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Kanpur News: तीन साल जेल काटने बाद साबित हुआ निर्दोष

Fri, 15 Mar 2024 11:33 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Fri, 15 Mar 2024 11:33 PM IST
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Proved innocent after serving three years in jail
कानपुर देहात। मूसानगर क्षेत्र में करीब तीन साल पहले एक गांव निवासी महिला ने घाटमपुर क्षेत्र के एक गांव निवासी युवक पर अपने मासूम पुत्र के साथ कुकर्म और जान से मारने की कोशिश करने का मामला दर्ज कराया था। मामले की सुनवाई पॉक्सो कोर्ट में चल रही थी। शुक्रवार को अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए अभियोजन कथानक को संदिग्ध मानते हुए तीन साल से जेल काट रहे आरोपी को दोष मुक्त करते हुए उसकी रिहाई के आदेश जारी किए हैं।
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मूसानगर क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 5 फरवरी 2021 की शाम उसके गांव के रहने वाले तिलक का साला विष्णु उसके चार वर्षीय मासूम बच्चे को टॉफी का लालच देकर उसे जंगल की ओर ले गया। वहां उसके बच्चे को जान से मारने की कोशिश करते हुए मारपीट की खोजबीन करने पर वह बेहोशी हालत में मिला। पुलिस ने मामले में विवेचना करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। साथ ही मामले की विवेचना करते हुए उसके खिलाफ गंभीर रूप से घायल करने व कुकर्म करने के प्रयास में आरोप पत्र अदालत में पेश किए थे। मामले की सुनवाई अपर जिला जज 13/ पॉक्सो कोर्ट में चल रही थी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता चीफ डिफेंस काउंसिल संजय शुक्ला ने बताया कि मामले की सुनवाई दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से घटना का कोई चश्मदीद साक्षी अदालत में पेश नहीं किया गया और न ही पीड़ित के बयान दर्ज कराए गए थे। वहीं मामले के तीन साक्षियों ने अदालत में दिए अपने बयानों में घटना देखने से इंकार किया था। इन्हीं तथ्यों को अदालत के सामने बहस में रखा गया था। शुक्रवार को अदालत ने अपना निर्णय देते हुए यह पाया कि अभियोजन की ओर से पीड़ित को अदालत में परीक्षित न किए जाने से अभियोजन कथानक का समर्थन नहीं हो रहा है। वहीं मामले में विवेचक ने अपने बयानों में पीड़ित बालक के बोलने में असमर्थ होने के कारण उसके बयान नहीं लिए जाने की बात कही गई है। जबकि मामले के अभियोजन गवाह चिकित्सक ने अपने बयानों में बताया है कि पीड़ित उसके पास स्वस्थ आया था वह वह अच्छी तरह से बोल रहा था। उसने उससे बातचीत की थी। पीड़ित को अदालत में परीक्षित न कराना अभियोजन कथानक को संदिग्ध बनाता है। इस पर अदालत ने अभियोजन के अपराध साबित करने में असफल रहने पर आरोपी को दोष मुक्त करते हुए उसे जेल से रिहा करने के आदेश दिए हैं।
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