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फिल्म, सीरियल, सोशल मीडिया और विज्ञापन में 'कनपुरिया भाषा का भौकाल'
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 08 Sep 2018 09:08 PM IST
सार
- देश भर में लोकप्रिय हो रही कानपुर की भाषा शैली
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कानपुर के शब्द और डायलॉग देशभर में हो रहे चर्चित
विस्तार
कानपुर की भाषा का भौकाल पूरे हिंदुस्तान में हो रहा है। कनपुरिया भाषा शैली इतनी तेजी से लोकप्रिय हो रही है कि दूसरे शहरों के लोग भी चर्चित कनपुरिया शब्दों का इस्तेमाल करने लगे हैं। फिल्म, टेलीविजन, सोशल मीडिया के अलावा विज्ञापनों में भी कनपुरिया शब्द अपनी खास जगह बनाने लगे हैं। कानपुर के लोगों का बातचीत करने का तरीका बड़ा ही मजाकिया है। भरे गुस्से में अगर कोई कानपुर आ जाए तो एक मिनट में ही यहां की बोली परेशान से परेशान आदमी को भी खुश कर सकती है। गुस्से करने वाला इंसान हंसते-हंसते पागल भी हो सकता है।
इन डायलॉग्स से कानपुर के शब्द छाए
- टोपा हो का और दीहिस कंटाप
- सब तिलंडी में चला गया और जिंदगी झंड हो गई
- हपक के एक कंटाप धरा तो सारी रंगबाजी धरी रहि जहिये।
- ये मठाधीसी अपने पास ही धरो।
- अरे सरऊ काहे पचड़े में पड़त हौ अबहिं लभेड़ हुई जइहैं।
- कुछ पल्ले पड़ रहा है कि ऐसे ही औरंगजेब बन रहे हो।
- भाई, अगले का भोकाल एकदम टाइट है।
- अबहीं झपड़िया दीन्ह जाइहौ तब पता चली कि पंजीरी कहां बटत रहे।
- ज्यादा बड़ी अम्मा न बनौ।
- गुरु व्यवस्था तो फुल टन्न रही।
- हर जगह चिकाही न लिया करो।
- देखना हो तो देखो नहीं तो घंटाघर देखो।
- ज्यादा खून न पियो।
- तुम ज्यादा नेता बन रहे हो।
- मार कंटाप शंट कर देंगे।
- विधिवत मारेंगे और कौनौ मुरौवत न करेंगे।
- ज्यादा बी सी न पढ़ो।
- अबहिं मार मार के हनुमान बना देबे।
- नवां है का
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इन डायलॉग्स से कानपुर के शब्द छाए
- टोपा हो का और दीहिस कंटाप
- सब तिलंडी में चला गया और जिंदगी झंड हो गई
- हपक के एक कंटाप धरा तो सारी रंगबाजी धरी रहि जहिये।
- ये मठाधीसी अपने पास ही धरो।
- अरे सरऊ काहे पचड़े में पड़त हौ अबहिं लभेड़ हुई जइहैं।
- कुछ पल्ले पड़ रहा है कि ऐसे ही औरंगजेब बन रहे हो।
- भाई, अगले का भोकाल एकदम टाइट है।
- अबहीं झपड़िया दीन्ह जाइहौ तब पता चली कि पंजीरी कहां बटत रहे।
- ज्यादा बड़ी अम्मा न बनौ।
- गुरु व्यवस्था तो फुल टन्न रही।
- हर जगह चिकाही न लिया करो।
- देखना हो तो देखो नहीं तो घंटाघर देखो।
- ज्यादा खून न पियो।
- तुम ज्यादा नेता बन रहे हो।
- मार कंटाप शंट कर देंगे।
- विधिवत मारेंगे और कौनौ मुरौवत न करेंगे।
- ज्यादा बी सी न पढ़ो।
- अबहिं मार मार के हनुमान बना देबे।
- नवां है का
स्कॉर्पियो गाड़ी के प्रिंट एड में भौकाल शब्द का इस्तेमाल
कानपुर के शब्द और डायलॉग देशभर में हो रहे चर्चित
