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दर्द से कराहती प्रसूता की मौत के बाद नवजात भी मरा, परिजनों ने डॉक्टरों पर लगाया लापरवाही का आरोप
Mon, 30 Sep 2019 11:29 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
यूपी डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 30 Sep 2019 11:29 PM IST
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यूपी पुलिस
चित्रकूट जिले में प्रसव दर्द से तड़पती प्रसूता को नाजुक हालत में लेकर परिजन जिला अस्पातल पहुंचे । प्रसव होते ही जच्चा बच्चा की मौत हो गई। परिजनों ने स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया जबकि डाक्टर व स्टाफ ने बताया कि प्रसूता के शरीर में खून की बहुत कमी थी।
परिजनों ने पूर्व में कोई जांच व इलाज नहीं कराया था। रामनगर ब्लाक क्षेत्र के करौंदी कला निवासी हाल मुकाम छींबो निवासी रूबीना को रविवार की देर शाम को तेज प्रसव दर्द होने पर पति सदानंद व अन्य परिजन निजी वाहन से उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। उसकी हालत बेहद नाजुक थी।
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परिजनों ने पूर्व में कोई जांच व इलाज नहीं कराया था। रामनगर ब्लाक क्षेत्र के करौंदी कला निवासी हाल मुकाम छींबो निवासी रूबीना को रविवार की देर शाम को तेज प्रसव दर्द होने पर पति सदानंद व अन्य परिजन निजी वाहन से उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। उसकी हालत बेहद नाजुक थी।
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जिसकी जानकारी होने पर डाक्टर व स्टाफ ने इलाज शुरु किया। कुछ देर रात रात को ही प्रसूता ने मृत बच्चा जना और इसके बाद कराहती प्रसूता की भी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने स्टाफ पर देरी से इलाज करने व लापरवाही बरतने का आरोप लगाया।
इसकी जानकारी होते ही रात को सीएमएस जच्चा बच्चा वार्ड पहुंचे। पूरी जानकारी के बाद परिजनों के संतुष्ट होने पर शव को अस्पताल वाहन से गांव भेजा गया। इस मामले में सीएमएस डा. आरके गुप्ता व स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. रफीक अंसारी ने बताया कि आरोप गलत हैं।
प्रसूता के शरीर में बेहद कम मात्रा में खून बचा था। जिसकी जांच कराई गई। परिजनों ने ही बताया कि इसके पहले कोई जांच या दवा नहीं कराई गई। रात में ही अस्पताल से रक्त का इंतजाम कराया गया। रक्त चढ़ाने के पूर्व ही प्रसूता की मौत हो गई और उसका बच्चा भी मृत ही था। प्रसव के दौरान गर्भ की नाल फंसी होने से रक्तस्त्राव जारी था। यदि परिजन पहले से प्रसूता के स्वास्थ्य का कुछ ध्यान रखते तो उसकी जान निश्चित बचाई जा सकती थी।
इसकी जानकारी होते ही रात को सीएमएस जच्चा बच्चा वार्ड पहुंचे। पूरी जानकारी के बाद परिजनों के संतुष्ट होने पर शव को अस्पताल वाहन से गांव भेजा गया। इस मामले में सीएमएस डा. आरके गुप्ता व स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. रफीक अंसारी ने बताया कि आरोप गलत हैं।
प्रसूता के शरीर में बेहद कम मात्रा में खून बचा था। जिसकी जांच कराई गई। परिजनों ने ही बताया कि इसके पहले कोई जांच या दवा नहीं कराई गई। रात में ही अस्पताल से रक्त का इंतजाम कराया गया। रक्त चढ़ाने के पूर्व ही प्रसूता की मौत हो गई और उसका बच्चा भी मृत ही था। प्रसव के दौरान गर्भ की नाल फंसी होने से रक्तस्त्राव जारी था। यदि परिजन पहले से प्रसूता के स्वास्थ्य का कुछ ध्यान रखते तो उसकी जान निश्चित बचाई जा सकती थी।