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सरकारी इमारतों में भी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Sat, 04 Jun 2016 01:03 AM IST
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कानपुर। आसमान से बरसते अमृत रूपी जल को बचाने में सरकारी संस्थानों को भी अपना योगदान करना होगा। प्रदेश सरकार से रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का लक्ष्य मिलने के बाद केडीए अधिकारियों ने इस पर काम शुरू कर दिया है। केडीए में अपने क्षेत्र में स्थित कम से कम 12 सरकारी विभागों में सिस्टम लगवाने का लक्ष्य मिला है। केडीए अपनी इमारत से ही इसकी शुरुआत करेगा। अन्य सरकारी इमारतों के चयन की प्रक्रिया भी जल्द पूरी होगी। दूसरी ओर, केडीए अभियंताओं ने जोनवार सर्वे का काम तेज कर दिया है।
इस वर्ष पानी का जबर्दस्त संकट झेल रहे शहरवासियों को इसकी कीमत समझ में आने लगी है। लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए अमर उजाला ने रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाने का अभियान शुरू किया है। रीयल एस्टेट के जानकार यजुवेंद्र सिंह के मुताबिक मानसून सीजन से पहले यदि शहर की 10 फीसदी इमारतों में भी यह सिस्टम लग जाए या लगे सिस्टम सुधर जाएं तो शहर के भूगर्भ जलस्तर में खासा सुधार आ जाएगा।
केडीए के अधिशासी अभियंता एके सिंह ने बताया कि 772 भवनों की तैयार सूची को जोनवार बांटकर सर्वे किया जा रहा है। जोन-2 में 500 वर्गमीटर से बड़ी 185 और जोन-3 में 141 इमारतें चिह्नित की गई हैं। इसी प्रकार 300 वर्गमीटर से 500 वर्गमीटर तक जोन-2 में 105 और जोन-3 में 82 इमारतों की सूची बनाई गई है। जोन-1 और 4 के भी 459 नक्शों को जोनवार बांटकर सर्वे किया जा रहा है।
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इस वर्ष पानी का जबर्दस्त संकट झेल रहे शहरवासियों को इसकी कीमत समझ में आने लगी है। लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए अमर उजाला ने रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाने का अभियान शुरू किया है। रीयल एस्टेट के जानकार यजुवेंद्र सिंह के मुताबिक मानसून सीजन से पहले यदि शहर की 10 फीसदी इमारतों में भी यह सिस्टम लग जाए या लगे सिस्टम सुधर जाएं तो शहर के भूगर्भ जलस्तर में खासा सुधार आ जाएगा।
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केडीए के अधिशासी अभियंता एके सिंह ने बताया कि 772 भवनों की तैयार सूची को जोनवार बांटकर सर्वे किया जा रहा है। जोन-2 में 500 वर्गमीटर से बड़ी 185 और जोन-3 में 141 इमारतें चिह्नित की गई हैं। इसी प्रकार 300 वर्गमीटर से 500 वर्गमीटर तक जोन-2 में 105 और जोन-3 में 82 इमारतों की सूची बनाई गई है। जोन-1 और 4 के भी 459 नक्शों को जोनवार बांटकर सर्वे किया जा रहा है।
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