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कोरोना की तीसरी लहर से जंग की तैयारी: 1965 लोगों के बीच एक डॉक्टर, इस बार भी भगवान भरोसे इलाज

Thu, 03 Jun 2021 06:45 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Thu, 03 Jun 2021 06:45 PM IST
सार

आबादी के हिसाब से कानपुर में 5500 डॉक्टर होने चाहिए पर सिर्फ 2800 ही हैं। तीसरी लहर को देखते हुए संसाधन जुटाने तो शुरू कर दिए है लेकिन डॉक्टर कहां से लाएंगे।

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Preparation for war against third wave of Corona: 1965 among people a doctor
हैलट में संक्रमण विभाग - फोटो : amar ujala

विस्तार

कोरोना की तीसरी लहर की तैयारी के मद्देनजर अस्पतालों में संसाधन तो जुटाए जा रहे हैं लेकिन हकीकत यह है कि इन संसाधनों का सही ढंग से उपयोग करने के लिए पर्याप्त डॉक्टर ही नहीं हैं। संसाधन तो बाजार से खरीदकर जुटाए जा सकते हैैं लेकिन डॉक्टर कहां से आएंगे? कानपुर मेडिकल हब में भले ही शुमार होता है लेकिन यहां भी विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के हिसाब से डॉक्टर नहीं हैं।
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यहां 5500 के मुकाबले 2800 डॉक्टर (सरकारी, निजी सभी मिलाकर) हैं। शहर की आबादी के हिसाब से करीब 1965 लोगों पर एक डॉक्टर है। मानक के हिसाब से एक हजार लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के हिसाब से प्रति हजार व्यक्तियों पर एक डॉक्टर होना चाहिए।
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शहर की आबादी 55 लाख मान ली जाए तो इस हिसाब से 5500 डॉक्टरों की जरूरत है, लेकिन हैं आधे ही। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पास इस वक्त सदस्यों की संख्या 2253 है। इसके अलावा 547 डॉक्टर अस्थायी हैं। इसके अलावा शहर में आसपास के जिलों के पांच हजार रोगी रोज आते हैं। इनका भी लोड हेल्थ सिस्टम पर बढ़ता है। इस तरह आबादी और डाक्टरों का अनुपात और नीचे आ जाता है।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. एसके कटियार का कहना है कि अगर यह आंकड़ा विशेषज्ञों के अनुपात में निकाला जाए तो और कम हो जाएगा। 2800 डॉक्टरों का हिसाब तो एमबीबीएस डिग्री के हिसाब से है।

 

टेक्नीशियन, पैरामेडिक ल स्टाफ की भी कमी
अस्पतालों में डॉक्टरों के अलावा लैब टेक्नीशियन और पैरा मेडिकल स्टाफ की भी कमी है। निजी अस्पतालों को भी प्रशिक्षित स्टाफ नहीं मिल पा रहा है। सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज में सीटें खाली हैं। प्रस्ताव ठंडे बस्ते में हैं। कोरोना काल में अकेले जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में डेढ़ सौ पैरा मेडिकल स्टाफ और टेक्नीशियन की व्यवस्था आउट सोर्सिंग से की गई थी। 

आबादी के हिसाब से तो मेडिकल स्टाफ की संख्या बहुत कम है। डॉक्टरों के अलावा दूसरे मेडिकल स्टाफ की भी कमी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानक पूरा नहीं हो रहा है।   
डॉ. एमके सरावगी, अध्यक्ष नर्सिंगहोम एसोसिएशन

विश्व स्वास्थ्य संगठन के हिसाब से तो मानक पूरा नहीं हो रहा है। इसके अलावा दूसरे जिलों से आने वाले रोगियों का भी लोड बढ़ता है। अस्पतालों में संसाधन तो जुटाए जा सकते हैं, लेकिन ऐसे डॉक्टरों की व्यवस्था तो नहीं हो सकती।
डॉ. एसी अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष इंडियन मेडिकल एसोसिएशन

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