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बारिश से सभी खुश, व्यवस्थाएं फुस्स

Wed, 20 Jan 2016 02:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर Updated Wed, 20 Jan 2016 02:11 AM IST
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Rain all happy, arrangements foiled
ठंड के अलविदा होने की आशंका के बीच मंगलवार को सुबह से देर रात तक हुई बारिश ने गलन बढ़ा दी। इससे लोगों में कंपकंपी तो छूटी लेकिन उन्हें इस बारिश से खुशी भी हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में भी किसानों ने राहत महसूस की। लेकिन शहरी इलाकों में व्यवस्थाओं ने लोगों को परेशान भी किया।
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खुदाई से निकली मिट्टी कीचड़ बनी और कई लोग चुटहिल हो गए। बिजली की आंख मिचौनी रात तक चलती रही। शहर में फॉल्टों की झड़ी लग गई। वीआईपी रोड में पेड़ गिरने से कई इलाकों में देर रात लाइट नहीं आ सकी। सड़कों में फैले कीचड़ में फिसल कई लोग घायल हो गए।
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चार दिनों से चल रही पछुआ हवाओं की वजह से छाए बादलों ने मंगलवार को दिन भर पानी बरसाया। सुबह चार बजे से देर रात रह-रह कर कभी धीमी तो कभी तेज बूंदाबांदी से जहां दिन का पारा 6.4 डिग्री सेल्सियस गिर गया। वहीं, रात का पारा बढ़ा है।
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मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि बदरी और बूंदाबांदी का मौसम बुधवार को भी बना रहेगा। इस हफ्ते रात का पारा चढ़ेगा और दिन के पारे में गिरावट आएगी। ठंड, गलन और कोहरा बना रहेगा। उधर, दोपहर ढाई बजे तक 8.4 मिलीमीटर और देर रात तक लगभग 10 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई।

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि बारिश होने का मुख्य कारण बदरी और सुबह व दोपहर की आर्द्रता (नमी) का प्रतिशत अधिक होना है। इससे दिन का तापमान सामान्य से लगभग पांच डिग्री सेल्सियस कम हो गया है।

डॉ. दुबे ने बताया कि देर शाम हवाओं की दिशा पछुआ से बदल कर पूर्वी हुई है। बुधवार को शाम तक मौसम में सुधार हो सकेगा। दो-तीन दिन में आसमान साफ होगा, हल्की धूप भी निकल सकती है। बारिश के बाद दिन का पारा गिरेगा और दिन में गलन व ठंड बढ़ेगी।

फसलों के लिए ‘अमृत’ है बारिश
डॉ. दुबे ने बताया कि मंगलवार की बारिश खेतों और फसलों के लिए ‘अमृत’ के समान है। यह बारिश गेहूं , जौ के लिए वरदान है। इसके अलावा चना, मसूर और तिलहनी फसलों के लिए फायदेमंद और टमाटर, गोभी, पत्ता गोभी और मिर्च के लिए बढ़िया है।

रेल गोदाम में भीगी दाल-मटर
सीपीसी रेल गोदाम में रेल अफसरों और कर्मचारियों की लापरवाही से लाखों रुपये कीमत की दाल और मटर भीग गई। खुले में रखी दाल और मटर को मौसम की खराबी होने के पहले टीन शेड के नीचे नहीं कराया गया था।


1996 में 136 मिमी हो चुकी है बारिश

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 1996 जैसी बारिश अब तक नहीं हुई। पूरे माह में 136.4 मिलीमीटर बारिश हुई थी। उधर, 9 जनवरी 1995 को 5.6 मिलीमीटर, 7 जनवरी 1999 को 18.2 मिली मीटर और 7 से 9 जनवरी 1989 को 28.2 मिली मीटर बारिश रिकार्ड की गई थी।
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