बॉलीवुड से लेकर टेलीविजन और अब सोशल मीडिया पर कनपुरिया भाषा छाई हुई है। हाल ही में स्कॉर्पियो गाड़ी के प्रिंट एड में भौकाल शब्द का इस्तेमाल किया गया। दूसरी ओर इन दिनों यूट्यूब पर ठेठ कनपुरिया भाषा में बने ‘मेक जोक ऑफ’ वीडियो के कार्टून कैरेक्टर्स के मुंह से निकले डायलॉग लोगों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर रहे हैं। वीडियो को बनाने वाले कलाकार कनपुरिया भाषा में सामाजिक मुद्दों पर तंज कसते हैं। भाभी जी कुछ नहीं बोल रहीं...., नाली में फेंक देबे, बाबा जी दरवाजा खोल दें... कनपटी बजा देबे... जैसे डायलॉग लोगों को जुबान पर हैं। कनपुर की भाषा और अंदाज का बॉलीवुड ही नहीं, टेलीविजन जगत भी कायल है। यही वजह है कि ‘तनु वेड्स मनु’, ‘टशन’, ‘दबंग’ जैसी तमाम फिल्में और ‘भाभी जी घर पर हैं’, ‘लापतागंज’, ‘नीली छतरी वाले’ टीवी सीरियल नेशनल लेवल पर खूब लोकप्रिय हुए।
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इन फिल्मों और सीरियल में छाया कानपुर
कानपुर के शब्द और डायलॉग देशभर में हो रहे चर्चित
- बॉलीवुड के सुपरस्टार अक्षय कुमार दो फिल्मों में टशन और जॉली एलएलबी-2 में ‘कनपुरिया’ छोरे का रोल अदा कर चुके हैं। लोकल भाषा पर पकड़ बनाने के लिए उन्होंने अपने खास दोस्त विजय कृष्ण आचार्य से ट्रेनिंग ली थी।
टशन, तनु वेड्स मनु-1, तनु वेड्स मनु-2, बंटी बबली, दबंग-2, साईं वर्सेज आई, द लिजेंड ऑफ भगत सिंह, शहीद भगत सिंह, कटियाबाज, देसी कट्टे, बाबर, हंसी तो फंसी, होटल मिलन (इसी साल हो रही रिलीज), मरुधर एक्सप्रेस (इसी साल हो रही रिलीज)।
- टीवी सीरियल ‘कृष्णा चली लंदन’, ‘शास्त्री सिस्टर्स’, ‘भाभी जी घर पर हैं’, ‘लापतागंज’, ‘नीली छतरी वाले’ टीवी सीरियल नेशनल लेवल पर खूब लोकप्रिय हुए।
टशन, तनु वेड्स मनु-1, तनु वेड्स मनु-2, बंटी बबली, दबंग-2, साईं वर्सेज आई, द लिजेंड ऑफ भगत सिंह, शहीद भगत सिंह, कटियाबाज, देसी कट्टे, बाबर, हंसी तो फंसी, होटल मिलन (इसी साल हो रही रिलीज), मरुधर एक्सप्रेस (इसी साल हो रही रिलीज)।
- टीवी सीरियल ‘कृष्णा चली लंदन’, ‘शास्त्री सिस्टर्स’, ‘भाभी जी घर पर हैं’, ‘लापतागंज’, ‘नीली छतरी वाले’ टीवी सीरियल नेशनल लेवल पर खूब लोकप्रिय हुए।
'भाभी जी घर पर हैं'
कानपुर के शब्द और डायलॉग देशभर में हो रहे चर्चित
‘लापतगंज सीरियल में काम करने की वजह से कानपुरिया भाषा से मेरी जुबान का तालमेल पहले ही हो चुका था। मेरे लिए आसान था कनपुरिया स्टाइल में बातचीत करना। तीन साल पहले सीरियल के प्रमोशन के सिलसिले में दूसरी बार कानपुर आया। मुंबई में मेरे कुछ दोस्त इसी शहर से ताल्लुक रखने वाले हैं। यही वजह रही कि मैं कनपुरिया कल्चर को आसानी से समझ गया। - रोहिताश (तिवारी जी)
‘चिकाई और भौकाल शब्द का असली मतलब आज मैं जान गई हूं। लास्ट टाइम जब मैं कानपुर आई थी तो मुझे यहां की कचौड़ी बहुत अच्छी लगी। इसके बाद मैने चाट भी खाई। कानपुर की बोली ही नहीं यहां की हर चीज में एक अलग ही स्वाद है। यहां के फैन्स मुझसे कहते हैं कि शो की वजह से ही हमारा कानपुर शहर वर्ल्ड वाइड फेमस हो गया। -- शुभांगी (अंगूरी भाभी)
