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रामनाथ के बचपन के दोस्त ने बताया किन-किन अभावों से गुजर चुके हैं कोविंद

Sat, 24 Jun 2017 08:32 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 24 Jun 2017 08:32 AM IST
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ramnath kovind childhood story
रामनाथ कोविंद और उनके दोस्त विजयपाल

एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन भर दिया है। कोविंद का राष्ट्रपति बनना तय माना जा रहा है। रामनाथ मूल रूप से कानपुर देहात के रहने वाले हैं। उन्हें राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाये जाने के बाद एकदम से उनका गांव परौंख सुर्खियों में आ गया। रामनाथ के बचपन के दोस्त और रिश्तेदारों ने गुजरे जमाने के किस्सों को सुनाया तो सभी हैरान रह गए।  

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रामनाथ कोविंद के बचपन के दोस्त विजयपाल

बिहार के राज्यपाल और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के दोस्त पेशे से किसान विजय पाल सिंह जिनकी उम्र इस समय करीब 71 साल है। उन्होंने रामनाथ के साथ बचपन में बिताये कुछ किस्से सुनाये। विजय पाल के मुताबिक वह कानपुर देहात के गांव परौंख में अपने परिवार के साथ रहते हैं। विजय अब अपने दोस्त से दिल्ली जाकर मिलने की इच्छा जता रहे हैं। कोविंद और विजय पाल का घर परौंख गांव में अगल-बगल ही है। कक्षा 1 से 5 तक दोनों साथ में पढ़े।

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रामनाथ कोविंद की शादी के दौरान की फोटो

विजय ने रामनाथ के साथ बचपन में गुजारे दिनों के बारे में बताते- बताते फ्लैशबैक में खो गए। उन्होंने बताया कि पाठशाला में जाते समय हम लोग जमीन पर गिरे आम चुन कर खाया लिया करते थे। विजय के मुताबिक रामनाथ पढ़ाई में बहुत तेज थे और मैं बहुत कमजोर। मैने पांचवीं के बाद पढ़ाई छोड़कर खेती किसानी शुरू कर दी।  उधर, रामनाथ कोविंद ने पांचवी के बाद घर से 6 किलोमीटर दूर खानपुर-प्रयागपुर गांव के एक स्कूल में एडमिशन ले लिया था। उस समय हमारे पास साइकिल नहीं थी स्कूल पैदल-पैदल ही जाया करते थे। जूनियर हाईस्कूल पास करने के बाद आगे की पढ़ाई करने कोविंद कानपुर शहर चले गए।  

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रामनाथ कोविंद अपने गांव के दोस्तों के साथ

कानपुर देहात का परौंख गांव जहां रामनाथ कोविंद का जन्म हुआ था और बचपन गुजरा था। ये गांव उत्तर भारत के किसी भी आम गांव जैसा ही है। मुख्य मार्ग से गाँव तक पहुँचने के लिए संकरी सड़क, कच्चे घरों के बीच कुछ पक्के मकान, पेड़ और चारों तरफ खेत हैं। परौंख गांव की आबादी आठ हजार के करीब है और सभी जाति के लोग रहते हैं। विजय पाल के मुताबिक दोस्त कोविंद के पिता घर में ही एक छोटी सी दुकान चलाते थे और दुकान ही उनकी आय का एकमात्र जरिया था। घर कच्चा हुआ करता था। जब कोविंद पांच साल के थे तब उनके घर में आग लग गयी और उसी हादसे में उनकी मां गुजर गईं।

 

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रामनाथ कोविंद
कोविंद के भाई-बहन दूसरे शहरों में बसने के लिए चले गए। गांव में सिर्फ उनके पिता ही रह गए थे। विजय की मानें तो कोविंद का पूरा मकान जर्जर होकर गिर चुका था। रामनाथ के कहने पर वहां 2001 में एक सामूहिक केंद्र बना दिया। रामनाथ कोविंद आखिरी बार दिसंबर 2016 में परौंख गांव आए थे। उस समय वह बिहार के राज्यपाल बन चुके थे। गांव के तमाम किसानों वीरेंद्र सिंह, लल्लन, श्याम आदि ने बताया कि कोविंद जी के प्रयासों से ही गांव में विकास हुआ। स्कूल, बैंक खुला और पक्की सड़कें बनीं।  
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