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Kanpur News: कृषि अपशिष्ट और वायु प्रदूषण निस्तारण पर काम करेगा पीएसआईटी
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कानपुर। पीएसआईटी के छात्र अब कृषि अपशिष्ट और वायु प्रदूषण की समस्या के निस्तारण पर काम करेंगे। नवाचार और पर्यावरण से जुड़े प्रोजेक्ट पर शोध व विकास कार्य करने के लिए एमएसएमई ने संस्थान का चयन किया है।
एमएसएमई आइडिया हैकाथॉन 4.0 यंग इनोवेटर्स की इनोवेटिव स्कीम के तहत इसे स्वीकृति दी गई है। तकनीक विकसित करने के लिए संस्थान को 20 लाख रुपये अनुदान दिया जाएगा।
हर साल फसल कटाई के बाद खेतों में बची पराली को जलाने से प्रदूषण होता है। इस समस्या का समाधान निकालते हुए पीएसआईटी अब ऐसे कृषि अवशेषों से पर्यावरण के अनुकूल पेपर पल्प और पैकेजिंग सामग्री बनाने की तकनीक पर काम करेगा।
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इस विचार को छात्र रवींद्र शर्मा की ओर से एमएसएमई आइडिया हैकाथॉन 4.0 में प्रस्तुत किया गया था। इस तकनीक की मदद से गेहूं और धान जैसे फसल अवशेषों को बिना प्रदूषण फैलाए पल्प में बदला जाएगा। इसके बाद इससे मल्टीलेयर, एंटी बैक्टीरियल और फूड-ग्रेड पैकेजिंग तैयार की जाएगी, जिसमें नैनो टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जाएगा।
यह तकनीक पारंपरिक लकड़ी आधारित कागज उद्योग का एक हरित विकल्प साबित होगी और प्लास्टिक पैकेजिंग की जगह एक सुरक्षित और टिकाऊ समाधान पेश करेगी। पीएसआईटी के चेयरमैन प्रणवीर सिंह ने कहा कि इस तकनीक से न सिर्फ पर्यावरण को लाभ पहुंचेगा, बल्कि किसानों को भी अपने कृषि कचरे से अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा।
संस्थान का चयन इस बात का प्रमाण है कि यहां पर्यावरण और अन्य सामाजिक समस्याओं के तकनीकी समाधान पर लगातार काम किया जा रहा है। ग्रुप निदेशक डॉ. मनमोहन शुक्ला ने कहा कि कृषि कचरे से पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग तैयार करना आने वाले समय की आवश्यकता है।
यह उपलब्धि न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता और नवाचार क्षमता को दर्शाती है, बल्कि संस्थान को राष्ट्रीयस्तर पर टिकाऊ तकनीक और सामाजिक समाधान के क्षेत्र में एक सशक्त भागीदार के रूप में भी स्थापित करती है।
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एमएसएमई आइडिया हैकाथॉन 4.0 यंग इनोवेटर्स की इनोवेटिव स्कीम के तहत इसे स्वीकृति दी गई है। तकनीक विकसित करने के लिए संस्थान को 20 लाख रुपये अनुदान दिया जाएगा।
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हर साल फसल कटाई के बाद खेतों में बची पराली को जलाने से प्रदूषण होता है। इस समस्या का समाधान निकालते हुए पीएसआईटी अब ऐसे कृषि अवशेषों से पर्यावरण के अनुकूल पेपर पल्प और पैकेजिंग सामग्री बनाने की तकनीक पर काम करेगा।
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इस विचार को छात्र रवींद्र शर्मा की ओर से एमएसएमई आइडिया हैकाथॉन 4.0 में प्रस्तुत किया गया था। इस तकनीक की मदद से गेहूं और धान जैसे फसल अवशेषों को बिना प्रदूषण फैलाए पल्प में बदला जाएगा। इसके बाद इससे मल्टीलेयर, एंटी बैक्टीरियल और फूड-ग्रेड पैकेजिंग तैयार की जाएगी, जिसमें नैनो टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जाएगा।
यह तकनीक पारंपरिक लकड़ी आधारित कागज उद्योग का एक हरित विकल्प साबित होगी और प्लास्टिक पैकेजिंग की जगह एक सुरक्षित और टिकाऊ समाधान पेश करेगी। पीएसआईटी के चेयरमैन प्रणवीर सिंह ने कहा कि इस तकनीक से न सिर्फ पर्यावरण को लाभ पहुंचेगा, बल्कि किसानों को भी अपने कृषि कचरे से अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा।
संस्थान का चयन इस बात का प्रमाण है कि यहां पर्यावरण और अन्य सामाजिक समस्याओं के तकनीकी समाधान पर लगातार काम किया जा रहा है। ग्रुप निदेशक डॉ. मनमोहन शुक्ला ने कहा कि कृषि कचरे से पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग तैयार करना आने वाले समय की आवश्यकता है।
यह उपलब्धि न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता और नवाचार क्षमता को दर्शाती है, बल्कि संस्थान को राष्ट्रीयस्तर पर टिकाऊ तकनीक और सामाजिक समाधान के क्षेत्र में एक सशक्त भागीदार के रूप में भी स्थापित करती है।