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पुरानी यादें: जब राज्यसभा सांसद थे तब ट्रेनों के ठहराव के लिए दिया था धरना, अब वहीं होगा राष्ट्रपति का स्वागत
Fri, 25 Jun 2021 12:52 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
दिनेश प्रताप सिंह, गौरव , अमर उजाला, कानपुर
दिनेश प्रताप सिंह, गौरव , अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 25 Jun 2021 12:52 PM IST
सार
8 जनवरी 2014 को पुखरायां में चार ट्रेनों के ठहराव को लेकर धरना देने वालों में शामिल रामनाथ कोविंद देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचेंगे शायद तब किसी को अंदाजा नहीं था। तब कोविंद पूर्व राज्यसभा सदस्य थे।
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जब सांसद थे तब इसी स्टेशन पर राष्ट्रपति कोविंद ने दिया था धरना
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद गृह जनपद आने पर परौंख के बाद पुखरायां जाएंगे। पुखरायां से उनका पुराना लगाव है। राज्यसभा सांसद रहते हुए उन्होंने विकास कार्य कराने में पुखरायां क्षेत्र को तवज्जो दी थी। पुखरायां में चार महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव को लेकर उन्होंने धरना भी दिया था।
राष्ट्रपति बनने के बाद वह पहली बार पुखरायां आएंगे। अगर उन्हें धरने वाला दिन याद दिलाया गया तो चार ट्रेनों का ठहराव अब शुरू हो सकता है। इससे जिले में उद्योगों को रफ्तार मिलेगी। जिले में ट्रेनों के ठहराव को लेकर कई बार अलग-अलग दलों के लोगों व व्यापारियों ने धरना दिया।
8 जनवरी 2014 को पुखरायां में चार ट्रेनों के ठहराव को लेकर धरना देने वालों में शामिल रामनाथ कोविंद देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचेंगे शायद तब किसी को अंदाजा नहीं था। तब कोविंद पूर्व राज्यसभा सदस्य थे। रेलवे के अफसरों ने धरने पर कोई खास ध्यान नहीं दिया, लेकिन उन ट्रेनों के ठहराव के पीछे रामनाथ कोविंद के मन में जिले के विकास को गति मिलने का ही सपना था।
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अब राष्ट्रपति बनने के बाद कोविंद पहली बार गृह जनपद आ रहे हैं इस दौरान वे पुखरायां भी जाएंगे। धरने के दौरान भाजपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष मदन पांडेय, सांसद भानु प्रताप वर्मा, राहुल अग्निहोत्री समेत कई भाजपाई शामिल हुए थे।
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राष्ट्रपति बनने के बाद वह पहली बार पुखरायां आएंगे। अगर उन्हें धरने वाला दिन याद दिलाया गया तो चार ट्रेनों का ठहराव अब शुरू हो सकता है। इससे जिले में उद्योगों को रफ्तार मिलेगी। जिले में ट्रेनों के ठहराव को लेकर कई बार अलग-अलग दलों के लोगों व व्यापारियों ने धरना दिया।
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8 जनवरी 2014 को पुखरायां में चार ट्रेनों के ठहराव को लेकर धरना देने वालों में शामिल रामनाथ कोविंद देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचेंगे शायद तब किसी को अंदाजा नहीं था। तब कोविंद पूर्व राज्यसभा सदस्य थे। रेलवे के अफसरों ने धरने पर कोई खास ध्यान नहीं दिया, लेकिन उन ट्रेनों के ठहराव के पीछे रामनाथ कोविंद के मन में जिले के विकास को गति मिलने का ही सपना था।
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अब राष्ट्रपति बनने के बाद कोविंद पहली बार गृह जनपद आ रहे हैं इस दौरान वे पुखरायां भी जाएंगे। धरने के दौरान भाजपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष मदन पांडेय, सांसद भानु प्रताप वर्मा, राहुल अग्निहोत्री समेत कई भाजपाई शामिल हुए थे।
अब राष्ट्रपति के आगमन को लेकर रेलवे के शीर्ष अफसर भी एक पैर पर खड़े नजर आ रहे हैं। ऐसे में लोगों के बीच चर्चा ये है कि अगर राष्ट्रपति को धरने वाला दिन याद आया तो उन ट्रेनों का ठहराव हो सकता है। इससे पुखरायां के साथ जिले में विकास को गति मिलेगी। औद्योगिक जनपद के नाम पर जिला पूरे देश में पहचान बनाने में कामयाब हो सकता है।
इन ट्रेनों के ठहराव की उठाई थी मांग
पुष्पक एक्सप्रेेस, लखनऊ-मुंबई एक्सप्रेस, कानपुर-बलसाड़ा (सूरत) एक्सप्रेस, उद्योग नगरी प्रतापगढ़-मुंबई एक्सप्रेस
ट्रेनों के ठहराव से होता ये फायदा
इन चार ट्रेनों के ठहराव से जिले में औद्योगिक इकाइयों का बढ़ना तय था। रनियां, जैनपुर व पुखरायां औद्योगिक क्षेत्र है। खासतौर पर रनियां व जैनपुर में बड़े पैमाने पर फैक्टरी स्थापित हैं। उद्योग के लिए रेल मार्ग महत्वपूर्ण है। पुखरायां स्टेशन तो है लेकिन ट्रेनों का ठहराव न होने से औद्योगिक इकाइयों से जुड़े लोगों को इसका व्यापारिक लाभ नहीं मिल पा रहा है।
धरने के दौरान रामनाथ कोविंद ने जिन चार ट्रेनों के ठहराव की मांग की थी वह प्रदेश की राजधानी से लेकर मुंबई व गुजरात के सूरत जैसे औद्योगिक शहरों को जाने वाली हैं। इन ट्रेनों के ठहराव की मांग के दौरान व्यापारिक समर्थन भी खूब मिला था। ठहराव होने पर जिले से सीधे बड़े शहरों के लिए आवागमन सुगम हो जाता। इससे जिले औद्योगिक जनपद के रुप में पहचान बनाना आसान हो जाता।
इन ट्रेनों के ठहराव की उठाई थी मांग
पुष्पक एक्सप्रेेस, लखनऊ-मुंबई एक्सप्रेस, कानपुर-बलसाड़ा (सूरत) एक्सप्रेस, उद्योग नगरी प्रतापगढ़-मुंबई एक्सप्रेस
ट्रेनों के ठहराव से होता ये फायदा
इन चार ट्रेनों के ठहराव से जिले में औद्योगिक इकाइयों का बढ़ना तय था। रनियां, जैनपुर व पुखरायां औद्योगिक क्षेत्र है। खासतौर पर रनियां व जैनपुर में बड़े पैमाने पर फैक्टरी स्थापित हैं। उद्योग के लिए रेल मार्ग महत्वपूर्ण है। पुखरायां स्टेशन तो है लेकिन ट्रेनों का ठहराव न होने से औद्योगिक इकाइयों से जुड़े लोगों को इसका व्यापारिक लाभ नहीं मिल पा रहा है।
धरने के दौरान रामनाथ कोविंद ने जिन चार ट्रेनों के ठहराव की मांग की थी वह प्रदेश की राजधानी से लेकर मुंबई व गुजरात के सूरत जैसे औद्योगिक शहरों को जाने वाली हैं। इन ट्रेनों के ठहराव की मांग के दौरान व्यापारिक समर्थन भी खूब मिला था। ठहराव होने पर जिले से सीधे बड़े शहरों के लिए आवागमन सुगम हो जाता। इससे जिले औद्योगिक जनपद के रुप में पहचान बनाना आसान हो जाता।