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आईडीएच में वेंटिलेटर खराब, हंगामा
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sun, 22 Feb 2015 02:26 AM IST
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संक्रामक रोग अस्पताल (आईडीएच) के स्वाइन फ्लू वार्ड में शुक्रवार रात दो बजे वेंटिलेटर खराब होने से निर्मला त्रिपाठी (57) की हालत बिगड़ गई। सीनियर डॉक्टर को बुलाने की बजाय जूनियर डॉक्टर ही वेंटिलेटर शुरू करने की कोशिश करने लगा। काफी देर तक वेंटिलेटर ठीक न होने पर परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया।
इस पर जूनियर डॉक्टर भड़क गया और तीमारदारों से गाली - गलौज करने लगा। दूसरे जूनियर डॉक्टरों ने बीच - बचाव कर मामला शांत कराया। इसके बाद महिला के परिजनों को एंबुबैग दे दिया। रात से लेकर पूरे दिन तक परिजन एंबुबैग से महिला को कृत्रिम सांस देते रहे।
आईडीएच के सीएमएस डॉ. एके शुक्ला ने कहा कि मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत नहीं थी। इसलिए एंबुबैग दिया गया। काकादेव तुलसीनगर के अंबिका चरण त्रिपाठी स्माल आर्म्स फैक्ट्री में जूनियर वर्क्स मैनेजर पद से रिटायर हैं। उनकी पत्नी निर्मला त्रिपाठी को स्वाइन फ्लू के लक्षणों के बाद शुक्रवार को आईडीएच में भर्ती कराया गया था।
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निर्मला की शुक्रवार देर शाम हालत बिगड़ने लगी तो डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर कर दिया। देर रात करीब दो बजे वेंटिलेटर से लगे सिलेंडर में आक्सीजन खत्म हो गई तो वेंटिलेटर बंद हो गया। वेंटिलेटर में ऑक्सीजन न लग पाने के कारण कुछ दिन पहले शुक्लागंज की मीनू की मौत हो गई थी।
जिम्मेदार बोले
मामले की जानकारी नहीं है, लेकिन यदि ऐसा है तो बहुत गंभीर है। इसकी पूरी जानकारी करूंगा और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन जो सूचना मिली है उसके मुताबिक वेंटिलेटर ठीक हैं।
- प्रो. नवनीत कुमार, प्रिंसिपल, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
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इस पर जूनियर डॉक्टर भड़क गया और तीमारदारों से गाली - गलौज करने लगा। दूसरे जूनियर डॉक्टरों ने बीच - बचाव कर मामला शांत कराया। इसके बाद महिला के परिजनों को एंबुबैग दे दिया। रात से लेकर पूरे दिन तक परिजन एंबुबैग से महिला को कृत्रिम सांस देते रहे।
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आईडीएच के सीएमएस डॉ. एके शुक्ला ने कहा कि मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत नहीं थी। इसलिए एंबुबैग दिया गया। काकादेव तुलसीनगर के अंबिका चरण त्रिपाठी स्माल आर्म्स फैक्ट्री में जूनियर वर्क्स मैनेजर पद से रिटायर हैं। उनकी पत्नी निर्मला त्रिपाठी को स्वाइन फ्लू के लक्षणों के बाद शुक्रवार को आईडीएच में भर्ती कराया गया था।
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निर्मला की शुक्रवार देर शाम हालत बिगड़ने लगी तो डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर कर दिया। देर रात करीब दो बजे वेंटिलेटर से लगे सिलेंडर में आक्सीजन खत्म हो गई तो वेंटिलेटर बंद हो गया। वेंटिलेटर में ऑक्सीजन न लग पाने के कारण कुछ दिन पहले शुक्लागंज की मीनू की मौत हो गई थी।
जिम्मेदार बोले
मामले की जानकारी नहीं है, लेकिन यदि ऐसा है तो बहुत गंभीर है। इसकी पूरी जानकारी करूंगा और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन जो सूचना मिली है उसके मुताबिक वेंटिलेटर ठीक हैं।
- प्रो. नवनीत कुमार, प्रिंसिपल, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज