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स्नान करना तो दूर, आचमन के लायक नहीं रहा गंगा जल

Thu, 05 Jan 2017 12:51 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 05 Jan 2017 12:51 AM IST
सार

-टेनरियों से गंगा में मिल रहे हानिकारक तत्वों की मात्रा बढ़ी -काली नदी के कचरे से भी तेजी से गंगा में बढ़ रहा प्रदूषण

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pollution of the ganges kanpur
डेमो

विस्तार

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कानपुर की गंगा को सबसे ज्यादा प्रदूषित बताया है। जिसकी वजह उन्होंने काली नदी और रामगंगा से आ रहे कचरे को बताया है। बुधवार को जब इसकी पड़ताल की गई तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। प्रदूषण नियंत्रण की जांच मे टेनरियों से गंगा में मिल रहे हानिकारक तत्वों की मात्रा तेजी से बढ़ी है। यह मात्रा तीन गुने से भी ज्यादा पाई गई है। यह स्थिति कानपुर के जाजमऊ क्षेत्र में ज्यादा है।
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बोर्ड के अनुसार इसकी वजह टेनरियों से निकलने वाला कचरा माना जा रहा है जो अभी भी बिना ट्रीटमेंट के गंगा में जा रहा है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री ने टेनरियों के कचरे को ट्रीटमेंट करने के लिए यहां पर बड़ी क्षमता वाला ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की घोषणा की थी, जो अभी तक नहीं किया गया। गंगा में टेनरियों और शहर के नालों के जरिए पिछले काफी समय से कचरा तेजी से जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से मेरठ, बुलंदशहर, फर्रूखाबाद ,अलीगढ़ होते हुए काली नदी के साथ आने वाले कचरे ने गंगा की स्थिति और बदहाल कर दी है। इसकी वजह से भी प्रदूषण की मात्रा में बढ़ोत्तरी हुई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी मोहम्मद सिकंदर का कहना है कि हानिकारक तत्वों की मात्रा बढ़ने से पानी का प्रयोग नुकसानदायक हो जाता है।
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वर्तमान में स्थिति ज्यादा खतरनाक है। बोर्ड समय- समय पर प्रदूषण मात्रा की रिपोर्ट जारी करता रहता है। इसके अनुसार टेनरियों को हिदायत भी दी जाती है। ये है प्रदूषण का स्तर 100 बीओडी (बायो केमिकल आक्सीजन डिमांड पानी के हानिकारक तत्वों को मापने की इकाई) है। इसका मतलब पानी में हानिकारक बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ रही है। 30 बीओडी की मात्रा सामान्य मानी जाती है जबकि इस समय 100 बीओडी है यानी तीन गुना से भी ज्यादा। -300 सीओडी है (केमिकल आक्सीजन डिमांड) गंगा में घुलने वाले हानिकारक तत्वों की मात्रा।
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इसका मतलब गंगा रहने वाले जंतुओं के लिए सांस लेने में दिक्कत बढ़ती जाती है। यदि कोई व्यक्ति उसमें खड़ा भी होता है तो उसकी स्किन को नुकसान पहुंचेगा। 250 सीओडी सामान्य मात्रा होती है। केंद्र सरकार पहले अपनी योजना बताए केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती के उस स्टेटमेंट को लेकर टेनरी संचालक असमंजस में हैं जिसमें उन्होंने कहा है कि गंगा प्रदूषण मसले पर टेनरियों को लेकर बनाई गई योजना से टेनरी संचालक सहमत हैं। ऑल इंडिया इन्वायरमेंटल सस्टेनेबल कमेटी फॉर टेनरी के एग्जीक्यूटिव मेंबर असद के इराकी का कहना है कि केंद्र सरकार पहले तो यह बताए कि उसका प्लान क्या है। तभी यह तय हो पाएगा कि टेनरी संचालक सहमत हैं या नही।
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