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यूपी: राष्ट्रपति को पसंद भाभी के हाथ की कढ़ी व रसियाउर, देवर के लिए तैयार करती थीं पसंदीदा व्यंजन
Thu, 24 Jun 2021 01:03 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर देहात
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर देहात
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 24 Jun 2021 01:03 PM IST
सार
राष्ट्रपति को भाभी के हाथ की कढ़ी और रसियाउर बहुत पसंद है। बताया कि कोविंद बेहद सरल स्वभाव के हैं। बिहार का राज्यपाल बनने के बाद भी झींझक में घर आकर परिवार का हालचाल लेते रहे। ऊंचे ओहदे पर पहुंचने के बाद भी क्षेत्रीय लोगों को नहीं भूले हैं
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
कानपुर देहात के झींझक में ओमनगर निवासी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के बड़े भाई प्यारेलाल कोविंद और भाभी गंगाजली उनसे मुलाकात के लिए उत्साहित हैं। राष्ट्रपति को भाभी के हाथ की कढ़ी और रसियाउर बहुत पसंद है।
बताया कि कोविंद बेहद सरल स्वभाव के हैं। बिहार का राज्यपाल बनने के बाद भी झींझक में घर आकर परिवार का हालचाल लेते रहे। ऊंचे ओहदे पर पहुंचने के बाद भी क्षेत्रीय लोगों को नहीं भूले हैं। बताया कि 1991 में घाटमपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव हारने के बाद रामनाथ कोविंद उदास हो गए थे।
तब उन्होंने हौसलाअफजाई करते हुए राजनीति में बने रहने की बात कही थी। प्यारेलाल ने बताया कि वह परिवार के साथ शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रपति भवन पहुंचे, तो छोटे भाई को राष्ट्रपति की शपथ लेते देख आंखों से आंसू छलक आए थे।
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भाभी गंगाजली बताती हैं कि देवर रामनाथ कोविंद को कढ़ी व रसियाउर (गन्ने के रस में पका चावल) बहुत पसंद है। अक्सर वह यही खाते थे। फिलहाल उनकी सेहत ठीक नहीं है। अबकी बार घर नहीं आ पा रहे हैं। घर आते तो कढ़ी बनाकर खिलाती।
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बताया कि कोविंद बेहद सरल स्वभाव के हैं। बिहार का राज्यपाल बनने के बाद भी झींझक में घर आकर परिवार का हालचाल लेते रहे। ऊंचे ओहदे पर पहुंचने के बाद भी क्षेत्रीय लोगों को नहीं भूले हैं। बताया कि 1991 में घाटमपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव हारने के बाद रामनाथ कोविंद उदास हो गए थे।
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तब उन्होंने हौसलाअफजाई करते हुए राजनीति में बने रहने की बात कही थी। प्यारेलाल ने बताया कि वह परिवार के साथ शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रपति भवन पहुंचे, तो छोटे भाई को राष्ट्रपति की शपथ लेते देख आंखों से आंसू छलक आए थे।
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भाभी गंगाजली बताती हैं कि देवर रामनाथ कोविंद को कढ़ी व रसियाउर (गन्ने के रस में पका चावल) बहुत पसंद है। अक्सर वह यही खाते थे। फिलहाल उनकी सेहत ठीक नहीं है। अबकी बार घर नहीं आ पा रहे हैं। घर आते तो कढ़ी बनाकर खिलाती।