बात सेहत की: कॉर्डियोलॉजी में 48 लोगों पर हुआ रैंडम शोध, पहले ही पता चल जाएगा हृदय रोग होगा या नहीं
Kanpur News: शोध के परिणामों में पाया गया कि 54.17 प्रतिशत में कोरोनरी आर्टरी डिसीज, 23 फीसदी में ट्रिपल वेसल डिजीज, 10.4 प्रतिशत में डबल वेसल डिसीज और 2.1 प्रतिशत में सिंगल वेसल डिसीज पाई गई। इसके अलावा र्हयूमेटिक हार्ट डिसीज 18.75 प्रतिशत पाई गई, जिसमें महिलाओं का प्रतिशत 70 रहा।
विस्तार
स्वस्थ और तंदरुस्त दिखने वाले 54 प्रतिशत लोगों को भविष्य में हृदय रोग हो सकता है। इसकी पुष्टि कार्डियोलॉजी (एलपीएस हृदय रोग संस्थान) के शोध में हुआ है। यह प्रदेश भर में अपने आप में पहले तरह का शोध है, जिसमें आगे चलकर दिल को किस तरह की दिक्कतें आ सकती हैं। दवा कितनी कारगर होगी, इसका पूर्व में आकलन हो सकेगा। सिर्फ यही नहीं अगली पीढ़ी के बच्चों पर दिल के मरीज होने की कितनी संभावना है, इसकी जानकारी मिल जाएगी। संस्थान के विशेषज्ञ अब अगले चरण का शोध करने जा रहे हैं। इसमें 500 लोगों को शामिल किया जाएगा।
कार्डियोलॉजी में शोध के लिए 17 जिलों के 23 से 68 साल के 48 लोगों को शामिल किया गया। इसमें 15 महिलाएं और 33 पुरुष हैं। सभी के जीन का अध्ययन किया गया। इनके ओरल कैविटी स्पिट लिया गया और इसे जीनोमिक्स लैबोरेटरी में जांचा गया। सभी कोशिकाओं की जीन स्टडी की। प्रोटीन के सीक्वेंस को देखा, जिसमें पीआरएस वैल्यू ज्यादा पाई गई वे खतरनाक हैं। अधिक पीआरएस वैल्यू बीमारी की गंभीरता बताती है। शोध के परिणामों में पाया गया कि 54.17 प्रतिशत में कोरोनरी आर्टरी डिसीज, 23 फीसदी में ट्रिपल वेसल डिजीज, 10.4 प्रतिशत में डबल वेसल डिसीज और 2.1 प्रतिशत में सिंगल वेसल डिसीज पाई गई। इसके अलावा र्हयूमेटिक हार्ट डिसीज 18.75 प्रतिशत पाई गई, जिसमें महिलाओं का प्रतिशत 70 रहा।
कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी)
ह्रदय की नसों में रुकावट से खून के प्रवाह में कमी आ जाती है। यह कमी ह्रदय की धमनियों में एथेरोमेटस प्लाक नामक वसायुक्त पदार्थों के जमा होने के कारण होती है। धमनियां सकरी हो जाती है और वहां खून का प्रवाह कम हो जाता है। सीने में दर्द, बेचैनी, दबाव, जकड़न, भारीपन, थकान और सांस फूलने जैसे लक्षण होते हैं।
कार्डियोमायोपैथी
ह्रदय की मांसपेशियां कमजोर, मोटी या कठोर हो जाती हैं, जिससे ह्रदय के लिए खून को प्रभावी ढंग से पंप करना मुश्किल होता है। यह धमनी रोग, उच्च रक्तचाप, थायरॉइड, मधुमेह के कारण बन जाते हैं। सांस की तकलीफ, पैरों, टखनों और पेट में सूजन, सीने में दर्द या दबाव, चक्कर आना लक्ष्ण हैं।
र्हयूमैटिक हार्ट डिजीज
ह्रदय के वाल्व स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। ये क्षति बचपन में सोरथ्रोट होता है, उसमें बैक्टीरिया ह्रदय को खराब कर देता है। सांस की तकलीफ, पैरों, टखनों और पेट में सूजन, सीने में दर्द या दबाव, चक्कर आना या बेहोशी, अनियमित दिल की धड़कन जैसे इसके लक्षण हैं।
पीआरएस वैल्यू
पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर है, जिसका सामान्य स्कोर एक है। अगर एक से ज्यादा है, तो बीमारी की संभावना ज्यादा है।
यह प्रदेश का पहला शोध है, जिसमें ह्रदय रोगों को लेकर भविष्य की इतनी जानकारी मिली है। अगले चरण में 500 लोगों पर शोध किया जाएगा। यह बेहद कारगर है, जिसमें पहले से जानकारी मिल सकेगी तो रोग की गंभीरता को रोका जा सकता है। -डॉ. राकेश वर्मा, निदेशक कॉर्डियोलॉजी