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टेनरियां हटेंगी नहीं, तो कैसे साफ होगी गंगा
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 05 Dec 2016 10:36 PM IST
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कानपुर में गंगा प्रदूषण की ये है हालत
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने प्रदेश सरकार का पक्ष सुनने के बाद कहा कि यदि कानपुर में गंगा किनारे से टेनरियों को हटाना मुश्किल है तो गंगा का प्रदूषण कैसे दूर होगा। इसका उपाय भी उत्तर प्रदेश सरकार को ही बताना पड़ेगा। इस मसले पर ट्रिब्युनल ने केंद्र सरकार की गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अधिकारियों को कटघरे में लिया। सुनवाई अभी जारी रहेगी। प्रदेश सरकार की तरफ से महाधिवक्ता विजय बहादुर ने पक्ष रखा कि टेनरियां नहीं हटाई जा सकती हैं।
पिछले करीब 10 वर्षों से गंगा के प्रदूषण को दूर करने के लिए टेनरियां दूसरी जगह स्थापित कराने को लेकर मशक्कत चल रही है। हर बार कोई न कोई योजना बनती है। न तो गंगा का प्रदूषण कम हो रहा है और न ही टेनरियों को यहां से हटाया जा रहा है। प्रदेश के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यह कोशिश एक बार फिर से मुद्दा बन गई है। केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच इस मसले पर कई बार बैठकें, बहस और सर्वे हो चुका है, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। इस बार पहली दिसंबर से एनजीटी में सुनवाई चल रही है। हर बार टेनरियों का मामला आने पर सुनवाई आगे टल जाती है।
सोमवार को प्रदेश के महाधिवक्ता ने ट्रिब्युनल चेयरमैन स्वतंत्र कुमार के सामने करीब एक घंटे तक सरकार का पक्ष रखा। इस पर एनजीटी ने कहा कि यदि टेनरियों को हटाए बगैर गंगा का प्रदूषण दूर हो सकता है तो यह कैसे होगा, इसे प्रदेश सरकार को ही बताना होगा। सुनवाई अभी जारी है। 6 दिसंबर को महाधिवक्ता प्रदेश सरकार के एजेंडे को एनजीटी के सामने रखेंगे। सुनवाई के दौरान यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रमुख संजीव सरन, यूपीएसआईडीसी के एमडी अमित घोष भी मौजूद रहे।
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पिछले करीब 10 वर्षों से गंगा के प्रदूषण को दूर करने के लिए टेनरियां दूसरी जगह स्थापित कराने को लेकर मशक्कत चल रही है। हर बार कोई न कोई योजना बनती है। न तो गंगा का प्रदूषण कम हो रहा है और न ही टेनरियों को यहां से हटाया जा रहा है। प्रदेश के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यह कोशिश एक बार फिर से मुद्दा बन गई है। केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच इस मसले पर कई बार बैठकें, बहस और सर्वे हो चुका है, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। इस बार पहली दिसंबर से एनजीटी में सुनवाई चल रही है। हर बार टेनरियों का मामला आने पर सुनवाई आगे टल जाती है।
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सोमवार को प्रदेश के महाधिवक्ता ने ट्रिब्युनल चेयरमैन स्वतंत्र कुमार के सामने करीब एक घंटे तक सरकार का पक्ष रखा। इस पर एनजीटी ने कहा कि यदि टेनरियों को हटाए बगैर गंगा का प्रदूषण दूर हो सकता है तो यह कैसे होगा, इसे प्रदेश सरकार को ही बताना होगा। सुनवाई अभी जारी है। 6 दिसंबर को महाधिवक्ता प्रदेश सरकार के एजेंडे को एनजीटी के सामने रखेंगे। सुनवाई के दौरान यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रमुख संजीव सरन, यूपीएसआईडीसी के एमडी अमित घोष भी मौजूद रहे।
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