भाषा और टोन पर पकड़ बनाना मुश्किल नहीं था। फ्री स्टाइल एक्टिंग करता हूं। फेसबुक और ट्विटर पर इस शहर के लोग मैसेज भेजकर बताते हैं कि किन शब्दों के इस्तेमाल से हमारा एपिसोड और भी ज्यादा पॉपुलर होगा। हम उन शब्दों को तुरंत अपनी कहानियों में जोड़ लेते हैं। कानपुर की बदनाम कुल्फी और मिठाई काफी टेस्टी है। एक बार पूरा कानपुर घूमने की तमन्ना है।-- आशिफ (विभूति जी)
मेरे मम्मी और पापा दोनों ही यूपी के हैं। मेरे दादा का पुश्तैनी मकान इसी शहर में है लास्ट टाइम जब चाचा जी गुजर गए थे तब आई थी। कई बार मैं कानपुर आ चुकी हूं। आईआईटी कानपुर में मेरे कई दोस्त हैं। मॉडर्न कानपुर की बेटी हूं। सौम्या को टीवी से ज्यादा फिल्मों में काम करना पसंद है। -- सौम्या (अनीता)
कनपुरिया भाषा में जो बात है वो किसी भाषा में नहीं। इन दिनों सोशल मीडिया के जरिए कनपुरिया लैंग्वेज पूरे देश में छाई हुई है। यहां के लोगों का बातचीत करने का तरीका बड़ा ही मजाकिया है। भरे गुस्से में अगर कोई कानपुर आ जाए तो एक मिनट में ही यहां की बोली परेशान से परेशान आदमी को भी खुश कर सकती है। गुस्से करने वाला इंसान हंसते-हंसते पागल भी हो सकता है। मेरा कानपुर और यहां की स्टाइल से बहुत पुराना नाता है।- ---कॉमडी एक्टर संजय मिश्रा
‘चिकाई और भौकाल शब्द का असली मतलब आज मैं जान गई हूं। लास्ट टाइम जब मैं कानपुर आई थी तो मुझे यहां की कचौड़ी बहुत अच्छी लगी। इसके बाद मैने चाट भी खाई। कानपुर की बोली ही नहीं यहां की हर चीज में एक अलग ही स्वाद है। यहां के फैन्स मुझसे कहते हैं कि शो की वजह से ही हमारा कानपुर शहर वर्ल्ड वाइड फेमस हो गया। -- शुभांगी (अंगूरी भाभी)
भाषा और टोन पर पकड़ बनाना मुश्किल नहीं था। फ्री स्टाइल एक्टिंग करता हूं। फेसबुक और ट्विटर पर इस शहर के लोग मैसेज भेजकर बताते हैं कि किन शब्दों के इस्तेमाल से हमारा एपिसोड और भी ज्यादा पॉपुलर होगा। हम उन शब्दों को तुरंत अपनी कहानियों में जोड़ लेते हैं। कानपुर की बदनाम कुल्फी और मिठाई काफी टेस्टी है। एक बार पूरा कानपुर घूमने की तमन्ना है।-- आशिफ (विभूति जी)
मेरे मम्मी और पापा दोनों ही यूपी के हैं। मेरे दादा का पुश्तैनी मकान इसी शहर में है लास्ट टाइम जब चाचा जी गुजर गए थे तब आई थी। कई बार मैं कानपुर आ चुकी हूं। आईआईटी कानपुर में मेरे कई दोस्त हैं। मॉडर्न कानपुर की बेटी हूं। सौम्या को टीवी से ज्यादा फिल्मों में काम करना पसंद है। -- सौम्या (अनीता)
कनपुरिया भाषा में जो बात है वो किसी भाषा में नहीं। इन दिनों सोशल मीडिया के जरिए कनपुरिया लैंग्वेज पूरे देश में छाई हुई है। यहां के लोगों का बातचीत करने का तरीका बड़ा ही मजाकिया है। भरे गुस्से में अगर कोई कानपुर आ जाए तो एक मिनट में ही यहां की बोली परेशान से परेशान आदमी को भी खुश कर सकती है। गुस्से करने वाला इंसान हंसते-हंसते पागल भी हो सकता है। मेरा कानपुर और यहां की स्टाइल से बहुत पुराना नाता है।- ---कॉमडी एक्टर संजय मिश्रा
सामने नहीं आना चाहत ‘मेक जोक ऑफ’ को बनाने वाले
मेक जोक ऑफ
