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आध्यात्मिक गुरु को यादकर भावुक हुए राष्ट्रपति

Sat, 26 Jun 2021 01:30 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 26 Jun 2021 01:30 AM IST
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President gets emotional remembering spiritual guru
कानपुर देहात। राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार झींझक स्टेशन पहुंचे रामनाथ कोविंद अपने आध्यात्मिक गुरु बाबूराम बाजपेयी व मित्र रामविलास त्रिपाठी को मंच से याद करना नहीं भूले। वैश्विक महामारी कोरोना में उन्हें खोने का दुख जताते हुए वह काफी भावुक भी हो गए। उन्होंने श्रद्धांजलि देकर उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दी।
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झींझक निवासी अंजनी लल्लन शरण बाजपेयी ने बताया कि पिता स्व. बाबूराम बाजपेयी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आध्यात्मिक गुरु रहे हैं। उन्होंने यादें साझा करते हुए कहा कि तीन साल की उम्र में राष्ट्रपति की मां कलावती का निधन हो गया था। उस दौरान पिता पड़ोस में ही रहते थे। मां के न होने पर रामनाथ कोविंद के पालन का जिम्मा उनकी दादी ने लिया था।
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जिसके बाद वह पिता स्व. बाबूलाल के संपर्क मेें आ गए। शुरूआत से ही आध्यात्म में रुचि होने के कारण वह घंटों बातें किया करते। राष्ट्रपति के राज्यसभा सांसद रहने के दौरान वह कानपुर नगर आवास पर जाकर मिलते रहे। झींझक आने पर राष्ट्रपति का उनके यहां आना-जाना लगा रहा। बिहार का राज्यपाल व राष्ट्रपति बनने के दौरान शपथ ग्रहण समारोह में भी उन्होंने पिता को बुलाया था।
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अंजनी लल्लन शरण ने बताया कि वैश्विक महामारी के दौरान एक मई 2020 को पिता स्व. बाबूराम बाजपेयी का निधन हो गया था। इसकी जानकारी पर राष्ट्रपति भवन से शोक संदेश भेजा गया था। राष्ट्रपति के झींझक आने पर अपने आध्यात्मिक गुरु का जिक्र मंच से करने पर उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। कहा कि राष्ट्रपति ने आज भी उनके परिवार को याद रखा है यह बड़ी बात है।
राष्ट्रपति की भेंट की मूर्ति का आज भी करते पूजन
कानपुर देहात। स्व. बाबूराम बाजपेयी के बेटे अंजनी लल्लन शरण बाजपेयी ने बताया कि राज्यसभा सांसद रहने के दौरान रामनाथ कोविंद साल 2004 में मानसरोवर की यात्रा पर गए थे। वहां से वापस लौटने के बाद वह उनसे कानपुर आवास पर मिलने गए थे। वहां पर उन्होंने अपने आध्यात्मिक गुरु के लिए भगवान शिव की छोटी सी मूर्ति व रुद्राक्ष की माला भेंट की थी। जिसे वह अपने घर में रखे हुए हैं और पूरे परिवार के साथ आज भी पूजन अर्चन करते हैं।
करीबी मित्र के निधन पर जताया गहरा दुख
कानपुर देहात। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने करीबी मित्र रहे रसूलाबाद के स्व. रामविलास त्रिपाठी के निधन पर भी दुख जताया। स्व. रामविलास त्रिपाठी के बेटे जीतू त्रिपाठी ने बताया कि पिताजी व राष्ट्रपति की मित्रता साल 1991 में लोकसभा चुनाव के दौरान हुई थी। उस समय रामनाथ कोविंद लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे। पिताजी उनके चुनाव संयोजक थे।
राष्ट्रपति कई बार उनके घर आए, साथ ही रसूलाबाद के आजाद चौक के निकट बिल्हौर रोड पार्टी कार्यालय में आना-जाना लगा रहता था। 13 दिसंबर 2016 को बड़े भाई देवेंद्र त्रिपाठी की बेटी प्रिया की शादी में तत्कालीन बिहार के राज्यपाल के तौर पर रामनाथ हेलीकॉप्टर से घर आए और परिजनों से मुलाकात की थी।

उन्होंने सेना में लेफ्टिनेंट पद पर चयनित हुए भाई शैलेंद्र त्रिपाठी के बेटे समीर त्रिपाठी की पीठ थपथपा कर उज्जवल भविष्य की कामना की थी। उन्होंने 27 जून को राष्ट्रपति से मुलाकात होने की संभावना जताई है।
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