी आवाज दबाने के लिए टीवी चलाने के बाद उन्होंने वॉल्यूम तेज कर दिया और मेरे साथ अत्याचार किया। इसके बाद भी डॉक्टर अंकल शांत नहीं हुए। मुझे धमकियां देकर अपने घर में बुलाते थे और मेरे साथ गलत काम करते थे।
उनकी धमकियों से मुझे बहुत डर लगता था
लगभग छह महीने तक मैं उनके द्वारा किए जा रहे अत्याचारों को सहन करती रही। उनकी धमकियों से मुझे बहुत डर लगता था। एक दिन मैने अपने पापा से कहा कि वह मेरा एडमिशन कानपुर के किसी स्कूल में करा दें। डॉक्टर अंकल ने मेरे साथ जो भी किया मैने उसके बारे में कभी भी अपने घरवालों को नहीं बताया। जब मेरा एडमिशन कानपुर में हो गया तो मैने राहत की सांस ली।
अपनी बेटियों का खुद से ज्यादा ख्याल रखती हूं
आज मेरी उम्र 32 साल है। अब मेरी शादी हो चुकी है दो बेटियां भी हैं। मैं अपने परिवार के साथ बहुत खुश हूं। अपनी बेटियों का खुद से ज्यादा ख्याल रखती हूं किसी भी अनजान शख्स को मेरे घर के बेडरूम तक आने की इजाजत नहीं है। मैं अपनी बेटियों को कभी भी अकेले नहीं छोड़ती हूं। बुरे सपने की तरह मैने अपने साथ उन छह महीनों में हुए अत्याचार को भुलाने की कोशिश की लेकिन उसके जख्म आज भी मेरे दिल और दिमाग में हैं।