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ग्राम पंचायतों से पल्स ऑक्सीमीटर व थर्मल स्कैनर लापता
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पुखरायां। कोरोना संक्रमण को देखते हुए पिछले साल गांवों में लोगों की जांच के लिए प्रत्येक ग्रामसभा में पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर की खरीदारी की गई थी। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों में निगरानी समितियों का गठन किया गया था।
यह समितियां बाहर से लौटने वाले लोगोेें के साथ ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच कर रही थीं। इस साल कोरोना संक्रमण का खतरा अधिक होने के बावजूद ग्राम पंचायत निगरानी समिति कागज में तैयार कर क्र्रियान्वित कर दी गई हैं। वहीं खरीदे गए उपकरणों का कुछ पता नहीं चल रहा है।
भोगनीपुर तहसील के ब्लॉक अमरौधा व मलासा में 129 ग्रामपंचायतें हैं। पिछले वर्ष जब कोेेरोना संक्रमण का ग्राफ बढ़ा तो गैर प्रांतों से लोग अपने गांवों को लौट रहे थे। ऐसे में उनके स्वास्थ्य की जांच के लिए ग्राम निधि से पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर की खरीद ब्लॉक स्तर से कराई गई थी।
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जिसके लिए निगरानी समिति में सफाई कर्मचारी, रोजगार सेवक, एएनएम, शिक्षामित्र, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सहायिका, चौकीदार को रखा गया था। इसका अध्यक्ष प्रधान व ग्रामपंचायत अधिकारी को बनाया गया था। इस बार कोरोना संक्रमण बढ़ने पर भी निगरानी समिति पूरी तरह निष्क्र्रिय बनी रही।
वहीं पंचायत चुनाव में थर्मल स्कैनर व पल्स ऑक्सीमीटर का प्रत्येक मतदान केंद्र पर उपयोग किया जाना था। यह उपकरण कुछ ग्राम पंचायतों को छोड़कर बाकी में कहां गायब हो गए इसका पता नहीं है। पंचायत चुनावों के बाद नवनिर्वाचित प्रधानों को निगरानी समिति में शामिल कर जांच कराने के निर्देश दिए गए। इस पर कुछ प्रधानों ने विरोध करते हुए पहले उपकरणों को मुहैया कराए जाने की बात कही है।
जिसका जवाब अधिकारी नहीं दे सके। गुलौली की नवनिर्वाचित प्रधान कमलेश देवी ने बताया कि जब उपकरण ही नहीं हैं तो निगरानी समिति का मतलब क्या है। इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। महेरा के नवनिर्वाचित प्रधान अखिलेश कुमार ने बताया कि निगरानी समिति बनाए जाने की जानकारी ग्रामपंचायत अधिकारी ने दी है। अभी शपथ भी नहीं हुई है।
निगरानी समिति और उपकरणों के संबंध में जानकारी नहीं है। हारामऊ के प्रधान अरविंद कुमार ने बताया कि उन्हें भी अब तक इसकी जानकारी नहीं है। ब्लॉक अमरौधा के एडीओ पंचायत लाखन सिंह व मलासा के एडीओ पंचायत हरीओम सक्सेना ने बताया कि ऑक्सीमीटर व थर्मल स्कैनर ग्राम पंचायत स्तर से खरीदे गए थे। जो पंचायत चुनाव के समय स्वास्थ्य विभाग को दिए गए थे। जिसकी जानकारी कराई जा रही है। निगरानी समिति का कार्य है कि वह संक्रमित की सूचना मुहैया कराए।
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यह समितियां बाहर से लौटने वाले लोगोेें के साथ ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच कर रही थीं। इस साल कोरोना संक्रमण का खतरा अधिक होने के बावजूद ग्राम पंचायत निगरानी समिति कागज में तैयार कर क्र्रियान्वित कर दी गई हैं। वहीं खरीदे गए उपकरणों का कुछ पता नहीं चल रहा है।
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भोगनीपुर तहसील के ब्लॉक अमरौधा व मलासा में 129 ग्रामपंचायतें हैं। पिछले वर्ष जब कोेेरोना संक्रमण का ग्राफ बढ़ा तो गैर प्रांतों से लोग अपने गांवों को लौट रहे थे। ऐसे में उनके स्वास्थ्य की जांच के लिए ग्राम निधि से पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर की खरीद ब्लॉक स्तर से कराई गई थी।
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जिसके लिए निगरानी समिति में सफाई कर्मचारी, रोजगार सेवक, एएनएम, शिक्षामित्र, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सहायिका, चौकीदार को रखा गया था। इसका अध्यक्ष प्रधान व ग्रामपंचायत अधिकारी को बनाया गया था। इस बार कोरोना संक्रमण बढ़ने पर भी निगरानी समिति पूरी तरह निष्क्र्रिय बनी रही।
वहीं पंचायत चुनाव में थर्मल स्कैनर व पल्स ऑक्सीमीटर का प्रत्येक मतदान केंद्र पर उपयोग किया जाना था। यह उपकरण कुछ ग्राम पंचायतों को छोड़कर बाकी में कहां गायब हो गए इसका पता नहीं है। पंचायत चुनावों के बाद नवनिर्वाचित प्रधानों को निगरानी समिति में शामिल कर जांच कराने के निर्देश दिए गए। इस पर कुछ प्रधानों ने विरोध करते हुए पहले उपकरणों को मुहैया कराए जाने की बात कही है।
जिसका जवाब अधिकारी नहीं दे सके। गुलौली की नवनिर्वाचित प्रधान कमलेश देवी ने बताया कि जब उपकरण ही नहीं हैं तो निगरानी समिति का मतलब क्या है। इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। महेरा के नवनिर्वाचित प्रधान अखिलेश कुमार ने बताया कि निगरानी समिति बनाए जाने की जानकारी ग्रामपंचायत अधिकारी ने दी है। अभी शपथ भी नहीं हुई है।
निगरानी समिति और उपकरणों के संबंध में जानकारी नहीं है। हारामऊ के प्रधान अरविंद कुमार ने बताया कि उन्हें भी अब तक इसकी जानकारी नहीं है। ब्लॉक अमरौधा के एडीओ पंचायत लाखन सिंह व मलासा के एडीओ पंचायत हरीओम सक्सेना ने बताया कि ऑक्सीमीटर व थर्मल स्कैनर ग्राम पंचायत स्तर से खरीदे गए थे। जो पंचायत चुनाव के समय स्वास्थ्य विभाग को दिए गए थे। जिसकी जानकारी कराई जा रही है। निगरानी समिति का कार्य है कि वह संक्रमित की सूचना मुहैया कराए।