मेक जोक ऑफ के वीडियो बनाने वाले मेकर्स से कई लोगों ने बात करने की कोशिश की। उनका कहना है कि ये दुनिया के सामने अपनी पहचान नहीं लाना चाहते। एक व्यक्तिगत समस्या के चलते ये सामने नहीं आना चाहते हैं। हमने इनसे सवाल-जवाब के लिए बातचीत करने की कोशिश की तो इन्होंने व्यस्तता का हवाला देते हुए सामने आने से साफ मना कर दिया। मेक जोक ऑफ के हो गया नहीं...हो गई (फनी क्लासरूम ड्रामा), ट्यूशन टीचर इंटरव्यू, डॉक्टर्स क्लीनिक पार्ट-1, डॉक्टर्स क्लीनिक पार्ट-2, स्टोरी ऑफ एन इंटरव्यू, एंग्री बाबा, क्रेजी टीचर, मकान मालिक, चाचा के पटाखे यूट्यूब और फेसबुक पर खूब लोकप्रिय हुए हैं।
अन्नू अवस्थी ने कराया ‘लड़के का तिलक’
कानपुर के शब्द और डायलॉग देशभर में हो रहे चर्चित
दिन भर की थकान और बातों को भुलाकर देर रात एकांत में बैठे-बैठे अन्नू को एक ख्याल आया और उन्होंने बना दिया एक ऑडियो क्लिप। देखते-देखते ऑडियो क्लिप उनके शहर में ही नहीं बल्कि देश में वायरल हो गया। अन्नू अवस्थी के यूट्यूब चैनल पर उनके कॉमेडी वीडियो लाखों लोगों ने देखे हैं। अन्नू की पहली वायरल ऑडियो क्लिप- लड़के का तिलक, चुनाव का सीजन, बाबू जी गायब और डेढ़ लाख गायब, टीचर की इज्जत करना सीखें, ससुराल की मेथी, किसमिस डे, नए साल की शुरुआत, बवासीर की कहानी काफी लोकप्रिय हुए। अब यूट्यूब पर भी उनके वीडियो हमेशा चर्चा में रहते हैं।
कानपुर के चर्चित शब्द
कानपुर के शब्द और डायलॉग देशभर में हो रहे चर्चित
डन (कम्प्लीट)-हुई गा
नॉट डन (इनकम्प्लीट)-नाई भा
वाए(क्यों)- काहे
वेन (कब)- कब
कम हियर (यहां आओ)- हियां आव
स्लैप (थप्पड़)- हउंक दीहिस, पेल दीहिस
कम्पलीटेड (काम पूरा)- काम 35
व्हाट (क्या)- आंय
मदर (मां)- माहतारी
फादर (पिता)- बप्पा
सनलाइट (धूप)- घाम
इस्क्यूज मी (सुनो जरा)- अबे ओय
व्हाट हैपेंड (क्या हुआ)- का हुआ बे
डोर (दरवाजा)- किमाड़ा
गेट (दरवाजे का एक हिस्सा)- पल्ला
लिसेन टू मी (कृपया मुझे सुनें) - सुन बे
कैट (बिल्ली)- बिलइया
रैट (चूहा), मुसरिया
माई हसबेंड (मेरे पति)- हमार उई
वाइफ (पत्नी)- घरइतिन
वूमन (औरत)- मेहेरिया
250 ग्राम (ढाई सौ ग्राम)- पउआ
फिंगर (उंगली)- अंगुरी
हेयर (बाल)- बार
बेडशीट (चादर)- चदरा
मूवी (फिल्म)- पिच्चर
लैडर (सीढ़ी)- नसेनी, जीना
पॉलिथीन - मोमियां, पन्नी
एवसम (बहुत बढ़िया)- चउकस
रेपोटेशन (प्रतिष्ठा)- भौकाल
नॉट डन (इनकम्प्लीट)-नाई भा
वाए(क्यों)- काहे
वेन (कब)- कब
कम हियर (यहां आओ)- हियां आव
स्लैप (थप्पड़)- हउंक दीहिस, पेल दीहिस
कम्पलीटेड (काम पूरा)- काम 35
व्हाट (क्या)- आंय
मदर (मां)- माहतारी
फादर (पिता)- बप्पा
सनलाइट (धूप)- घाम
इस्क्यूज मी (सुनो जरा)- अबे ओय
व्हाट हैपेंड (क्या हुआ)- का हुआ बे
डोर (दरवाजा)- किमाड़ा
गेट (दरवाजे का एक हिस्सा)- पल्ला
लिसेन टू मी (कृपया मुझे सुनें) - सुन बे
कैट (बिल्ली)- बिलइया
रैट (चूहा), मुसरिया
माई हसबेंड (मेरे पति)- हमार उई
वाइफ (पत्नी)- घरइतिन
वूमन (औरत)- मेहेरिया
250 ग्राम (ढाई सौ ग्राम)- पउआ
फिंगर (उंगली)- अंगुरी
हेयर (बाल)- बार
बेडशीट (चादर)- चदरा
मूवी (फिल्म)- पिच्चर
लैडर (सीढ़ी)- नसेनी, जीना
पॉलिथीन - मोमियां, पन्नी
एवसम (बहुत बढ़िया)- चउकस
रेपोटेशन (प्रतिष्ठा)- भौकाल