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प्रो. ओंकार सिंह बने एचबीटीयू के पहले कुलपति
अमर उजाला ब्यूरो कानपुर
Updated Tue, 30 Aug 2016 07:59 PM IST
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एचबीटीअार्ई कानपुर
हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) 1 सितंबर से अस्तित्व में आएगी। इसके पहले कुलपति की नियुक्ति मंगलवार को कर दी गई है। मदन मोहन मालवीय टेक्निकल यूनिवर्सिटी गोरखपुर के कुलपति प्रो. ओंकार सिंह अब एचबीटीयू के कुलपति होंगे। उनकी नियुक्ति तीन साल के लिए की गई है। प्रो. ओंकार सिंह एचबीटीआई कानपुर के मेकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में प्रोफेसर हैं। प्रति नियुक्ति पर गोरखपुर टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कुलपति बने थे।
एचबीटीयू यूपी की तीसरी टेक्निकल यूनिवर्सिटी होगी। पहली यूनिवर्सिटी डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) लखनऊ और मदन मोहन मालवीय टेक्निकल यूनिवर्सिटी गोरखपुर है। एचबीटीयू की नियमावली बन गई है। कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जल्द ही रजिस्ट्रार और वित्त नियंत्रक की नियुक्ति होगी, फिर शिक्षक और कर्मचारियों के खाली पद भरे जाएंगे। शिक्षकों के करीब 50 फीसदी पद खाली हैं। यूनिवर्सिटी बनने के बाद शिक्षकों की संख्या बढ़ जाएगी। नई यूनिवर्सिटी में एमबीए की पढ़ाई कराई जाएगी। बेसिक साइंस के तमाम कोर्स भी लांच होंगे।
चार फैकल्टी होगी
स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग
स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी
स्कूल ऑफ मैनेजमेंट
स्कूल ऑफ साइंस
पीजी, पीएचडी की सीटें बढ़ेंगी
यूनिवर्सिटी के अस्तित्व में आने के बाद एमएससी, एमटेक, एमसीए और पीएचडी की सीटें बढ़ जाएंगी। सारा फोकस रिसर्च और डेवलपमेंट पर होगा। इसका मसौदा पहले ही तैयार किया जा चुका है।
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एचबीटीयू यूपी की तीसरी टेक्निकल यूनिवर्सिटी होगी। पहली यूनिवर्सिटी डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) लखनऊ और मदन मोहन मालवीय टेक्निकल यूनिवर्सिटी गोरखपुर है। एचबीटीयू की नियमावली बन गई है। कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जल्द ही रजिस्ट्रार और वित्त नियंत्रक की नियुक्ति होगी, फिर शिक्षक और कर्मचारियों के खाली पद भरे जाएंगे। शिक्षकों के करीब 50 फीसदी पद खाली हैं। यूनिवर्सिटी बनने के बाद शिक्षकों की संख्या बढ़ जाएगी। नई यूनिवर्सिटी में एमबीए की पढ़ाई कराई जाएगी। बेसिक साइंस के तमाम कोर्स भी लांच होंगे।
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चार फैकल्टी होगी
स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग
स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी
स्कूल ऑफ मैनेजमेंट
स्कूल ऑफ साइंस
पीजी, पीएचडी की सीटें बढ़ेंगी
यूनिवर्सिटी के अस्तित्व में आने के बाद एमएससी, एमटेक, एमसीए और पीएचडी की सीटें बढ़ जाएंगी। सारा फोकस रिसर्च और डेवलपमेंट पर होगा। इसका मसौदा पहले ही तैयार किया जा चुका है।
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