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हंसना भी कला होत है, राजू श्रीवास्तव बता रहे हैं इज्जतदार हंसी.. लब्भड़ हंसी ओखे प्रकार
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 03 Dec 2018 11:33 AM IST
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दोस्तों पहिले पान केर, चाय केर दुकानन पे बमपिलाट महफिल जमत रही.. सबै खूब लंबी लंबी छोड़त रहे.. मगर धांसू मौज आत रही.. गांवन मा भी चौपाल लगत रही.. खूब बतकही होत रही.. अब लगत है जइसे कौनो के पास टाइमै नहीं है.. सारा टाइम ई कमीना मोबाइल लई लिहिस.. एकै कमरे मा सब परिवार साथ बइठे होत हैं मगर सब आपन आपन मोबाइल मा लगे पड़े हैं.. हंसी ठट्ठा अउर ठहाका अब नहीं सुनाई देत है.. सब ई नासपीटा मोबाइलवा की वजह से..।
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दोस्तों हंसना भी एक कला होत है.. छोटी हंसी.. बड़ी हंसी.. इज्जतदार हंसी.. लब्भड़ हंसी.. मारक हंसी.. एमा आदमी दुसरे को मार के हंसत है..संदिग्ध हंसी.. लगतेन नहीं हंस रहा है कि रोय रहा है.. बैक फायर हंसी.. एमा जोर से हंसे पे पिछवाड़ा से फायर हुई जात है.. ऑटो हंसी.. अईस लगत है जईसे स्कूटर स्टार्ट हुई गवा होय.. सांस रोकू हंसी.. अइस हंसे वाले का मुंह नीला पड़ जात है.. आदमी डर जात है कि ई लौटिहें कि सिधार गए..। कोउ कोउ अईस हंसत है कि अगर ओके मुंह मा पंजीरी होय तो सामने वाला का पूरी पंजीरी बिना कथा सुने मिलि जाई..।
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दोस्तों हंसावे वालन की आपन देस मा खूब वराईटी भई.. एक उई होत हैं जो व्यंग करत रहे.. जईसे हरिशंकर परसाई, शरत जोशी, केपी सक्सेना, ई लोग आपन व्यंगात्मक शैली से खूब हंसाईन अउर सामजिक मुद्दे भी उठाईन..। यही परंपरा का आगे बड़ाइन कवि लोग.. जइसे हुल्लड़ मुरादाबादी, शैल चतुर्वेदी, अशोक चक्रधर, सुरेन्द्र शर्मा.. मगर हंसाये वालन मा सबसे महंगी अऊर ऊंची दूकान लगाईंन कपिल शर्मा..
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धन बटोरे के मामले मा ई सबसे आगे रहे.. इनकी दुकनदारी एकदम टॉप पे रही..। वइसे आपन यूपी मा हंसावे के मामले मा चार काका का बहुत बड़ा योगदान रहा है.. काका हाथरसी, काका बैंसवारी, काका रमई और हमार बाप काका बलई.. मगर एक बात का अफसोस है कि आपन देस मा हंसाये वालन की जमात मा औरतन की बहुतै कमी रही.. बताओ 130 करोड़ केर आबादी वाला हमार देस है अउर लेडी कॉमेडियन भई हैं दुई.. 40 साल पहिले तक टुनटुन रहीं मोटी सी..। उनके बाद कौनो महिला हंसावे खातिर आगे नहीं आई.. फिर 40 साल बाद एक अउर हंसावे वाली आईं.. वहु मोटी हैं.. भारती सिंह..।
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औरतें हंसावे मा आगे काहे नहीं अवती हैं.. तो हमका पुत्तू बताईन कि भईया औरतें हंसावे वाले काम मा इसलिए पीछे हैं काहे से उनका मर्दन का रुलावे से फुरसतै नहीं है..। तो हम कहा अब टाइम आय गवा है कि औरतें शर्माए ना.. कॉमेडी करना खाली पुरुष प्रधान क्षेत्र ना होय..। खूब हंसो और हंसाओ बस ई ध्यान रखे की जरूरत है कि कहां अउर कौन मौके पे आप हंसत हैं.. अपने बेनाझाबर के पारस बाबू हैं.. कहूं गए रहे मय्यत मा.. हुवां मरे वाले का देख के हंसे लगे.. कहे लगे अरे ई जब जिन्दा रहे तो पतले रहे.. मरे के बाद मोटे हुई गए.. मरे के बाद कोऊ इनका बिरयानी खवा दीस का..