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दालों के भाव गिरने पर भी बाजार बेजार

Fri, 25 Nov 2016 11:39 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर Updated Fri, 25 Nov 2016 11:39 PM IST
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pulses price hike not increased buyer
डेमो
पांच सौ और हजार के नोटों की बंदी के कारण थोक कारोबार उठ नहीं पा रहा है। सहालग के मौसम में भी कलक्टरगंज गल्ला मंडी में सन्नाटा पसरा है। बाजार आने वाले बस जरूरत के हिसाब से खरीदारी कर रहे हैं। वहीं, पांच से दस रुपये प्रतिकिलो के बीच दालों के दामों में गिरावट आई है। कारोबारियों का कहना है कि चलन वाले नोटों की किल्लत की वजह से सप्लाई पर भी असर पड़ा है। उधर चावल, चीनी और तेल आदि के दामों में  भी स्थिरता है। 
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दालों में महंगाई कोरी अफवाह
दाल व्यापारी किशन गुप्ता ने कहा,  दाल के भाव में जब थोक बाजार में तेजी नहीं है तो फुटकर में तेजी कैसे आ जाएगी। लोग सीमित मात्रा में ही  खरीदारी कर रहे हैं। ऐसे में दालों के रेट चढ़ने की बात अफवाह है। शुक्रवार को थोक बाजार में अरहर का भाव 100 रुपये की बजाय 90 रुपये, मूंग 75 की बजाय 65 से 70 रुपये, उरद 110 की बजाय 90 से 100 रुपये और मसूर की दाल 80 रुपये की बजाय 65 से 70 रुपये प्रतिकिलो के बीच रहा। फुटकर में 10 से 15 रुपये किलो से ज्यादा दाम में वृद्धि नहीं होती। चने की दाल 125 से 130 रुपये में है। इसमें बीते कई माह से तेजी चल रही है। इसका नोट बंदी से कोई संबंध नहीं है।
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कलक्टरगंज व्यापार मंडल के अध्यक्ष आशीष मिश्रा क कहना है मिलों से दाल-चावल की सप्लाई ठप है। मिल मालिक नए और छोटे नोटों की डिमांड कर रहे हैं। व्यापारी दुकान में माल पहुंचने के बाद 500 के पुराने नोटों से भुगतान करते हैं। इस स्थिति में न तो माल खरीद रहे हैं और न ही आगे बेच रहे हैं। पूरी तरह से काम ठप है। जितना स्टॉक मौजूद है, उतना ही नगद और चलन वाले नोटों के जरिए बेच रहे हैं। मंदी का आलम यह है कि किसान 1200 रुपये क्विंटल वाला धान 1000 रुपये में बेचने को तैयार है।
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बदल रहे कारोबार का तरीका
1000 और 500 के नोटों की बंदी से सबक लेते हुए शहर के व्यापारियों-दुकानदारों ने कारोबार का तरीका बदल दिया है। अधिकतर दुकानदारों ने डेबिट-क्रेडिट कार्ड से भुगतान के लिए मशीनें लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। दूसरी ओर इलेक्ट्रानिक्स आइटमों, वाहनों आदि में तरह-तरह की स्कीमें आ गई हैं।

 
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