प्रियंका गांधी ने 'अमर उजाला' की खबर को संज्ञान में लेकर किसानों की आत्महत्या पर मोदी सरकार को घेरा
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बांदा में किसानों की आत्महत्याओं के लिए बुंदेलखंड डेढ़ दशक से लगातार सुर्खियों में है। इसे राजनीतिक दलों ने मुद्दे के रूप में भी खूब भुनाया। अब इधर कुछ दिनों से किसानों की आत्महत्याओं को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का ट्वीट सुर्खियां बटोर रहा है।
प्रियंका गांधी ढाई माह में बुंदेलखंड में किसानों की आत्महत्या पर कई ट्वीट कर चुकी हैं। उनके 27 जुलाई 2019 के ताजे ट्वीट ने फिर बुंदेलखंड के किसानों की आत्महत्याओं के मुद्दे को हवा दे दी है। दैवी आपदाओं से टूटकर बुंदेलखंड में किसान लगातार जान गंवा रहे हैं।
मई 2006 में बांदा जिले के पड़ुई गांव में किसान किशोरीलाल साहू के खेत में फांसी लगाकर आत्महत्या के बाद यह सिलसिला थामे नहीं थमा। बढ़ता ही गया। आए दिन किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। इनमें ज्यादातर बैंक के कर्जदार भी हैं। कुछ सालों पूर्व शुरू हुई सरकार की कर्जमाफी योजनाएं भी कई किसानों की जिंदगियां बचा नहीं सकीं।
केंद्र और प्रदेश में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद किसानों की खुदकुशी को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी खासी संजीदा हैं। दो माह पूर्व बांदा में नरैनी तहसील के करीब एक हजार किसानों को आर्यावर्त बैंक द्वारा जारी किये गए नोटिसों की 4 मई को अमर उजाला में छपी खबर का संज्ञान लेकर प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया था।
नतीजतन अगले ही दिन बैंक अफसर बैकफुट पर आ गए थे और सफाई दी थी कि किसानों का कोई उत्पीड़न नहीं किया जा रहा। जुलाई में बुंदेलखंड के सिर्फ बांदा जिले में एक पखवारे में पांच किसान आत्महत्या कर चुके हैं। ये खबरें भी अमर उजाला में प्रकाशित हुईं थीं। इन मौतों पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ट्वीट के जरिये आगे आई हैं। उन्होंने बुंदेलखंड के किसानों की पैरवी करते हुए सरकार पर निशाना साधा है।
प्रियंका गांधी द्वारा किए गए ट्वीट
27 जुलाई 2019 : ‘किसान फसल उगाते हैं, दाम नहीं मिलता। सूखा-अकाल पड़ता है, मुआवजा नहीं मिलता। बुंदेलखंड के किसानों को हर दिन कुर्की की धमकियां मिल रही हैं। यह कौन सी किसान नीति है और कैसी कर्जमाफी है? जिसमें किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाएं?’
4 मई 2019 : ‘ये अन्याय और किसानों की पीड़ा देखिए। 40 हजार का कर्ज, ब्याज लगते-लगते एक लाख हो गया। देश के धन्नासेठों का 5-5 लाख करोड़ कर्जा ये सरकार चुटकी में माफ कर देती है, मगर किसानों को कर्ज न चुका पाने पर मुकदमे की धमकी देती है। ये अन्याय खत्म होगा। अब होगा न्याय।’
पल्हरी गांव के जूनियर स्कूल में दिव्यांग अनुदेशक राजेश ने तीन माह से मानदेय न मिलने पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। अमर उजाला में छपी इस खबर को टैग करते प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया था-
13 अप्रैल 2019 : ‘बांदा की ये घटना बहुत ही दुखद है। भाजपा ने आज कर्मचारियों को इस स्थिति में ला दिया है कि वो आत्महत्या को मजबूर हैं। अनुदेशकों के साथ भाजपा ने ऐसा धोखा किया है कि हमारे ये मेहनती कर्मचारी भीषण आर्थिक तंगहाली झेल रहे हैं। उत्तर प्रदेश की जनता माफ नहीं करेगी।’
जुलाई में बांदा के इन किसानों ने की आत्महत्या
5 जुलाई : छोटेलाल प्रजापति (65), मुसीवां (कमासिन)- फांसी।
6 जुलाई : महेश शुक्ला (46), महोखर (सदर तहसील)- आत्मदाह।
9 जुलाई : मुकेश (42), बघेलाबारी (अतर्रा)- फांसी।
13 जुलाई : धनीराम (65), बांदा शहर- ट्रेन से कटकर।
14 जुलाई : लाला श्रीवास (65), मुगौरा (नरैनी)- फांसी।