पूजा हत्याकांडः 30 दिन, 25 पुलिस कर्मी और जिलेभर के रिकॉर्ड रूम खंगाले, तब मिली फाइल…पढ़ें पूरा मामला
Kanpur News: कर्नलगंज थाना में 19 जुलाई 1991 को बेनाझाबर निवासी संजय अवस्थी केस दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनके मकान मालिक विपिन मोहन गौतम, अनिल गौतम, प्रदीप गौतम समेत पांच लोगों ने पीट-पीटकर विपिन की 13 साल की बेटी की हत्या कर दी।
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कानपुर में कर्नलगंज के पूजा हत्याकांड की खो चुकी फाइल को आखिरकार पुलिस ने ढूंढ निकाला 30 दिन में 25 पुलिस कर्मियों ने जिलेभर के सभी रिकॉर्ड रूम में दिनरात तलाशा। आखिर में पुलिस ऑफिस में रखी एक अलमारी में रजिस्टर में फाइल के बारे में जानकारी मिली और पता चला कि मामले में हत्या आरोपियों को क्लीनचिट मिल गई थी।
मकान मालिक और किराएदारी के विवाद में हत्या का झूठा मामला दर्ज कराया गया था। एसीपी ने बताया कि रिपोर्ट संबंधित कोर्ट, प्रमुख सचिव, सीएम ऑफिस समेत अन्य अफसरों को भेज दी गई है। एसीपी कर्नलगंज महेश कुमार ने बताया कि कोर्ट में एक शिकायत की गई थी कि 19 जुलाई 1991 को हुए पूजा गौतम हत्याकांड की फाइल गायब कर दी गई है।
केस में आज तक पीड़ित परिवार को इंसाफ नहीं मिल सका है। कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया और पुलिस को केस की फाइल तलाशकर सामने लाने का आदेश दिया था। शासन तक मामला पहुंचा, जिसमें कहा गया कि पूजा हत्याकांड को पुलिस ने दबा दिया है। इस केस की फाइल तलाशने के लिए चार टीमों का गठन किया गया। इसमें प्रत्येक टीम में पांच-पांच पुलिस कर्मी थे।
एसीपी कर्नलगंज को फाइल तलाशने के लिए लगाया था
इसके साथ ही पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने एडिशनल पुलिस कमिश्नर मुख्यालय विपिन कुमार मिश्रा से लेकर एसीपी कर्नलगंज को फाइल तलाशने के लिए लगाया था। फाइल तलाशने के लिए सबसे पहले पुलिस के रिकॉर्डरूम, कोतवाली थाने के सबसे बड़े रिकॉर्ड रूम, डीएम ऑफिस, जिला जज रिकॉर्ड रूम, पुलिस लाइन, बंद हो चुके एसआईएस दफ्तर और संबंधित सभी जगह को खंगाला गया।
फाइल नहीं मिली, तो फाइल रिसीव करने वालों पर ही कार्रवाई
इस दौरान केस से जुड़े दस्तावेज मिले। इससे साफ हो गया कि मामले में फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की गई थी। कोर्ट मोहर्रिर हेड कांस्टेबल साहब सिंह ने इसे रिसीव किया था। पुलिस तलाश करते हुए साहब सिंह के बेटे सीएमएम कोर्ट के पेशकार प्रमोद सिंह के पास पहुंची और तस्दीक कराने पर साफ हुआ कि रिसीविंग फाइल पर उसके पिता के ही हस्ताक्षर है। पुलिस अफसरों ने कहा कि अगर फाइल नहीं मिली तो फाइल रिसीव करने वालों पर ही कार्रवाई की जाएगी। हालांकि इसके बाद सीएममए कोर्ट के पेशकार ने कोर्ट के रिकार्ड रूम से ही फाइल को तलाश करके पुलिस को सौंप दिया।
फाइल तलाशने वालों को मिला इनाम
एसीपी ने बताया कि हत्याकांड के आरोप से जुड़ी फाइल को तलाश करने में उप निरीक्षक अजय कुमार राय, मुख्य आरक्षी विक्रम सिंह, आरक्षी अमित पाल और आरक्षी दीपक महतो ने अहम भूमिका निभाई। इसके चलते पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार की ओर से इन सभी को नगद इनाम की घोषणा की गई है।
कर्नलगंज थाना में 19 जुलाई 1991 को बेनाझाबर निवासी संजय अवस्थी केस दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनके मकान मालिक विपिन मोहन गौतम, अनिल गौतम, प्रदीप गौतम समेत पांच लोगों ने पीट-पीटकर विपिन की 13 साल की बेटी की हत्या कर दी। कर्नलगंज थाने के दरोगा एसके शुक्ला, फिर दरोगा शीतला प्रसाद ने जांच की। इसमें धारा 302 को बढ़ाया।
एसआईएस ने लगा दी थी फाइनल रिपोर्ट
इसके बाद मामले में तत्कालीन कर्नलगंज थाना प्रभारी रामशरण सिंह ने 18 सितंबर 1991 को चार्जशीट लगा दी। हालांकि तत्कालीन एसएसपी ने मामले की जांच एसआईएस (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन सेल) को सौंप दी। एसआईएस ने मामले में जांच के बाद पाया कि झूठे आरोप लगाए गए हैं। इसके बाद एसआईएस ने मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी।