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Kanpur News: अमेरिका, यूके की तरह होगी प्रोडक्ट-बेस्ड पीएचडी
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कानपुर। स्टार्टअप कर किसी प्रोडक्ट पर वर्षों से रिसर्च कर रहे युवा मेधावियों को अब अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) पीएचडी की उपाधि देने की तैयारी कर रहा है। अगले तीन महीने के अंदर इसकी शुरुआत हो जाएगी। यह जानकारी एआईसीटीई के चेयरमैन व दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने समारोह से पूर्व प्रेसवार्ता के दौरान दी। उन्होंने कहा कि केवल कागज पर मिली डिग्रियों से कुछ नहीं होने वाला। विदेश की तरह अब प्रोडक्ट बेस्ड पीएचडी कराई जाएगी। इसमें नया उत्पाद या तकनीक विकसित होगी, जिसका सीधा प्रभाव समाज पर पड़ेगा। इसके लिए संबंधित विवि छात्रों को सीड फंड देगा, जिससे वह रिसर्च और नवाचार करेंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूके सहित अन्य देश इसी तरह से पीएचडी कार्यक्रम चला रहे हैं।
प्रो. योगेश ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत इंजीनियरिंग को मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ने की छूट तब सार्थक होगी जब इंडस्ट्री का सहयोग मिलेगा। उन्होंने कहा कि पूरे देश से अभी हिंदी या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई के लिए छात्रों ने दाखिला लिया जरूर है, लेकिन उनकी संख्या अपेक्षाकृत कम है। इसका सीधा कारण छात्रों के मन में नौकरी न मिलने का डर है। अगर आने वाली कंपनियां छात्रों को भाषा के बजाए उनके ज्ञान के आधार पर नौकरी दें तो बेहतर रहेगा।
मैकेनिकल व सिविल इंजीनियरिंग जैसी ब्रांच की घटती संख्या के बारे में कहा कि यह समय का उतार-चढ़ाव है। वर्तमान दौर कंप्यूटर का है। इसलिए छात्र अपना करियर और भविष्य कंप्यूटर साइंस, एआई के क्षेत्र में बना रहे हैं। हालांकि सिविल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग का रुझान बढ़ाना होगा। उद्योगों को पार्टनर बनाकर काम करना होगा।
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समर्थ पोर्टल में छात्रों को आ रही दिक्कतों के बारे में उन्होंने कहा कि इस पर बहुत अधिक छात्रों का बोझ है। इसलिए कभी कभी कुछ दिक्कतें आती हैं। समर्थ से जुड़े सभी विश्वविद्यालयों को अपने स्तर पर टीम बनानी चाहिए। फिर भी, समर्थ को और अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी है।
प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) शिक्षा समेत हर सेक्टर में लागू होगा। यह जरूरी भी है। यह पहला मौका है, जब पूरी दुनिया में एआई क्षेत्र में हम समान स्तर पर खड़े हैं। इसकी मदद से विकसित देशों की श्रेणी में आ सकते हैं।
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डिग्री कागज का टुकड़ा, व्यवहार पहचान
दीक्षांत के अपने भाषण में उन्होंने कहा कि डिग्री कागज का एक टुकड़ा मात्र है, जबकि उनका व्यवहार ही उनकी वास्तविक शिक्षा का परिचायक होगा। उन्होंने युवाओं को जीवन में दर्शक बनने के बजाय ''''खिलाड़ी'''', ''''कप्तान'''' या ''''कोच'''' बनने का आह्वान किया। नेतृत्व की महत्ता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति को जिम्मेदारी निभाने के काबिल बनना चाहिए। ईश्वर भी जिम्मेदारी उसी को देता है जो उसे निभाने में सक्षम होता है।
हवाई जहाज का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि जैसे विमान हवा के विरोध में ही ऊपर उठता है, वैसे ही जीवन में आने वाला विरोध और चुनौतियां व्यक्ति की प्रगति के लिए ''''लिफ्ट'''' का काम करती हैं।
विदेश जाकर शोध या कार्य करने के इच्छुक छात्रों को उन्होंने प्रोत्साहित किया, लेकिन एक भावुक अपील भी की। उन्होंने कहा दुनिया की बेहतरीन लैब और कंपनियों में काम करें, लेकिन वापस भारत जरूर आएं। देश न केवल आपको चाहता है, बल्कि आपको भी उसकी जरूरत है। आज भारत दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है।
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प्रो. योगेश ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत इंजीनियरिंग को मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ने की छूट तब सार्थक होगी जब इंडस्ट्री का सहयोग मिलेगा। उन्होंने कहा कि पूरे देश से अभी हिंदी या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई के लिए छात्रों ने दाखिला लिया जरूर है, लेकिन उनकी संख्या अपेक्षाकृत कम है। इसका सीधा कारण छात्रों के मन में नौकरी न मिलने का डर है। अगर आने वाली कंपनियां छात्रों को भाषा के बजाए उनके ज्ञान के आधार पर नौकरी दें तो बेहतर रहेगा।
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मैकेनिकल व सिविल इंजीनियरिंग जैसी ब्रांच की घटती संख्या के बारे में कहा कि यह समय का उतार-चढ़ाव है। वर्तमान दौर कंप्यूटर का है। इसलिए छात्र अपना करियर और भविष्य कंप्यूटर साइंस, एआई के क्षेत्र में बना रहे हैं। हालांकि सिविल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग का रुझान बढ़ाना होगा। उद्योगों को पार्टनर बनाकर काम करना होगा।
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समर्थ पोर्टल में छात्रों को आ रही दिक्कतों के बारे में उन्होंने कहा कि इस पर बहुत अधिक छात्रों का बोझ है। इसलिए कभी कभी कुछ दिक्कतें आती हैं। समर्थ से जुड़े सभी विश्वविद्यालयों को अपने स्तर पर टीम बनानी चाहिए। फिर भी, समर्थ को और अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी है।
प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) शिक्षा समेत हर सेक्टर में लागू होगा। यह जरूरी भी है। यह पहला मौका है, जब पूरी दुनिया में एआई क्षेत्र में हम समान स्तर पर खड़े हैं। इसकी मदद से विकसित देशों की श्रेणी में आ सकते हैं।
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डिग्री कागज का टुकड़ा, व्यवहार पहचान
दीक्षांत के अपने भाषण में उन्होंने कहा कि डिग्री कागज का एक टुकड़ा मात्र है, जबकि उनका व्यवहार ही उनकी वास्तविक शिक्षा का परिचायक होगा। उन्होंने युवाओं को जीवन में दर्शक बनने के बजाय ''''खिलाड़ी'''', ''''कप्तान'''' या ''''कोच'''' बनने का आह्वान किया। नेतृत्व की महत्ता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति को जिम्मेदारी निभाने के काबिल बनना चाहिए। ईश्वर भी जिम्मेदारी उसी को देता है जो उसे निभाने में सक्षम होता है।
हवाई जहाज का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि जैसे विमान हवा के विरोध में ही ऊपर उठता है, वैसे ही जीवन में आने वाला विरोध और चुनौतियां व्यक्ति की प्रगति के लिए ''''लिफ्ट'''' का काम करती हैं।
विदेश जाकर शोध या कार्य करने के इच्छुक छात्रों को उन्होंने प्रोत्साहित किया, लेकिन एक भावुक अपील भी की। उन्होंने कहा दुनिया की बेहतरीन लैब और कंपनियों में काम करें, लेकिन वापस भारत जरूर आएं। देश न केवल आपको चाहता है, बल्कि आपको भी उसकी जरूरत है। आज भारत दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है।